उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या की FIR से चर्चा में आईं कल्पना मिश्रा उर्फ कल्पना चतुर्वेदी को आखिरकार जेल से बाहर आने का रास्ता मिल गया है। 14 जुलाई को जेल भेजी गई कल्पना को ADJ-8 अशोक कुमार यादव की कोर्ट ने 50 हजार रुपए के मुचलके पर जमानत दे दी। मंत्री ने कल्पना पर अपने नाम-पद और पति गिरधारी लाल साहू के नाम-पते के इस्तेमाल, चोरी, जालसाजी और पद का रौब दिखाकर धन उगाही के गंभीर आरोप लगाए थे। जमानत पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दावा किया कि कल्पना खुद गिरधारी लाल साहू के व्यापार में 25 हजार रुपए महीने की मैनेजर थीं। इसके लिए 6 जुलाई 2022 का पंजीकृत अनुबंध भी कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने रिकॉर्ड देखने के बाद संबंधित दस्तावेजों को फर्जी साबित करने वाला कोई स्पष्ट साक्ष्य नहीं पाया। मंत्री के नाम-पते के इस्तेमाल का आरोप रेखा आर्या की ओर से दर्ज FIR में आरोप लगाया गया था कि कल्पना मिश्रा ने अपने आधार कार्ड, पासपोर्ट समेत दूसरे दस्तावेजों में उनके पति गिरधारी लाल साहू का नाम और बरेली स्थित आवास का पता इस्तेमाल किया। आरोप था कि वह मंत्री के नाम और पद का प्रभाव दिखाकर लोगों पर रौब जमाती थीं और धन उगाही करती थीं। शिकायत में यह भी कहा गया था कि कल्पना जिस हुंडई क्रेटा कार से चलती थीं, उस पर उत्तराखंड सरकार का बोर्ड, हूटर और नीली-लाल बत्ती लगी थी। मंत्री ने कल्पना और डॉ. आरसी पांडेय की गतिविधियों की जांच की मांग भी की थी। घर से 7 लाख रुपए और रुद्राक्ष की माला चोरी का आरोप मंत्री ने बरेली स्थित आवास से 7 लाख रुपए और सोने से जड़ी रुद्राक्ष की माला चोरी होने का भी आरोप लगाया था। शिकायत के आधार पर 9 सितंबर 2024 को बारादरी थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने पहले मामले की विवेचना कर अंतिम रिपोर्ट लगा दी थी। बाद में आपत्ति के बाद दोबारा विवेचना कराई गई। इसी मुकदमे में कल्पना मिश्रा को 14 जुलाई 2026 को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया था। अब कोर्ट के जमानत आदेश के बाद उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। बचाव पक्ष बोला- 25 हजार रुपए वेतन पर मैनेजर थीं जमानत पर सुनवाई के दौरान कल्पना के वरिष्ठ अधिवक्ता लवलेश पाठक ने आरोपों को गलत बताया। उन्होंने कोर्ट में 6 जुलाई 2022 का पंजीकृत अनुबंध पेश किया। इसके मुताबिक गिरधारी लाल साहू ने कल्पना को अपने व्यापार में 25 हजार रुपए महीने के वेतन पर मैनेजर नियुक्त किया था। बचाव पक्ष ने दलील दी कि नौकरी के दौरान कल्पना का मानसिक, शारीरिक और आर्थिक शोषण किया गया। उनकी निजी रकम भी हड़प ली गई। विरोध करने और शिकायत करने की बात कहने पर प्रभाव का इस्तेमाल कर उन्हें मुकदमे में फंसा दिया गया। तीन बैनामों में मंत्री के घर का पता होने का दावा मंत्री पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए तीन बैनामों का हवाला दिया। आरोप लगाया गया कि अलग-अलग तारीखों में तैयार इन दस्तावेजों में रेखा आर्या के बरेली स्थित आवास का पता इस्तेमाल किया गया। अभियोजन ने इसे गंभीर मामला बताते हुए आशंका जताई कि जमानत मिलने पर आरोपी साक्ष्यों और गवाहों को प्रभावित कर सकती हैं। कोर्ट ने कहा- दस्तावेज फर्जी होने का स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं कोर्ट ने केस डायरी और दोनों पक्षों की दलीलों का अवलोकन किया। जमानत आदेश में दर्ज है कि कल्पना के पास गिरधारी लाल साहू की मैनेजर होने से संबंधित पंजीकृत अनुबंध मौजूद है। कोर्ट ने यह भी देखा कि आधार कार्ड में पता बदला जा सकता है, जबकि पासपोर्ट जैसे दस्तावेजों के लिए पुलिस सत्यापन की प्रक्रिया होती है। कोर्ट के सामने पेश रिकॉर्ड में संबंधित दस्तावेजों को फर्जी साबित करने वाला कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं मिला। अदालत ने यह भी ध्यान दिया कि मामले के आरोप प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट से विचारणीय हैं और आरोपी की पूर्व दोषसिद्धि की कोई रिपोर्ट पेश नहीं की गई। इन परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने कल्पना मिश्रा उर्फ कल्पना चतुर्वेदी को जमानत दे दी। उन्हें 50 हजार रुपए के व्यक्तिगत बंधपत्र और इतनी ही राशि की एक जमानत दाखिल करने पर रिहा करने का आदेश दिया गया है। कोर्ट ने सुनवाई में सहयोग करने और साक्ष्यों व गवाहों को प्रभावित नहीं करने की शर्त भी लगाई है।

