भारतीय कुश्ती के लिए शुक्रवार का दिन ऐतिहासिक बन गया। हरियाणा की मनीषा भानवाला ने कजाकिस्तान की राजधानी अस्ताना में विश्व कुश्ती चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक जीतकर नया इतिहास रच दिया। वह विश्व कुश्ती चैंपियन बनने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बन गई हैं। 29 साल की मनीषा ने 59 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल में अमेरिका की ए. एलिजाबेथ नेटे को 8-6 से हराकर यह बड़ी उपलब्धि हासिल की। मुकाबला काफी रोमांचक रहा, क्योंकि पहले दौर के बाद मनीषा 1-6 से पीछे चल रही थीं, लेकिन उन्होंने शानदार वापसी करते हुए मुकाबला अपने नाम कर लिया।हालांकि, 59 किलोग्राम भार वर्ग ओलंपिक की श्रेणी में शामिल नहीं है, लेकिन मनीषा की इस जीत का महत्व कम नहीं है। इससे पहले किसी भी भारतीय महिला पहलवान ने विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक नहीं जीता था। इस बार भारतीय महिला पहलवानों का प्रदर्शन भी काफी अच्छा रहा। मनीषा के अलावा नीलम सिरोही ने 50 किलोग्राम और काजल ढोचक ने 76 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल में जगह बनाई। हालांकि, दोनों को रजत पदक से संतोष करना पड़ा। ये दोनों भार वर्ग ओलंपिक की श्रेणी में शामिल हैं।मनीषा से पहले अंशु मलिक विश्व चैंपियनशिप के फाइनल तक पहुंचने वाली इकलौती भारतीय महिला पहलवान थीं। उन्होंने 2021 में 57 किलोग्राम भार वर्ग में रजत पदक जीता था। वहीं, देश की अनुभवी पहलवान विनेश फोगाट विश्व चैंपियनशिप में 2 कांस्य पदक जीत चुकी हैं। अंतिम पंघाल के नाम भी 2 कांस्य पदक हैं, जो उन्होंने ओलंपिक भार वर्गों में हासिल किए हैं।पुरुषों की फ्रीस्टाइल कुश्ती में भारत के लिए विश्व चैंपियन बनने वाले एकमात्र पहलवान सुशील कुमार हैं। उन्होंने 2010 में मॉस्को में हुई विश्व चैंपियनशिप के 66 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था। दो बार के ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार के अलावा बजरंग पूनिया भी 2018 में बुडापेस्ट में विश्व चैंपियनशिप के फाइनल तक पहुंचे थे, लेकिन उन्हें रजत पदक मिला था।मनीषा की यह जीत भारतीय महिला कुश्ती के लिए इसलिए भी खास है, क्योंकि एशियाई खेलों में टीम का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा था। वहां अंतिम पंघाल ही पदक जीत सकी थीं। उन्होंने 53 किलोग्राम भार वर्ग में रजत पदक हासिल किया था। मनीषा ने भी एशियाई खेलों में 57 किलोग्राम भार वर्ग में हिस्सा लिया था, लेकिन क्वार्टर फाइनल में जापान की अकारी फुजिनामी से हार गई थीं। इसके बाद उन्होंने विश्व चैंपियनशिप में 59 किलोग्राम भार वर्ग में उतरने का फैसला किया, जो उनके लिए सफल साबित हुआ।फाइनल तक पहुंचने के सफर में मनीषा ने कई मजबूत पहलवानों को हराया। उन्होंने पहले विश्व चैंपियनशिप की कांस्य पदक विजेता लॉरेंस ब्यूरेगार्ड को मात दी और फिर उन्हें चित कर दिया। इसके बाद मंगोलिया की बोलोरतूया खुरेलखू को हराया। सेमीफाइनल में उन्होंने कजाकिस्तान की अल्तिन शागायेवा को भी चित करके फाइनल में जगह बनाई।फाइनल में पैन अमेरिकी चैंपियन ए. एलिजाबेथ नेटे के खिलाफ मनीषा की शुरुआत अच्छी नहीं रही। पहले दौर के बाद वह 1-6 से पीछे थीं। लेकिन दूसरे दौर में उन्होंने लगातार हमले किए और मुकाबले का रुख बदल दिया। आखिरकार 8-6 से जीत दर्ज कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।हरियाणा के जींद की रहने वाली मनीषा 57 से 65 किलोग्राम तक के अलग-अलग भार वर्गों में मुकाबले कर चुकी हैं और इससे पहले 3 बार विश्व चैंपियनशिप में हिस्सा ले चुकी हैं। उनके इसी अनुभव ने कठिन फाइनल में वापसी करने में अहम भूमिका निभाई। उनकी इस जीत ने भारतीय महिला कुश्ती को नई पहचान दी है और आने वाली पीढ़ी की पहलवानों के लिए एक बड़ी मिसाल पेश की हैं।
भारतीय कुश्ती के लिए शुक्रवार का दिन ऐतिहासिक बन गया। हरियाणा की मनीषा भानवाला ने कजाकिस्तान की राजधानी अस्ताना में विश्व कुश्ती चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक जीतकर नया इतिहास रच दिया। वह विश्व कुश्ती चैंपियन बनने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बन गई हैं। 29 साल की मनीषा ने 59 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल में अमेरिका की ए. एलिजाबेथ नेटे को 8-6 से हराकर यह बड़ी उपलब्धि हासिल की। मुकाबला काफी रोमांचक रहा, क्योंकि पहले दौर के बाद मनीषा 1-6 से पीछे चल रही थीं, लेकिन उन्होंने शानदार वापसी करते हुए मुकाबला अपने नाम कर लिया।
हालांकि, 59 किलोग्राम भार वर्ग ओलंपिक की श्रेणी में शामिल नहीं है, लेकिन मनीषा की इस जीत का महत्व कम नहीं है। इससे पहले किसी भी भारतीय महिला पहलवान ने विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक नहीं जीता था। इस बार भारतीय महिला पहलवानों का प्रदर्शन भी काफी अच्छा रहा। मनीषा के अलावा नीलम सिरोही ने 50 किलोग्राम और काजल ढोचक ने 76 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल में जगह बनाई। हालांकि, दोनों को रजत पदक से संतोष करना पड़ा। ये दोनों भार वर्ग ओलंपिक की श्रेणी में शामिल हैं।
मनीषा से पहले अंशु मलिक विश्व चैंपियनशिप के फाइनल तक पहुंचने वाली इकलौती भारतीय महिला पहलवान थीं। उन्होंने 2021 में 57 किलोग्राम भार वर्ग में रजत पदक जीता था। वहीं, देश की अनुभवी पहलवान विनेश फोगाट विश्व चैंपियनशिप में 2 कांस्य पदक जीत चुकी हैं। अंतिम पंघाल के नाम भी 2 कांस्य पदक हैं, जो उन्होंने ओलंपिक भार वर्गों में हासिल किए हैं।
पुरुषों की फ्रीस्टाइल कुश्ती में भारत के लिए विश्व चैंपियन बनने वाले एकमात्र पहलवान सुशील कुमार हैं। उन्होंने 2010 में मॉस्को में हुई विश्व चैंपियनशिप के 66 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था। दो बार के ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार के अलावा बजरंग पूनिया भी 2018 में बुडापेस्ट में विश्व चैंपियनशिप के फाइनल तक पहुंचे थे, लेकिन उन्हें रजत पदक मिला था।
मनीषा की यह जीत भारतीय महिला कुश्ती के लिए इसलिए भी खास है, क्योंकि एशियाई खेलों में टीम का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा था। वहां अंतिम पंघाल ही पदक जीत सकी थीं। उन्होंने 53 किलोग्राम भार वर्ग में रजत पदक हासिल किया था। मनीषा ने भी एशियाई खेलों में 57 किलोग्राम भार वर्ग में हिस्सा लिया था, लेकिन क्वार्टर फाइनल में जापान की अकारी फुजिनामी से हार गई थीं। इसके बाद उन्होंने विश्व चैंपियनशिप में 59 किलोग्राम भार वर्ग में उतरने का फैसला किया, जो उनके लिए सफल साबित हुआ।
फाइनल तक पहुंचने के सफर में मनीषा ने कई मजबूत पहलवानों को हराया। उन्होंने पहले विश्व चैंपियनशिप की कांस्य पदक विजेता लॉरेंस ब्यूरेगार्ड को मात दी और फिर उन्हें चित कर दिया। इसके बाद मंगोलिया की बोलोरतूया खुरेलखू को हराया। सेमीफाइनल में उन्होंने कजाकिस्तान की अल्तिन शागायेवा को भी चित करके फाइनल में जगह बनाई।
फाइनल में पैन अमेरिकी चैंपियन ए. एलिजाबेथ नेटे के खिलाफ मनीषा की शुरुआत अच्छी नहीं रही। पहले दौर के बाद वह 1-6 से पीछे थीं। लेकिन दूसरे दौर में उन्होंने लगातार हमले किए और मुकाबले का रुख बदल दिया। आखिरकार 8-6 से जीत दर्ज कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
हरियाणा के जींद की रहने वाली मनीषा 57 से 65 किलोग्राम तक के अलग-अलग भार वर्गों में मुकाबले कर चुकी हैं और इससे पहले 3 बार विश्व चैंपियनशिप में हिस्सा ले चुकी हैं। उनके इसी अनुभव ने कठिन फाइनल में वापसी करने में अहम भूमिका निभाई। उनकी इस जीत ने भारतीय महिला कुश्ती को नई पहचान दी है और आने वाली पीढ़ी की पहलवानों के लिए एक बड़ी मिसाल पेश की हैं।
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