बिहार विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक की 8 सीटों पर वोटिंग खत्म हो गई है। आठ सीटों के लिए हुए मतदान में शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की 4 सीटों पर औसतन 74.55 फीसदी और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की चार सीटों के लिए औसतन 43.87 फीसदी मतदान हुआ। पिछले साल की तुलना में शिक्षक निर्वाचन में 2 फीसदी ज्यादा और स्नातक निर्वाचन में 5 फीसदी कम वोटिंग हुई। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की 4 सीटों पर 2020 में 72.5 फीसदी वोटिंग हुई थी, जबकि स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की 4 सीटों पर 48.5 फीसदी मतदान हुआ था। सिटिंग MLC ही रिपीट करते दिख रहे चुनाव के दौरान 30 जिलों में भास्कर के 100 से ज्यादा रिपोर्टर ग्राउंड पर रहे। चुनाव के बाद हमने अपने रिपोर्टर से वोटिंग के रुझान को समझने की कोशिश की। भास्कर के इस पड़ताल में मौजूदा सिटिंग सीटों में बहुत बड़ा उलटफेर होता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है। ज्यादातर सीटों पर सिटिंग MLC ही रिपीट करते दिखाई दे रहे हैं। 5 सीटों पर NDA को बढ़त मिलती दिख रही है। वहीं, 3 सीटों पर विपक्षी पार्टी या निर्दलीय उम्मीदवार आगे नजर आ रहे हैं। नहीं चला अनंत सिंह का जादू मोकामा विधायक और बाहुबली नेता अनंत सिंह के मैदान में उतरने के बाद पटना स्नातक सबसे हॉट सीट बन गई थी। अनंत सिंह ने पूरे इलाके में एक के बाद एक कई रोड शो किए थे। इसके बाद भी इस सीट पर बदलाव होते नहीं दिख रहा है। यहां एक बार फिर से JDU के नीरज कुमार चुनाव में बढ़त बनाते दिख रहे हैं। भास्कर की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में 8 सीटों का पूरा ब्योरा जानिए.. 1. पटना स्नातक- अनंत सिंह की भीड़ वोट में कन्वर्ट नहीं हुई पटना स्नातक सीट पर JDU के सिटिंग MLC नीरज कुमार के खिलाफ उनकी ही पार्टी के मोकामा विधायक अनंत सिंह ने मोर्चा खोल दिया था। उन्होंने जनसुराज के कैंडिडेट अनुज कुमार को समर्थन दिया था। RJD ने दिलीप पटेल को कैंडिडेट बनाया था। इन तीनों के कारण मुकाबला त्रिकोणीय जरूर हुआ, लेकिन बूथ पर समीकरण पूरी तरह बदल गया है। नीरज लगातार तीन टर्म से MLC हैं और इस इलाके में उनका अपना पॉकेट वोट है, इसका उन्हें लाभ मिला है। अनंत सिंह के कारण अनुज सिंह को लाइमलाइट जरूर मिली, लेकिन अनंत सिंह की भीड़ चुनाव के दौरान वोट में कन्वर्ट होती हुई नहीं दिखी। भूमिहार वोटों में अनुज बहुत हद तक बिखराव करते हुए नहीं दिखे। वहीं, दिलीप पटेल का पूरा फोकस नालंदा में कुर्मी वोटर्स पर था। लेकिन जमीन पर जदयू के बड़े नेताओं की मोर्चेबंदी के बाद इस वर्ग में भी बहुत बिखराव होता हुआ नहीं दिखा। इसका सीधा लाभ नीरज कुमार को मिलेगा। 2. पटना शिक्षक- BJP और RJD में कांटे की टक्कर
पटना शिक्षक सीट का मुकाबला दिलचस्प हो गया है। यहां BJP के 5 बार के सिटिंग MLC नवल किशोर यादव का मुकाबला पहली बार MLC का चुनाव लड़ रहे RJD के संजीव कुमार के साथ है। जन सुराज की दिव्या ज्योति ने मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश जरूर की, लेकिन सफल होती हुई नहीं दिखी। बूथ पर असली मुकाबला संजीव कुमार और नवल किशोर यादव के बीच दिखा। यहां कांटे की टक्कर है। बेहद कम वोट से हार-जीत हो सकती है। सरकार होने के कारण नवल किशोर यादव को इसका लाभ मिल सकता है। 3. तिरहुत शिक्षक- संजय सिंह की जमीन पर मजबूत पकड़ तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के तहत पड़ने वाले मुजफ्फरपुर, वैशाली, शिवहर और सीतामढ़ी जिले में मौजूदा MLC CPI के संजय सिंह की मजबूत जमीनी पकड़ दिखी। हर जिले में उन्हें वोट मिला है। बीजेपी के नरेंद्र प्रसाद सिंह कमबैक की कोशिश करते हुए जरूर दिखे, लेकिन इलाके में संगठन का साथ नहीं मिला। जातीय गोलबंदी के साथ निर्दलीय भूषण झा भी उनका खेल बिगाड़े हैं। 4. तिरहुत स्नातक-अभिषेक को देवेश के कारण नुकसान यहां एक बार फिर से वंशीधर ब्रिजवासी लीड लेते हुए दिखाई दे रहे हैं। शिक्षक होते हुए भी ग्रेजुएट वोटर्स के बीच उनकी मजबूत पकड़ दिखी। वहीं, JDU के अभिषेक झा को सीतामढ़ी और शिवहर के इलाके में देवेश चंद्र ठाकुर के कारण नुकसान होता हुआ दिखाई दे रहा है। मुस्लिम और कुशवाहा लेकर दिए गए उनके बयानों की नाराजगी अभी तक जमीन पर दिखी। राजद की रश्मि विनायक गौतम तीसरे स्थान पर रह सकती हैं। जनसुराज का बहुत प्रभाव यहां नहीं दिखा। 5. दरभंगा शिक्षक- मदन मोहन झा हो सकते हैं रिपीट एक मात्र सीट दरभंगा शिक्षक कांग्रेस कोटे में जा सकती है। यहां सिटिंग MLC मदन मोहन झा एक बार फिर से लीड लेते हुए दिखाई दे रहे हैं। आखिरी समय में घनश्याम राय को उतारकर JDU ने खेल बदलने की कोशिश की थी, लेकिन JDU कैंडिडेट बहुत ज्यादा उलटफेर करते नजर नहीं आए। जनसुराज के एसपी राय मुकाबले में आने की कोशिश जरूर की, लेकिन आखिरी समय में एक बार फिर मदन मोहन झा ही बाजी मारते हुए दिख रहे हैं। 6. दरभंगा स्नातक- RJD और BJP में मुकाबला दरभंगा स्नातक में BJP के सर्वेश कुमार और RJD के अनिल झा के बीच सीधी टक्कर है। सर्वेश कुमार पिछली बार यहां से निर्दलीय चुनाव लड़े और जीते थे। अब BJP में आने के बाद अपने पॉकेट वोट के साथ उन्हें BJP के सपोर्ट का भी फायदा मिलते दिख रहा है। RJD के कोर वोटर्स ने अनिल झा को सपोर्ट किया है। प्रशांत किशोर ने यहां से मुस्लिम कैंडिडेट डॉ. मो. इम्तियाज को उतारकर मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश जरूर की, लेकिन प्रयोग सफल होता नहीं दिख रहा है। 7. सारण शिक्षक- NDA की गुटबाजी का अफाक को फायदा सारण शिक्षक के अलग-अलग इलाकों में NDA की गुटबाजी साफ तौर पर दिखी। छपरा में BJP से बागी होकर चुनाव लड़े राहुल राज ने आनंद पुष्कर के वोट में सेंधमारी की है। वहीं, सिवान में NDA के एक बड़ा चंक ने रमेंद्र राय को समर्थन दिया है। बेतिया में एकमुश्त वोट अफाक अहमद के पाले में गया है। आनंद पुष्कर के JDU से लड़ने से जनसुराज के अफाक अहमद की राह आसान नहीं है। मुकाबला नेक टू नेक का है। लड़ाई में अफाक थोड़े आगे दिख रहे हैं। 8. कोसी स्नातक-महागठबंधन का वोट बंटा, एनके यादव को सीधा लाभ कोसी स्नातक एकमात्र ऐसी सीट मिली जहां सिटिंग MLC एनके यादव के खिलाफ कोई एंटी इनकंबेंसी नहीं दिखी। यहां बड़ा उलटफेर जनसुराज की तरफ से करने की कोशिश की गई। BJP और RJD की तरफ से यादव कैंडिडेट को मैदान में उतारा गया था। जनसुराज ने यहां राजपूत समाज से आने वाले रजनीश रंजन को मैदान में उतारा। लेकिन रजनीश सहरसा और कुछ हद तक मधेपुरा तक ही सीमित दिखे। कोसी, अंग और सीमांचल तीनों इलाके में NDA की मजबूत पकड़ का फायदा एनके यादव को मिला और वे यहां अच्छी बढ़त बनाते दिखे। बिहार विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक की 8 सीटों पर वोटिंग खत्म हो गई है। आठ सीटों के लिए हुए मतदान में शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की 4 सीटों पर औसतन 74.55 फीसदी और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की चार सीटों के लिए औसतन 43.87 फीसदी मतदान हुआ। पिछले साल की तुलना में शिक्षक निर्वाचन में 2 फीसदी ज्यादा और स्नातक निर्वाचन में 5 फीसदी कम वोटिंग हुई। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की 4 सीटों पर 2020 में 72.5 फीसदी वोटिंग हुई थी, जबकि स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की 4 सीटों पर 48.5 फीसदी मतदान हुआ था। सिटिंग MLC ही रिपीट करते दिख रहे चुनाव के दौरान 30 जिलों में भास्कर के 100 से ज्यादा रिपोर्टर ग्राउंड पर रहे। चुनाव के बाद हमने अपने रिपोर्टर से वोटिंग के रुझान को समझने की कोशिश की। भास्कर के इस पड़ताल में मौजूदा सिटिंग सीटों में बहुत बड़ा उलटफेर होता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है। ज्यादातर सीटों पर सिटिंग MLC ही रिपीट करते दिखाई दे रहे हैं। 5 सीटों पर NDA को बढ़त मिलती दिख रही है। वहीं, 3 सीटों पर विपक्षी पार्टी या निर्दलीय उम्मीदवार आगे नजर आ रहे हैं। नहीं चला अनंत सिंह का जादू मोकामा विधायक और बाहुबली नेता अनंत सिंह के मैदान में उतरने के बाद पटना स्नातक सबसे हॉट सीट बन गई थी। अनंत सिंह ने पूरे इलाके में एक के बाद एक कई रोड शो किए थे। इसके बाद भी इस सीट पर बदलाव होते नहीं दिख रहा है। यहां एक बार फिर से JDU के नीरज कुमार चुनाव में बढ़त बनाते दिख रहे हैं। भास्कर की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में 8 सीटों का पूरा ब्योरा जानिए.. 1. पटना स्नातक- अनंत सिंह की भीड़ वोट में कन्वर्ट नहीं हुई पटना स्नातक सीट पर JDU के सिटिंग MLC नीरज कुमार के खिलाफ उनकी ही पार्टी के मोकामा विधायक अनंत सिंह ने मोर्चा खोल दिया था। उन्होंने जनसुराज के कैंडिडेट अनुज कुमार को समर्थन दिया था। RJD ने दिलीप पटेल को कैंडिडेट बनाया था। इन तीनों के कारण मुकाबला त्रिकोणीय जरूर हुआ, लेकिन बूथ पर समीकरण पूरी तरह बदल गया है। नीरज लगातार तीन टर्म से MLC हैं और इस इलाके में उनका अपना पॉकेट वोट है, इसका उन्हें लाभ मिला है। अनंत सिंह के कारण अनुज सिंह को लाइमलाइट जरूर मिली, लेकिन अनंत सिंह की भीड़ चुनाव के दौरान वोट में कन्वर्ट होती हुई नहीं दिखी। भूमिहार वोटों में अनुज बहुत हद तक बिखराव करते हुए नहीं दिखे। वहीं, दिलीप पटेल का पूरा फोकस नालंदा में कुर्मी वोटर्स पर था। लेकिन जमीन पर जदयू के बड़े नेताओं की मोर्चेबंदी के बाद इस वर्ग में भी बहुत बिखराव होता हुआ नहीं दिखा। इसका सीधा लाभ नीरज कुमार को मिलेगा। 2. पटना शिक्षक- BJP और RJD में कांटे की टक्कर
पटना शिक्षक सीट का मुकाबला दिलचस्प हो गया है। यहां BJP के 5 बार के सिटिंग MLC नवल किशोर यादव का मुकाबला पहली बार MLC का चुनाव लड़ रहे RJD के संजीव कुमार के साथ है। जन सुराज की दिव्या ज्योति ने मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश जरूर की, लेकिन सफल होती हुई नहीं दिखी। बूथ पर असली मुकाबला संजीव कुमार और नवल किशोर यादव के बीच दिखा। यहां कांटे की टक्कर है। बेहद कम वोट से हार-जीत हो सकती है। सरकार होने के कारण नवल किशोर यादव को इसका लाभ मिल सकता है। 3. तिरहुत शिक्षक- संजय सिंह की जमीन पर मजबूत पकड़ तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के तहत पड़ने वाले मुजफ्फरपुर, वैशाली, शिवहर और सीतामढ़ी जिले में मौजूदा MLC CPI के संजय सिंह की मजबूत जमीनी पकड़ दिखी। हर जिले में उन्हें वोट मिला है। बीजेपी के नरेंद्र प्रसाद सिंह कमबैक की कोशिश करते हुए जरूर दिखे, लेकिन इलाके में संगठन का साथ नहीं मिला। जातीय गोलबंदी के साथ निर्दलीय भूषण झा भी उनका खेल बिगाड़े हैं। 4. तिरहुत स्नातक-अभिषेक को देवेश के कारण नुकसान यहां एक बार फिर से वंशीधर ब्रिजवासी लीड लेते हुए दिखाई दे रहे हैं। शिक्षक होते हुए भी ग्रेजुएट वोटर्स के बीच उनकी मजबूत पकड़ दिखी। वहीं, JDU के अभिषेक झा को सीतामढ़ी और शिवहर के इलाके में देवेश चंद्र ठाकुर के कारण नुकसान होता हुआ दिखाई दे रहा है। मुस्लिम और कुशवाहा लेकर दिए गए उनके बयानों की नाराजगी अभी तक जमीन पर दिखी। राजद की रश्मि विनायक गौतम तीसरे स्थान पर रह सकती हैं। जनसुराज का बहुत प्रभाव यहां नहीं दिखा। 5. दरभंगा शिक्षक- मदन मोहन झा हो सकते हैं रिपीट एक मात्र सीट दरभंगा शिक्षक कांग्रेस कोटे में जा सकती है। यहां सिटिंग MLC मदन मोहन झा एक बार फिर से लीड लेते हुए दिखाई दे रहे हैं। आखिरी समय में घनश्याम राय को उतारकर JDU ने खेल बदलने की कोशिश की थी, लेकिन JDU कैंडिडेट बहुत ज्यादा उलटफेर करते नजर नहीं आए। जनसुराज के एसपी राय मुकाबले में आने की कोशिश जरूर की, लेकिन आखिरी समय में एक बार फिर मदन मोहन झा ही बाजी मारते हुए दिख रहे हैं। 6. दरभंगा स्नातक- RJD और BJP में मुकाबला दरभंगा स्नातक में BJP के सर्वेश कुमार और RJD के अनिल झा के बीच सीधी टक्कर है। सर्वेश कुमार पिछली बार यहां से निर्दलीय चुनाव लड़े और जीते थे। अब BJP में आने के बाद अपने पॉकेट वोट के साथ उन्हें BJP के सपोर्ट का भी फायदा मिलते दिख रहा है। RJD के कोर वोटर्स ने अनिल झा को सपोर्ट किया है। प्रशांत किशोर ने यहां से मुस्लिम कैंडिडेट डॉ. मो. इम्तियाज को उतारकर मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश जरूर की, लेकिन प्रयोग सफल होता नहीं दिख रहा है। 7. सारण शिक्षक- NDA की गुटबाजी का अफाक को फायदा सारण शिक्षक के अलग-अलग इलाकों में NDA की गुटबाजी साफ तौर पर दिखी। छपरा में BJP से बागी होकर चुनाव लड़े राहुल राज ने आनंद पुष्कर के वोट में सेंधमारी की है। वहीं, सिवान में NDA के एक बड़ा चंक ने रमेंद्र राय को समर्थन दिया है। बेतिया में एकमुश्त वोट अफाक अहमद के पाले में गया है। आनंद पुष्कर के JDU से लड़ने से जनसुराज के अफाक अहमद की राह आसान नहीं है। मुकाबला नेक टू नेक का है। लड़ाई में अफाक थोड़े आगे दिख रहे हैं। 8. कोसी स्नातक-महागठबंधन का वोट बंटा, एनके यादव को सीधा लाभ कोसी स्नातक एकमात्र ऐसी सीट मिली जहां सिटिंग MLC एनके यादव के खिलाफ कोई एंटी इनकंबेंसी नहीं दिखी। यहां बड़ा उलटफेर जनसुराज की तरफ से करने की कोशिश की गई। BJP और RJD की तरफ से यादव कैंडिडेट को मैदान में उतारा गया था। जनसुराज ने यहां राजपूत समाज से आने वाले रजनीश रंजन को मैदान में उतारा। लेकिन रजनीश सहरसा और कुछ हद तक मधेपुरा तक ही सीमित दिखे। कोसी, अंग और सीमांचल तीनों इलाके में NDA की मजबूत पकड़ का फायदा एनके यादव को मिला और वे यहां अच्छी बढ़त बनाते दिखे।

