बुल्गारिया के पास कंटेनर जहाज से टकराए 3 समुद्री ड्रोन, काला सागर में बार बार बनाया जा रहा जहाजों को निशाना

बुल्गारिया के पास कंटेनर जहाज से टकराए 3 समुद्री ड्रोन, काला सागर में बार बार बनाया जा रहा जहाजों को निशाना

Russia Ukraine War: नाटो के सदस्य देश बुल्गारिया के पास एक बार फिर से एक कंटेनर जहाज पर तीन ड्रोन से हमले होने की जानकारी मिली है। इस बात की जानकारी बुल्गारिया के रक्षा मंत्री दिमितार स्टोयानोव ने दी। उन्होंने बताया कि बुधवार को बुल्गारिया के काला सागर तट के पास एक कंटेनर जहाज से 3 नौसैनिक ड्रोन टकरा गए। इस तरह की हालिया घटनाओँ से रूस यूक्रेन युद्ध की चिंता बढ़ गई है।

किसने किया हमला?

यह हादसा बुल्गारिया (Bulgaria) के ब्लैक सी एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन (EEZ) में हुआ। लाइबेरिया के झंडे वाला कंटेनर जहाज कालियाकरा से 16 नॉटिकल मील दूर था। यह जहाज इजराइल के हाइफा से रोमानिया के कॉन्स्टान्ता जा रहा था, तभी उस पर हमला हुआ। हमले के बाद जहाज में आग लग गई और इसके दाईं ओर काफी नुकसान हुआ लेकिन फिर भी यह पानी में डूबा नहीं। फिलहाल यह हमला किसने किया, इसका स्पष्ट पता नहीं चला।

तीन ड्रोन की चपेट में आया जहाज

रॉयटर्स की रिपोर्ट में मामले की जानकारी रखने वाले एक समुद्री सुरक्षा सूत्र के हवाले से बताया गया है कि चालक दल को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। वहीं, बुल्गारिया के राष्ट्रीय रेडियो की रिपोर्ट के अनुसार, इस जहाज की सहायता के लिए एक टैंकर भेजा गया है। स्टोयानोव ने जानकारी दी कि कंटेनर जहाज 3 नौसैनिक ड्रोन की चपेट में आ गया।

पहले भी हुए हैं हमले

बुल्गारिया के तट के पास जहाजों पर हो रहे ड्रोन हमलों में हाल के हफ्तों में करीब दो दर्जन अंतरराष्ट्रीय नाविकों की मौत होने की आशंका है। वहीं, अब तक कम से कम 6 व्यापारिक जहाजों पर हमला किया जा चुका है। इन हमलों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी निंदा की जा रही है। साथ ही रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध को लेकर चिंताएं जारी है।

यूक्रेन ने लगाए रूस पर आरोप

यूक्रेन ने इन हमलों का आरोप रूस पर लगाया है और बुल्गारिया के प्रधानमंत्री रुमेन रादेव ने कहा है कि ये हमले रूस के फायदे में दिखाई देते हैं, हालांकि मॉस्को का कहना है कि यह उसकी कार्रवाई नहीं हैं। इन हालिया हमलों के बाद यूरोपीय संघ और नाटो के सदस्य देश बुल्गारिया को इस संवेदनशील क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सहयोगी देशों से मदद मांगने पर मजबूर होना पड़ा है।

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