बिहार में 60 ड्रग्स तस्कर चिन्हित:पुलिस का महाअभियान, आर्थिक गतिविधियों और संपत्ति की जांच तेज; NCB को सौंपा टास्क

बिहार में 60 ड्रग्स तस्कर चिन्हित:पुलिस का महाअभियान, आर्थिक गतिविधियों और संपत्ति की जांच तेज; NCB को सौंपा टास्क

बिहार पुलिस ने राज्य में सूखे नशे के कारोबार पर शिकंजा कसने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत गांजा, चरस, अफीम, हेरोइन और नशीली दवाओं की तस्करी करने वाले बड़े धंधेबाजों और उनके गिरोहों को चिन्हित कर कार्रवाई की जाएगी। राज्य स्तर पर अब तक करीब 60 ऐसे तस्करों और इस कारोबार से जुड़े लोगों की पहचान की गई है। इनमें से 12 को दोबारा जेल भेजने का प्रस्ताव भी तैयार किया गया है। पुलिस का ध्यान केवल नशे की खेप पकड़ने तक सीमित नहीं रहेगा। अब तस्करों की आर्थिक गतिविधियों और अवैध कमाई के नेटवर्क की भी गहन जांच की जाएगी। संबंधित अधिकारियों को ऐसे लोगों की संपत्ति, लेन-देन और कारोबार से जुड़ी गतिविधियों की विस्तृत जानकारी जुटाने का कार्य सौंपा गया है। अभियान के तहत उन ड्रग्स तस्करों की निगरानी भी बढ़ाई जाएगी, जो हाल ही में जेल से बाहर आए हैं। पुलिस को आशंका है कि इनमें से कुछ लोग फिर से नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार में सक्रिय हो सकते हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की तैयारी है। पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि पुराने रिकॉर्ड और वर्तमान गतिविधियों के आधार पर ऐसे लोगों की पहचान की जाए। आवश्यकता पड़ने पर उन्हें दोबारा जेल भेजने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। राज्य स्तर पर चिन्हित किए गए लगभग पांच दर्जन लोगों में से 12 के खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव पहले ही आगे बढ़ाया जा चुका है। बिहार के डीजीपी विनय कुमार की अध्यक्षता में पुलिस के वरीय अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में सूखे नशे के कारोबार और तस्करी के नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई के लिए रणनीति तैयार की गई। मद्य निषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो के अपर पुलिस महानिदेशक निर्मल कुमार आजाद की ओर से सभी जिलों के एसपी को इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। सभी जिला पुलिस कप्तानों को अपने-अपने इलाके में सक्रिय नए ड्रग्स गैंग और तस्करों की पहचान करने का टास्क दिया गया है। थाना स्तर पर भी ऐसे लोगों की गतिविधियों पर नजर रखने को कहा गया है। नेपाल बॉर्डर से सटे जिलों पर विशेष फोकस पुलिस ने बिहार में सूखे नशे के कारोबार के संभावित हॉटस्पॉट जिलों को भी चिन्हित किया है। इनमें नेपाल सीमा से सटे पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज शामिल हैं। इनके अलावा पटना, मुजफ्फरपुर और वैशाली जैसे जिलों पर भी विशेष निगरानी रखने का निर्देश दिया गया है। इन जिलों में थाना स्तर पर नशे के कारोबारियों की गतिविधियों की निगरानी और कार्रवाई तेज करने को कहा गया है। पुलिस को आशंका है कि सीमावर्ती इलाकों के जरिए नशीले पदार्थों की तस्करी के नेटवर्क संचालित हो सकते हैं। पुराने गंभीर मामलों में स्पीड ट्रायल अभियान के दौरान सिर्फ नए मामलों में कार्रवाई नहीं होगी, बल्कि नारकोटिक्स से जुड़े पुराने और गंभीर मामलों में भी तेजी लाई जाएगी। पुलिस अधिकारियों को ऐसे मामलों की पहचान कर स्पीड ट्रायल कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है, ताकि लंबे समय से लंबित मामलों का जल्द निपटारा हो सके। केंद्रीय नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर अधिकारियों के साथ बैठक की गई है। राज्य और केंद्रीय एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाकर ड्रग्स तस्करी के नेटवर्क पर कार्रवाई की तैयारी है। शिकायत के लिए 1933 हेल्पलाइन ड्रग्स तस्करों और नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार से जुड़ी गतिविधियों की सूचना देने के लिए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने 1933 हेल्पलाइन जारी की है। आम लोग इस नंबर पर नशीले पदार्थों की तस्करी या कारोबार से जुड़ी जानकारी दे सकते हैं। पुलिस की नई रणनीति में तस्करों की पहचान, उनके गिरोह का नेटवर्क तोड़ना, आर्थिक गतिविधियों की जांच, जेल से बाहर आए पुराने तस्करों की निगरानी और लंबित मामलों में तेजी से कानूनी कार्रवाई,इन सभी पहलुओं को शामिल किया गया है। आने वाले दिनों में जिलों से चिन्हित किए गए नए गिरोहों और तस्करों के आधार पर कार्रवाई और तेज होने की संभावना है। बिहार पुलिस ने राज्य में सूखे नशे के कारोबार पर शिकंजा कसने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत गांजा, चरस, अफीम, हेरोइन और नशीली दवाओं की तस्करी करने वाले बड़े धंधेबाजों और उनके गिरोहों को चिन्हित कर कार्रवाई की जाएगी। राज्य स्तर पर अब तक करीब 60 ऐसे तस्करों और इस कारोबार से जुड़े लोगों की पहचान की गई है। इनमें से 12 को दोबारा जेल भेजने का प्रस्ताव भी तैयार किया गया है। पुलिस का ध्यान केवल नशे की खेप पकड़ने तक सीमित नहीं रहेगा। अब तस्करों की आर्थिक गतिविधियों और अवैध कमाई के नेटवर्क की भी गहन जांच की जाएगी। संबंधित अधिकारियों को ऐसे लोगों की संपत्ति, लेन-देन और कारोबार से जुड़ी गतिविधियों की विस्तृत जानकारी जुटाने का कार्य सौंपा गया है। अभियान के तहत उन ड्रग्स तस्करों की निगरानी भी बढ़ाई जाएगी, जो हाल ही में जेल से बाहर आए हैं। पुलिस को आशंका है कि इनमें से कुछ लोग फिर से नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार में सक्रिय हो सकते हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की तैयारी है। पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि पुराने रिकॉर्ड और वर्तमान गतिविधियों के आधार पर ऐसे लोगों की पहचान की जाए। आवश्यकता पड़ने पर उन्हें दोबारा जेल भेजने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। राज्य स्तर पर चिन्हित किए गए लगभग पांच दर्जन लोगों में से 12 के खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव पहले ही आगे बढ़ाया जा चुका है। बिहार के डीजीपी विनय कुमार की अध्यक्षता में पुलिस के वरीय अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में सूखे नशे के कारोबार और तस्करी के नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई के लिए रणनीति तैयार की गई। मद्य निषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो के अपर पुलिस महानिदेशक निर्मल कुमार आजाद की ओर से सभी जिलों के एसपी को इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। सभी जिला पुलिस कप्तानों को अपने-अपने इलाके में सक्रिय नए ड्रग्स गैंग और तस्करों की पहचान करने का टास्क दिया गया है। थाना स्तर पर भी ऐसे लोगों की गतिविधियों पर नजर रखने को कहा गया है। नेपाल बॉर्डर से सटे जिलों पर विशेष फोकस पुलिस ने बिहार में सूखे नशे के कारोबार के संभावित हॉटस्पॉट जिलों को भी चिन्हित किया है। इनमें नेपाल सीमा से सटे पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज शामिल हैं। इनके अलावा पटना, मुजफ्फरपुर और वैशाली जैसे जिलों पर भी विशेष निगरानी रखने का निर्देश दिया गया है। इन जिलों में थाना स्तर पर नशे के कारोबारियों की गतिविधियों की निगरानी और कार्रवाई तेज करने को कहा गया है। पुलिस को आशंका है कि सीमावर्ती इलाकों के जरिए नशीले पदार्थों की तस्करी के नेटवर्क संचालित हो सकते हैं। पुराने गंभीर मामलों में स्पीड ट्रायल अभियान के दौरान सिर्फ नए मामलों में कार्रवाई नहीं होगी, बल्कि नारकोटिक्स से जुड़े पुराने और गंभीर मामलों में भी तेजी लाई जाएगी। पुलिस अधिकारियों को ऐसे मामलों की पहचान कर स्पीड ट्रायल कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है, ताकि लंबे समय से लंबित मामलों का जल्द निपटारा हो सके। केंद्रीय नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर अधिकारियों के साथ बैठक की गई है। राज्य और केंद्रीय एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाकर ड्रग्स तस्करी के नेटवर्क पर कार्रवाई की तैयारी है। शिकायत के लिए 1933 हेल्पलाइन ड्रग्स तस्करों और नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार से जुड़ी गतिविधियों की सूचना देने के लिए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने 1933 हेल्पलाइन जारी की है। आम लोग इस नंबर पर नशीले पदार्थों की तस्करी या कारोबार से जुड़ी जानकारी दे सकते हैं। पुलिस की नई रणनीति में तस्करों की पहचान, उनके गिरोह का नेटवर्क तोड़ना, आर्थिक गतिविधियों की जांच, जेल से बाहर आए पुराने तस्करों की निगरानी और लंबित मामलों में तेजी से कानूनी कार्रवाई,इन सभी पहलुओं को शामिल किया गया है। आने वाले दिनों में जिलों से चिन्हित किए गए नए गिरोहों और तस्करों के आधार पर कार्रवाई और तेज होने की संभावना है।  

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