मऊ जिले में 2017 में एक किशोर अपहरण मामले में ट्रायल में भारी देरी और लापरवाही को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद शासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है। गृह विभाग ने मऊ के तीन पूर्व पुलिस अधीक्षकों आईपीएस अविनाश पांडेय (2015 बैच), इलामारन जी (2016 बैच) और प्रमोटी आईपीएस कमलेश बहादुर (2017 बैच) के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने का आदेश जारी कर दिया है। जल्द ही जांच अधिकारियों की तैनाती की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने 21 सितंबर 2026 के आदेश में राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि 2023 से अब तक मऊ में पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात रहे सभी अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू की जाए। कोर्ट ने इसे उनके लापरवाह रवैये और मुकदमे से जुड़े कर्तव्यों में सामूहिक विफलता बताया। कोर्ट ने कहा कि आरोप तय होने के तीन साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अभियोजन पक्ष के 54 गवाहों में से केवल दो के बयान दर्ज हो पाए थे। पीठ ने टिप्पणी की कि गवाहों को ट्रायल कोर्ट के सामने पेश करने की जिम्मेदारी जांच एजेंसी की है और इसमें लगातार विफलता को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। मुख्य सचिव को अगली सुनवाई यानी 16 नवंबर तक व्यक्तिगत रूप से सत्यापित हलफनामा दाखिल कर कार्रवाई की स्थिति बताने को कहा गया है। कोर्ट ने चेतावनी भी दी कि अगर आरोप केवल औपचारिकता भर पाए गए तो सक्षम अधिकारी के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है। क्या है पूरा मामला? यह मामला 27 सितंबर 2017 का है, जब मऊ में एक 14 वर्षीय किशोर का कथित अपहरण हुआ था। आरोपों के मुताबिक न तो बच्चा मिला और न ही उसके अवशेषों का कोई सुराग लगा। छह आरोपियों के खिलाफ 27 मार्च 2023 को आरोप तय किए गए थे, लेकिन ट्रायल में प्रगति बेहद धीमी रही। पीड़ित परिवार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। एटा के एसपी हैं इलामारन जी, हटाया जाना तय आईपीएस अधिकारी इलामारन जी मौजूदा समय में एटा के एसपी हैं। वे 28 फरवरी 2024 से 30 मार्च 2026 तक एटा जिले के एसपी थे। 30 मार्च को उनका तबादला एटा कर दिया गया था और उनके स्थान पर कमलेश बहादुर को एसपी बनाया गया था। विभागीय जांच शुरु होने के बाद इलामारन जी का एटा से हटना तय हो गया है।

