बेगूसराय के छात्र ने IIT दिल्ली कैंपस में की आत्महत्या:छठी मंजिल से कूदकर थर्ड ईयर के स्टूडेंट ने दी जान, मां बोली- डीन ने हॉस्टल नहीं दिया, बेइज्जत किया

बेगूसराय के छात्र ने IIT दिल्ली कैंपस में की आत्महत्या:छठी मंजिल से कूदकर थर्ड ईयर के स्टूडेंट ने दी जान, मां बोली- डीन ने हॉस्टल नहीं दिया, बेइज्जत किया

बेगूसराय के ऋषिकेश कुमार ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली के कैंपस में सुसाइड कर लिया है। छठी मंजिल से कूदकर उन्होंने जान दे दी। वो थर्ड ईयर का छात्र था। दिल्ली से सोमवार को ऋषिकेश का शव गांव मक्खाचक लाया गया। जहां अंतिम संस्कार हुआ। मां आशा पोद्दार ने IIT दिल्ली के हॉस्टल प्रशासन और डीन पर आरोप लगाए हैं। मां का कहना है कि हॉस्टल आवंटन में लगातार टालमटोल और डीन की ओर से अपमान से आहत होकर बेटे ने जान दी है। घटना के बाद हमने दिल्ली पुलिस के किशनगढ़ थाना (दक्षिण-पश्चिम दिल्ली) में लिखित शिकायत दर्ज करवाई है। होली के बाद ऋषिकेश की तबीयत बिगड़ गई थी मृतक की मां के अनुसार होली के समय ऋषिकेश की मानसिक रूप से तबीयत बिगड़ गई थी और उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। IIT के मेडिकल सेंटर और बाहर के अस्पताल में इलाज के बाद डॉक्टरों ने उसे पूरी तरह से ठीक घोषित कर दिया। लिखित अनुमति दी थी कि वह अपनी पढ़ाई जारी रख सकता है। डॉक्टर के लिख देने के बाद भी हॉस्टल प्रशासन पुरानी बातों को ढाल बनाकर कमरे देने से मना करता रहा। मैंने डीन से रो-रोकर कहा कि अगर हॉस्टल नहीं दे सकते तो हमें फैमिली क्वार्टर किराए पर दे दीजिए, मैं खुद अपने बच्चे के साथ रहकर उसकी देखभाल करूंगी और हर जिम्मेदारी लूंगी, लेकिन प्रशासन ने मेरी एक न सुनी और हमें टहलाते रहे। ऋषिकेश का मनोबल पूरी तरह टूट चुका था- मां दुर्व्यवहार से ऋषिकेश का मनोबल पूरी तरह टूट चुका था। मां ने बताया कि वह लगातार मानसिक तनाव में था और बार-बार कहता था कि उसका बहुत अपमान हुआ है। पहले भी स्थिति के कारण उसका सेमेस्टर विड्रॉल करा दिया गया था। जब वह दोबारा पढ़ाई शुरू करने दूसरे सेमेस्टर में पहुंचा, तब भी हॉस्टल आवंटन में उसे मानसिक रूप से परेशान किया गया। हॉस्टल न मिलने पर मां ने कैंपस के बाहर दो कमरों का मकान किराए पर लिया। जिससे बेटा पढ़ाई कर सके, लेकिन अपमान का दंश ऋषिकेश के मन पर इस कदर हावी हो चुका था कि उसने पढ़ाई जारी रखने से भी मना कर दिया था।
पहले बोला गया था कि हॉस्टल मिलेगा ऋषिकेश थर्ड ईयर का स्टूडेंट था, लेकिन कॉलेज प्रशासन के रवैये ने उसे मानसिक रूप से तोड़ दिया था। ऋषिकेश को पहले मैसेज करके हॉस्टल का कमरा नंबर- 68 आवंटित होने की जानकारी दी गई थी। वह बहुत खुश था कि उसे हॉस्टल मिल गया है, लेकिन जब वह हॉस्टल गया, तो 3-4 दिनों तक मीटिंग का बहाना बनाकर उसे दौड़ाया गया और बाद में कमरा देने से साफ इनकार कर दिया गया। जब हम कॉलेज प्रशासन और डीन के पास गए, तो उन्होंने खुले तौर पर कहा कि ऐसे बच्चों के लिए हमारे हॉस्टल में कोई प्रावधान नहीं है। बेगूसराय के ऋषिकेश कुमार ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली के कैंपस में सुसाइड कर लिया है। छठी मंजिल से कूदकर उन्होंने जान दे दी। वो थर्ड ईयर का छात्र था। दिल्ली से सोमवार को ऋषिकेश का शव गांव मक्खाचक लाया गया। जहां अंतिम संस्कार हुआ। मां आशा पोद्दार ने IIT दिल्ली के हॉस्टल प्रशासन और डीन पर आरोप लगाए हैं। मां का कहना है कि हॉस्टल आवंटन में लगातार टालमटोल और डीन की ओर से अपमान से आहत होकर बेटे ने जान दी है। घटना के बाद हमने दिल्ली पुलिस के किशनगढ़ थाना (दक्षिण-पश्चिम दिल्ली) में लिखित शिकायत दर्ज करवाई है। होली के बाद ऋषिकेश की तबीयत बिगड़ गई थी मृतक की मां के अनुसार होली के समय ऋषिकेश की मानसिक रूप से तबीयत बिगड़ गई थी और उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। IIT के मेडिकल सेंटर और बाहर के अस्पताल में इलाज के बाद डॉक्टरों ने उसे पूरी तरह से ठीक घोषित कर दिया। लिखित अनुमति दी थी कि वह अपनी पढ़ाई जारी रख सकता है। डॉक्टर के लिख देने के बाद भी हॉस्टल प्रशासन पुरानी बातों को ढाल बनाकर कमरे देने से मना करता रहा। मैंने डीन से रो-रोकर कहा कि अगर हॉस्टल नहीं दे सकते तो हमें फैमिली क्वार्टर किराए पर दे दीजिए, मैं खुद अपने बच्चे के साथ रहकर उसकी देखभाल करूंगी और हर जिम्मेदारी लूंगी, लेकिन प्रशासन ने मेरी एक न सुनी और हमें टहलाते रहे। ऋषिकेश का मनोबल पूरी तरह टूट चुका था- मां दुर्व्यवहार से ऋषिकेश का मनोबल पूरी तरह टूट चुका था। मां ने बताया कि वह लगातार मानसिक तनाव में था और बार-बार कहता था कि उसका बहुत अपमान हुआ है। पहले भी स्थिति के कारण उसका सेमेस्टर विड्रॉल करा दिया गया था। जब वह दोबारा पढ़ाई शुरू करने दूसरे सेमेस्टर में पहुंचा, तब भी हॉस्टल आवंटन में उसे मानसिक रूप से परेशान किया गया। हॉस्टल न मिलने पर मां ने कैंपस के बाहर दो कमरों का मकान किराए पर लिया। जिससे बेटा पढ़ाई कर सके, लेकिन अपमान का दंश ऋषिकेश के मन पर इस कदर हावी हो चुका था कि उसने पढ़ाई जारी रखने से भी मना कर दिया था।
पहले बोला गया था कि हॉस्टल मिलेगा ऋषिकेश थर्ड ईयर का स्टूडेंट था, लेकिन कॉलेज प्रशासन के रवैये ने उसे मानसिक रूप से तोड़ दिया था। ऋषिकेश को पहले मैसेज करके हॉस्टल का कमरा नंबर- 68 आवंटित होने की जानकारी दी गई थी। वह बहुत खुश था कि उसे हॉस्टल मिल गया है, लेकिन जब वह हॉस्टल गया, तो 3-4 दिनों तक मीटिंग का बहाना बनाकर उसे दौड़ाया गया और बाद में कमरा देने से साफ इनकार कर दिया गया। जब हम कॉलेज प्रशासन और डीन के पास गए, तो उन्होंने खुले तौर पर कहा कि ऐसे बच्चों के लिए हमारे हॉस्टल में कोई प्रावधान नहीं है।  

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