पटना समेत 7 जिलों के लाखों लोगों की थाली में परोसे जा रहे भोजन की शुद्धता राम भरोसे है। मिलावटखोरी पर नकेल कसने का जिम्मा जिस खाद्य सुरक्षा विभाग पर है, वह खुद संसाधनों की भारी कमी से जूझ रहा है। विभाग के पास न तो बैठने के लिए ढंग का दफ्तर है और न ही जांच के लिए उठाए गए खाद्य नमूनों को सुरक्षित रखने के पूरे उपकरण। महज 150 वर्गफीट के एक कमरे से 7 जिलों का काम निपटाया जा रहा है, वहीं पूरे क्षेत्र की निगरानी का जिम्मा एक ही डेजिगनेटेड अफसर के कंधों पर टिका है। पटना में पदस्थापित खाद्य संरक्षा अधिकारी पर नालंदा, भोजपुर, बक्सर, अरवल, रोहतास और कैमूर की भी जिम्मेदारी है। एक ही अधिकारी को सातों जिलों में औचक निरीक्षण, सैंपलिंग, कोर्ट केस और कानूनी कार्रवाई की फाइलें देखनी पड़ रही हैं। न पर्याप्त फील्ड स्टाफ है और न ही विभाग की अपनी गाड़ियां। ऐसे में एक जिले से दूसरे जिले तक पहुंचना ही अपने आप में बड़ी चुनौती बन जाता है। दूसरी तरफ, राजधानी में रेस्टोरेंट, कैफे, मिठाई दुकानों, डेयरी और स्ट्रीट फूड का दायरा तेजी से फैल रहा है, जिसकी नियमित निगरानी इस सीमित अमले से लगभग नामुमकिन हो चुकी है। छह बड़ी समस्याएं 1. 150 वर्गफीट के कमरे में स्टाफ, फाइलों और जब्त सामान का अंबार। 2. एक अफसर पर 7 जिलों पटना, नालंदा, भोजपुर, बक्सर, अरवल, रोहतास और कैमूर का बोझ। 3. 6 रेफ्रिजरेटर की जरूरत, मौजूद सिर्फ 1, सैंपल खराब होने का जोखिम। 4. फील्ड स्टाफ की भारी कमी। 5. जब्त या सीज की गई सामग्री रखने के लिए वेयरहाउस नहीं। 6. बिना सरकारी वाहन के त्वरित रेड और सैंपलिंग में दिक्कत। सैंपल खराब होने का जोखिम : छह रेफ्रिजरेटर की जरूरत, 1 ही उपलब्ध खाद्य जांच प्रक्रिया की रीढ़ सैंपल प्रिजर्वेशन है। खुले दूध, पनीर, तेल या अन्य नष्ट होने वाले पदार्थों के नमूनों को जांच लैब तक भेजने से पहले तय तापमान पर सुरक्षित रखना अनिवार्य होता है। विभाग को कम से कम 6 रेफ्रिजरेटर की दरकार है, जबकि उपलब्ध एक ही है। ऐसे में अलग-अलग प्रकृति के सैंपलों को एक ही जगह रखने से क्रॉस-कंटामिनेशन और जांच रिपोर्ट प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है। यही नहीं, छापेमारी में जब्त की गई मिलावटी खाद्य सामग्री को सुरक्षित रखने के लिए वेयरहाउस तक नहीं है। पटना जैसे बड़े शहर में नियमित निरीक्षण, सैंपलिंग और खाद्य नमूनों के सुरक्षित रखरखाव के लिए अतिरिक्त मैनपावर, वाहन, कार्यालयी सुविधाओं और स्टोरेज की आवश्यकता रहती है। वर्तमान में उपलब्ध संसाधनों के आधार पर विभागीय कार्य नियमित रूप से संचालित किए जा रहे हैं। संसाधनों की कमी जरूर है, लेकिन इसका विभाग के नियमित निरीक्षण, सैंपलिंग और कार्रवाई की प्रक्रिया पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ रहा है।-सुदामा चौधरी, डेजिगनेटेड अफसर, खाद्य सुरक्षा विभाग पटना समेत 7 जिलों के लाखों लोगों की थाली में परोसे जा रहे भोजन की शुद्धता राम भरोसे है। मिलावटखोरी पर नकेल कसने का जिम्मा जिस खाद्य सुरक्षा विभाग पर है, वह खुद संसाधनों की भारी कमी से जूझ रहा है। विभाग के पास न तो बैठने के लिए ढंग का दफ्तर है और न ही जांच के लिए उठाए गए खाद्य नमूनों को सुरक्षित रखने के पूरे उपकरण। महज 150 वर्गफीट के एक कमरे से 7 जिलों का काम निपटाया जा रहा है, वहीं पूरे क्षेत्र की निगरानी का जिम्मा एक ही डेजिगनेटेड अफसर के कंधों पर टिका है। पटना में पदस्थापित खाद्य संरक्षा अधिकारी पर नालंदा, भोजपुर, बक्सर, अरवल, रोहतास और कैमूर की भी जिम्मेदारी है। एक ही अधिकारी को सातों जिलों में औचक निरीक्षण, सैंपलिंग, कोर्ट केस और कानूनी कार्रवाई की फाइलें देखनी पड़ रही हैं। न पर्याप्त फील्ड स्टाफ है और न ही विभाग की अपनी गाड़ियां। ऐसे में एक जिले से दूसरे जिले तक पहुंचना ही अपने आप में बड़ी चुनौती बन जाता है। दूसरी तरफ, राजधानी में रेस्टोरेंट, कैफे, मिठाई दुकानों, डेयरी और स्ट्रीट फूड का दायरा तेजी से फैल रहा है, जिसकी नियमित निगरानी इस सीमित अमले से लगभग नामुमकिन हो चुकी है। छह बड़ी समस्याएं 1. 150 वर्गफीट के कमरे में स्टाफ, फाइलों और जब्त सामान का अंबार। 2. एक अफसर पर 7 जिलों पटना, नालंदा, भोजपुर, बक्सर, अरवल, रोहतास और कैमूर का बोझ। 3. 6 रेफ्रिजरेटर की जरूरत, मौजूद सिर्फ 1, सैंपल खराब होने का जोखिम। 4. फील्ड स्टाफ की भारी कमी। 5. जब्त या सीज की गई सामग्री रखने के लिए वेयरहाउस नहीं। 6. बिना सरकारी वाहन के त्वरित रेड और सैंपलिंग में दिक्कत। सैंपल खराब होने का जोखिम : छह रेफ्रिजरेटर की जरूरत, 1 ही उपलब्ध खाद्य जांच प्रक्रिया की रीढ़ सैंपल प्रिजर्वेशन है। खुले दूध, पनीर, तेल या अन्य नष्ट होने वाले पदार्थों के नमूनों को जांच लैब तक भेजने से पहले तय तापमान पर सुरक्षित रखना अनिवार्य होता है। विभाग को कम से कम 6 रेफ्रिजरेटर की दरकार है, जबकि उपलब्ध एक ही है। ऐसे में अलग-अलग प्रकृति के सैंपलों को एक ही जगह रखने से क्रॉस-कंटामिनेशन और जांच रिपोर्ट प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है। यही नहीं, छापेमारी में जब्त की गई मिलावटी खाद्य सामग्री को सुरक्षित रखने के लिए वेयरहाउस तक नहीं है। पटना जैसे बड़े शहर में नियमित निरीक्षण, सैंपलिंग और खाद्य नमूनों के सुरक्षित रखरखाव के लिए अतिरिक्त मैनपावर, वाहन, कार्यालयी सुविधाओं और स्टोरेज की आवश्यकता रहती है। वर्तमान में उपलब्ध संसाधनों के आधार पर विभागीय कार्य नियमित रूप से संचालित किए जा रहे हैं। संसाधनों की कमी जरूर है, लेकिन इसका विभाग के नियमित निरीक्षण, सैंपलिंग और कार्रवाई की प्रक्रिया पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ रहा है।-सुदामा चौधरी, डेजिगनेटेड अफसर, खाद्य सुरक्षा विभाग

