बेगूसराय- BSF जवान की कुपवाड़ा में इलाज के दौरान मौत:ऑपरेशन सिंदूर में लगी थी गोली, तिरंगा पकड़कर बहन आखिरी यात्रा में लगाती रही नारे

बेगूसराय- BSF जवान की कुपवाड़ा में इलाज के दौरान मौत:ऑपरेशन सिंदूर में लगी थी गोली, तिरंगा पकड़कर बहन आखिरी यात्रा में लगाती रही नारे

जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में सीमा सुरक्षा बल (BSF) के तैनात जवान बेगूसराय के मनीष कुमार सिंह का पार्थिव शरीर शुक्रवार सुबह उनके घर पहुंचा। जवान के पार्थिव शरीर को श्रद्धांजलि देने के लिए सुबह से ही स्थानीय लोग, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी उनके घर पहुंचते रहे। करीब एक घंटे तक उनके पार्थिव शरीर को घर पर रखा गया था। अंतिम प्रस्थान से पूर्व सनातन परंपरा के अनुसार जवान की आत्मा की शांति के लिए उनके मुख में तुलसी और पवित्र गंगाजल दिया गया। इसके बाद उनके पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए घर से 17 किलोमीटर दूर सिमरिया गंगा घाट पर किया गया। घर के करीब 3 किलोमीटर दूर तक शव को पैदल ले जाया गया। इससे पहले इस दौरान परिवार के सदस्य और गांव के लोग ‘मनीष कुमार सिंह अमर रहे’ के नारे लगाते रहे। बीएसएफ जवान के अंतिम संस्कार की तीन तस्वीरें देखिए 2004 में ज्वाइन की थी बीएसएफ, ऑपरेशन सिंदूर में लगी थी गोली दरअसल, बेगूसराय के रतनपुर के रहने वाले मनीष कुमार सिंह जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में तैनात थे। मनीष ने साल 2004 में बीएसएफ ज्वाइन की थी। मनीष सिंह ऑपरेशन सिंदूर में भी शामिल हुए थे। इस दौरान उनके कमर में एक गोली लगी थी। इसके बाद वे इलाज कराकर घर लौटे थे और जुलाई में बेगूसराय से लौट कर ड्यूटी ज्वाइन की थी। ड्यूटी के दौरान 27 अगस्त को पहले तेज बुखार और शरीर में दर्द की शिकायत पर सेना के अस्पताल में भर्ती कराया गया। स्थिति नाजुक रहने के कारण 28 अगस्त को वेंटिलेटर पर ले जाया गया। वहां सुधार हुआ, लेकिन 30 अगस्त हालात फिर हालत खराब हो गई तो वेंटिलेटर पर रखा गया था। 2 सितंबर यानी बुधवार की सुबह इलाज के दौरान मौत हो गई। कुपवाड़ा में सैनिक अस्पताल के डॉक्टर की ओर से बताया गया था कि पेट के संक्रमण की वजह से बुखार समेत अन्य परेशानी थी, इलाज के दौरान हुई इंफेक्शन ज्यादा फैल जाने की वजह से मौत हुई है। मनीष के पिता भी सेना के जवान थे, 5 साल पहले हुई थी मौत मनीष के पिता बाल्मीकि सिंह भी सेना के जवान थे, जिनकी मौत करीब 5 साल पहले हो चुकी है। 2 सितंबर को मनीष की मौत के बाद विभागीय स्तर से पत्नी को जानकारी दी गई। सूचना मिलने पर यहां से मनीष के दो भाई गांव के अन्य लोगों के साथ कुपवाड़ा गए थे। इसके बाद सेना की मदद से मनीष के पार्थिव शरीर को यहां लाया गया। मनीष की बहन ने अपने भाई की अर्थी को कंधा दिया और तीन किलोमीटर तक चली आखिरी यात्रा में तिरंगा झंड़ा लेकर सबसे आगे चल रही थी। वे ‘भारत माता की जय’ और ‘मनीष तेरा नाम अमर रहेगा’ के नारे लगा रही थीं। बीएसएफ जवान के बड़े भाई के बेटे ने दी मुखाग्नि बीएसएफ जवान मनीष के बड़े भाई कृष्ण गौतम उर्फ कृष्णा गांव में ही रहकर खेती किसानी करते हैं। उनके बेटे आशीष गौतम ने ही मनीष सिंह को सिमरिया घाट पर मुखाग्नि दी। मनीष के बड़े भाई कृष्ण गौतम ने बताया कि मेरे छोटे भाई का सपना था कि वे अपने दोनों बेटियों को अधिकारी बनाएं। वहीं, मनीष की पत्नी सुनीता से बातचीत पर उन्होंने बताया कि वे जब भी घर आते थे तो बड़ी बेटी सोनाक्षी को सेना के कर्तव्य और देशभक्ति की कहानी बताया करते थे। अब वे नहीं आएंगे। दोनों बेटियां रो-रोकर बुरा हाल है, वे बार-बार पूछ रही हैं कि अब हम कैसे रहेंगे, कौन हमें कोई अफसर बनाएगा। वहीं, ग्रामीण संजय सिंह बताते हैं कि उनकी शहादत की खबर हमें देर रात एक कार्यक्रम से लौटते समय मोबाइल के माध्यम से मिली। मनीष का परिवार शुरू से ही देश सेवा से जुड़ा रहा है। उनके पिता भी फौज में अपनी सेवा दे चुके हैं। उनके परिवार में उनकी दो बेटियां हैं। जो व्यक्ति देश और माँ भारती के चरणों में अपने प्राण न्योछावर करता है, वह अत्यंत सौभाग्यशाली होता है। आखिरी सलामी की तीन तस्वीरें देखिए सिमरिया घाट पर सैन्य सम्मान के साथ दी गई सलामी सिमरिया गंगा घाट पर सैन्य सम्मान के साथ मनीष को आखिरी सलामी दी गई। इससे पहले अंतिम दर्शन के बाद जब शहीद की अंतिम यात्रा शुरू हुई, तो पूरा रास्ता जनसैलाब से पट गया। पार्थिव शरीर को सजाए गए वाहन पर रखकर आगे बढ़ाया गया। यात्रा उनके पैतृक आवास से शुरू होकर रतनपुर चौक, प्रसिद्ध काली स्थान और शहर के मेन रोड होते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग से सिमरिया घाट के लिए आगे बढ़ी। पूरे रास्ते में सड़कों के दोनों ओर, मकानों की छतों और दुकानों के बाहर खड़े होकर लोगों ने अपने अमर शहीद पर फूलों की बारिश की। हाथों में तिरंगा लिए युवाओं का हुजूम अंतिम यात्रा के आगे-आगे जब तक सूरज-चांद रहेगा, मनीष तेरा नाम रहेगा के नारे लगाता चल रहा था। जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में सीमा सुरक्षा बल (BSF) के तैनात जवान बेगूसराय के मनीष कुमार सिंह का पार्थिव शरीर शुक्रवार सुबह उनके घर पहुंचा। जवान के पार्थिव शरीर को श्रद्धांजलि देने के लिए सुबह से ही स्थानीय लोग, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी उनके घर पहुंचते रहे। करीब एक घंटे तक उनके पार्थिव शरीर को घर पर रखा गया था। अंतिम प्रस्थान से पूर्व सनातन परंपरा के अनुसार जवान की आत्मा की शांति के लिए उनके मुख में तुलसी और पवित्र गंगाजल दिया गया। इसके बाद उनके पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए घर से 17 किलोमीटर दूर सिमरिया गंगा घाट पर किया गया। घर के करीब 3 किलोमीटर दूर तक शव को पैदल ले जाया गया। इससे पहले इस दौरान परिवार के सदस्य और गांव के लोग ‘मनीष कुमार सिंह अमर रहे’ के नारे लगाते रहे। बीएसएफ जवान के अंतिम संस्कार की तीन तस्वीरें देखिए 2004 में ज्वाइन की थी बीएसएफ, ऑपरेशन सिंदूर में लगी थी गोली दरअसल, बेगूसराय के रतनपुर के रहने वाले मनीष कुमार सिंह जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में तैनात थे। मनीष ने साल 2004 में बीएसएफ ज्वाइन की थी। मनीष सिंह ऑपरेशन सिंदूर में भी शामिल हुए थे। इस दौरान उनके कमर में एक गोली लगी थी। इसके बाद वे इलाज कराकर घर लौटे थे और जुलाई में बेगूसराय से लौट कर ड्यूटी ज्वाइन की थी। ड्यूटी के दौरान 27 अगस्त को पहले तेज बुखार और शरीर में दर्द की शिकायत पर सेना के अस्पताल में भर्ती कराया गया। स्थिति नाजुक रहने के कारण 28 अगस्त को वेंटिलेटर पर ले जाया गया। वहां सुधार हुआ, लेकिन 30 अगस्त हालात फिर हालत खराब हो गई तो वेंटिलेटर पर रखा गया था। 2 सितंबर यानी बुधवार की सुबह इलाज के दौरान मौत हो गई। कुपवाड़ा में सैनिक अस्पताल के डॉक्टर की ओर से बताया गया था कि पेट के संक्रमण की वजह से बुखार समेत अन्य परेशानी थी, इलाज के दौरान हुई इंफेक्शन ज्यादा फैल जाने की वजह से मौत हुई है। मनीष के पिता भी सेना के जवान थे, 5 साल पहले हुई थी मौत मनीष के पिता बाल्मीकि सिंह भी सेना के जवान थे, जिनकी मौत करीब 5 साल पहले हो चुकी है। 2 सितंबर को मनीष की मौत के बाद विभागीय स्तर से पत्नी को जानकारी दी गई। सूचना मिलने पर यहां से मनीष के दो भाई गांव के अन्य लोगों के साथ कुपवाड़ा गए थे। इसके बाद सेना की मदद से मनीष के पार्थिव शरीर को यहां लाया गया। मनीष की बहन ने अपने भाई की अर्थी को कंधा दिया और तीन किलोमीटर तक चली आखिरी यात्रा में तिरंगा झंड़ा लेकर सबसे आगे चल रही थी। वे ‘भारत माता की जय’ और ‘मनीष तेरा नाम अमर रहेगा’ के नारे लगा रही थीं। बीएसएफ जवान के बड़े भाई के बेटे ने दी मुखाग्नि बीएसएफ जवान मनीष के बड़े भाई कृष्ण गौतम उर्फ कृष्णा गांव में ही रहकर खेती किसानी करते हैं। उनके बेटे आशीष गौतम ने ही मनीष सिंह को सिमरिया घाट पर मुखाग्नि दी। मनीष के बड़े भाई कृष्ण गौतम ने बताया कि मेरे छोटे भाई का सपना था कि वे अपने दोनों बेटियों को अधिकारी बनाएं। वहीं, मनीष की पत्नी सुनीता से बातचीत पर उन्होंने बताया कि वे जब भी घर आते थे तो बड़ी बेटी सोनाक्षी को सेना के कर्तव्य और देशभक्ति की कहानी बताया करते थे। अब वे नहीं आएंगे। दोनों बेटियां रो-रोकर बुरा हाल है, वे बार-बार पूछ रही हैं कि अब हम कैसे रहेंगे, कौन हमें कोई अफसर बनाएगा। वहीं, ग्रामीण संजय सिंह बताते हैं कि उनकी शहादत की खबर हमें देर रात एक कार्यक्रम से लौटते समय मोबाइल के माध्यम से मिली। मनीष का परिवार शुरू से ही देश सेवा से जुड़ा रहा है। उनके पिता भी फौज में अपनी सेवा दे चुके हैं। उनके परिवार में उनकी दो बेटियां हैं। जो व्यक्ति देश और माँ भारती के चरणों में अपने प्राण न्योछावर करता है, वह अत्यंत सौभाग्यशाली होता है। आखिरी सलामी की तीन तस्वीरें देखिए सिमरिया घाट पर सैन्य सम्मान के साथ दी गई सलामी सिमरिया गंगा घाट पर सैन्य सम्मान के साथ मनीष को आखिरी सलामी दी गई। इससे पहले अंतिम दर्शन के बाद जब शहीद की अंतिम यात्रा शुरू हुई, तो पूरा रास्ता जनसैलाब से पट गया। पार्थिव शरीर को सजाए गए वाहन पर रखकर आगे बढ़ाया गया। यात्रा उनके पैतृक आवास से शुरू होकर रतनपुर चौक, प्रसिद्ध काली स्थान और शहर के मेन रोड होते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग से सिमरिया घाट के लिए आगे बढ़ी। पूरे रास्ते में सड़कों के दोनों ओर, मकानों की छतों और दुकानों के बाहर खड़े होकर लोगों ने अपने अमर शहीद पर फूलों की बारिश की। हाथों में तिरंगा लिए युवाओं का हुजूम अंतिम यात्रा के आगे-आगे जब तक सूरज-चांद रहेगा, मनीष तेरा नाम रहेगा के नारे लगाता चल रहा था।  

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