सफाई कर्मचारियों ने शनिवार को नगर निगम परिसर में प्रदर्शन कर छह महीने से रुके वेतन और बकाया भुगतान की मांग की। उन्होंने निगम प्रशासन को आंदोलन की चेतावनी दी। त्योहारों में सफाई व्यवस्था ठप होने का खतरा है। प्रदर्शन सामान्य बोर्ड समिति की बैठक के दौरान हुआ। कर्मचारियों ने अपनी तीन मांगें बैठक में रखीं। इनमें वेतन की गड़बड़ियां दूर करना और पीएफ (भविष्य निधि), एसआई (बीमा) व महंगाई भत्ते की बकाया राशि देना शामिल है। कर्मचारी बोले- संबंधित एजेंसी ने वेतन, अन्य मदों के भुगतान में गड़बड़ी की है कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि संबंधित एजेंसी ने वेतन और अन्य मदों के भुगतान में गड़बड़ी की है। उनका कहना है कि वे छह महीने से एजेंसी और नगर निगम के अधिकारियों से भुगतान की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक सिर्फ आश्वासन मिला है। सफाई कर्मचारी गणपत राम ने बताया कि दुर्गापूजा के दौरान भी बकाया राशि देने का भरोसा दिया गया था, लेकिन त्योहार बीतने के बाद भी पैसे खाते में नहीं आए। उन्होंने कहा कि भुगतान की अंतिम तारीख 31 अक्टूबर तय की गई थी। गणपत राम ने कहा कि 31 अक्टूबर को भी भुगतान नहीं हुआ तो कर्मचारियों के पास आंदोलन के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा। सफाईकर्मी बोले- अब आश्वासन नहीं, खाते में चाहिए पैसा कर्मचारियों का कहना है कि महंगाई के इस दौर में वेतन और भत्तों का भुगतान नहीं होने से परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। बच्चों की पढ़ाई, घर का राशन, दवा और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। एक तरफ शहर की सफाई व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर है, वहीं दूसरी तरफ अपने ही हक के पैसे के लिए उन्हें बार-बार अधिकारियों के सामने गुहार लगानी पड़ रही है। कर्मचारियों ने साफ कहा कि अब केवल मौखिक आश्वासन से काम नहीं चलेगा। पीएफ, एसआई और महंगाई भत्ते की बकाया राशि का भुगतान होना चाहिए। उनका आरोप है कि एजेंसी पर करोड़ों रुपये की बकाया राशि के भुगतान का मामला लंबित है। यदि तय समयसीमा के भीतर भुगतान नहीं हुआ तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। काली पूजा से छठ तक सफाई व्यवस्था पर मंडरा रहा संकट सफाई कर्मचारियों की चेतावनी ने नगर निगम प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। काली पूजा, दीपावली, लक्ष्मी पूजा और छठ जैसे महत्वपूर्ण त्योहारों के बीच यदि कर्मचारी काम बंद कर देते हैं तो शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो सकती है। पूजा पंडालों, बाजारों, प्रमुख सड़कों और छठ घाटों के आसपास सफाई व्यवस्था बनाए रखना नगर निगम के लिए बड़ी चुनौती बन जाएगा। कर्मचारियों का कहना है कि दुर्गापूजा भी उनके लिए आर्थिक परेशानियों के बीच गुजरी। अब दीपावली और छठ सामने हैं, लेकिन बकाया भुगतान नहीं होने से उनके परिवारों में त्योहार मनाने की उम्मीद भी धूमिल हो रही है। उन्होंने कहा कि जब घर में पैसे ही नहीं होंगे तो बच्चों के लिए त्योहार की खुशियां कैसे जुटाई जाएंगी? कल से काम बंद करने का अल्टीमेटम प्रदर्शन कर रहे सफाई कर्मचारियों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि 31 अक्टूबर तक बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया तो वे एक नवंबर से काम बंद करने के लिए बाध्य होंगे। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि इस बार वे केवल प्रदर्शन कर वापस नहीं लौटेंगे, बल्कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखेंगे। सफाई कर्मचारियों ने शनिवार को नगर निगम परिसर में प्रदर्शन कर छह महीने से रुके वेतन और बकाया भुगतान की मांग की। उन्होंने निगम प्रशासन को आंदोलन की चेतावनी दी। त्योहारों में सफाई व्यवस्था ठप होने का खतरा है। प्रदर्शन सामान्य बोर्ड समिति की बैठक के दौरान हुआ। कर्मचारियों ने अपनी तीन मांगें बैठक में रखीं। इनमें वेतन की गड़बड़ियां दूर करना और पीएफ (भविष्य निधि), एसआई (बीमा) व महंगाई भत्ते की बकाया राशि देना शामिल है। कर्मचारी बोले- संबंधित एजेंसी ने वेतन, अन्य मदों के भुगतान में गड़बड़ी की है कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि संबंधित एजेंसी ने वेतन और अन्य मदों के भुगतान में गड़बड़ी की है। उनका कहना है कि वे छह महीने से एजेंसी और नगर निगम के अधिकारियों से भुगतान की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक सिर्फ आश्वासन मिला है। सफाई कर्मचारी गणपत राम ने बताया कि दुर्गापूजा के दौरान भी बकाया राशि देने का भरोसा दिया गया था, लेकिन त्योहार बीतने के बाद भी पैसे खाते में नहीं आए। उन्होंने कहा कि भुगतान की अंतिम तारीख 31 अक्टूबर तय की गई थी। गणपत राम ने कहा कि 31 अक्टूबर को भी भुगतान नहीं हुआ तो कर्मचारियों के पास आंदोलन के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा। सफाईकर्मी बोले- अब आश्वासन नहीं, खाते में चाहिए पैसा कर्मचारियों का कहना है कि महंगाई के इस दौर में वेतन और भत्तों का भुगतान नहीं होने से परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। बच्चों की पढ़ाई, घर का राशन, दवा और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। एक तरफ शहर की सफाई व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर है, वहीं दूसरी तरफ अपने ही हक के पैसे के लिए उन्हें बार-बार अधिकारियों के सामने गुहार लगानी पड़ रही है। कर्मचारियों ने साफ कहा कि अब केवल मौखिक आश्वासन से काम नहीं चलेगा। पीएफ, एसआई और महंगाई भत्ते की बकाया राशि का भुगतान होना चाहिए। उनका आरोप है कि एजेंसी पर करोड़ों रुपये की बकाया राशि के भुगतान का मामला लंबित है। यदि तय समयसीमा के भीतर भुगतान नहीं हुआ तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। काली पूजा से छठ तक सफाई व्यवस्था पर मंडरा रहा संकट सफाई कर्मचारियों की चेतावनी ने नगर निगम प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। काली पूजा, दीपावली, लक्ष्मी पूजा और छठ जैसे महत्वपूर्ण त्योहारों के बीच यदि कर्मचारी काम बंद कर देते हैं तो शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो सकती है। पूजा पंडालों, बाजारों, प्रमुख सड़कों और छठ घाटों के आसपास सफाई व्यवस्था बनाए रखना नगर निगम के लिए बड़ी चुनौती बन जाएगा। कर्मचारियों का कहना है कि दुर्गापूजा भी उनके लिए आर्थिक परेशानियों के बीच गुजरी। अब दीपावली और छठ सामने हैं, लेकिन बकाया भुगतान नहीं होने से उनके परिवारों में त्योहार मनाने की उम्मीद भी धूमिल हो रही है। उन्होंने कहा कि जब घर में पैसे ही नहीं होंगे तो बच्चों के लिए त्योहार की खुशियां कैसे जुटाई जाएंगी? कल से काम बंद करने का अल्टीमेटम प्रदर्शन कर रहे सफाई कर्मचारियों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि 31 अक्टूबर तक बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया तो वे एक नवंबर से काम बंद करने के लिए बाध्य होंगे। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि इस बार वे केवल प्रदर्शन कर वापस नहीं लौटेंगे, बल्कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखेंगे।

