बिहार में एक करोड़ महिलाओं को मिलेगा रोजगार:CM का अभियान शुरू, 534 प्रखंडों में खुलेंगे पशु औषधि केंद्र; जीविका से 1.81 करोड़ महिलाएं जुड़ीं

बिहार में एक करोड़ महिलाओं को मिलेगा रोजगार:CM का अभियान शुरू, 534 प्रखंडों में खुलेंगे पशु औषधि केंद्र; जीविका से 1.81 करोड़ महिलाएं जुड़ीं

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि महिलाओं और बहनों की प्रगति से ही विकसित और समृद्ध बिहार का सपना पूरा होगा। सरकार ने अगले तीन वर्षों में बिहार की एक करोड़ महिलाओं को सीधे रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य रखा है। रक्षाबंधन के पहले आज मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित संवाद सभागार में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने महिलाओं के रोजगार, आर्थिक सशक्तीकरण और स्वास्थ्य से जुड़ी कई योजनाओं की शुरुआत की। तीन दिन तक चलेगा विशेष अभियान मुख्यमंत्री ने 25, 26 और 27 अगस्त तक चलने वाले विशेष अभियान की शुरुआत की। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग, डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग और अनुसूचित जाति-जनजाति कल्याण विभाग की योजनाओं का लाभ महिलाओं तक पहुंचाया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि महिलाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अधिक से अधिक अवसर मिलें। 2030 से पहले एक करोड़ महिलाओं को रोजगार मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2030 के विधानसभा चुनाव से पहले एक करोड़ महिलाओं को सीधे रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि जीविका से करीब 1.81 करोड़ महिलाएं जुड़ी हैं और 13 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूह महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का काम कर रहे हैं। महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना केवल परिवार के लिए नहीं, बल्कि पूरे बिहार की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए जरूरी है। ‘अनीमिया मुक्त बिहार’ अभियान शुरू मुख्यमंत्री ने ‘अनीमिया मुक्त बिहार’ विशेष अभियान का भी शुभारंभ किया। यह अभियान 25 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक चलेगा। इसके तहत एनीमिया की रोकथाम, जांच, इलाज और इसके प्रति जागरूकता बढ़ाने का काम किया जाएगा। अभियान के तहत करीब 1 करोड़ 20 लाख 82 हजार 500 लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है। बच्चों, महिलाओं और खासकर गर्भवती महिलाओं की जांच की जाएगी। जरूरत के अनुसार उन्हें इलाज और दवा उपलब्ध कराई जाएगी। गर्भवती महिलाओं में एनीमिया मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर समस्या बन सकता है। इसलिए सरकार इस अभियान को बड़े स्तर पर चला रही है। जिलों में 36 तरह के ऑपरेशन की सुविधा मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं को जिला स्तर पर मजबूत किया जा रहा है। अब जिलों में 36 तरह के ऑपरेशन की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इससे लोगों को छोटी-बड़ी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए बार-बार पटना आने की जरूरत कम होगी। उन्होंने टीबी उन्मूलन अभियान के तहत की जा रही स्क्रीनिंग का भी जिक्र किया। महिलाओं को ‘सुधा सखी’ के जरिए मिलेगा रोजगार पशुपालन और दुग्ध क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए सरकार ने ‘सुधा सखी’ योजना पर जोर दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी करीब 12 लाख किसान दुग्ध उत्पादन से जुड़े हैं। सरकार इसे बढ़ाकर 50 लाख से अधिक करना चाहती है। महिलाओं को सुधा सखी, जीविका सुधा बिक्री केंद्र और दूध संग्रहण केंद्रों से जोड़कर रोजगार दिया जाएगा। डेयरी क्षेत्र में महिलाओं की राष्ट्रीय भागीदारी करीब 70 प्रतिशत है। बिहार में इसे बढ़ाकर 80 प्रतिशत करने का लक्ष्य है। सुधा केंद्र खोलने पर करीब 60 हजार रुपये की मदद मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत सुधा बिक्री केंद्र खोलने वाली महिलाओं को दूसरी और तीसरी किस्त मिलाकर करीब 60 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है। सभी पंचायतों में एक सुधा बिक्री केंद्र खोलने के लिए महिलाओं का चयन लॉटरी के माध्यम से किया जाएगा। बाद में इस योजना को गांवों तक भी विस्तार देने की योजना है। सभी 534 प्रखंडों में खुलेंगे पशु औषधि केंद्र पशुपालकों को गांव के पास ही पशु चिकित्सा और दवा उपलब्ध कराने के लिए राज्य के सभी 534 प्रखंडों में पशु औषधि बिक्री केंद्र खोलने का अभियान शुरू किया गया है। इन केंद्रों को महिलाओं द्वारा संचालित किया जाएगा। कार्यक्रम में चयनित महिलाओं को इसके लिए चयन-पत्र भी दिए गए। मुख्यमंत्री ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिलाओं के लिए भी बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि यदि इस वर्ग की कोई महिला अंतरजातीय विवाह करती है तो उसे बिहार सरकार की ओर से 1.25 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। केंद्र सरकार की ओर से भी 1.25 लाख रुपये की सहायता का प्रावधान है। इस तरह लाभुक महिला को कुल 2.50 लाख रुपये की सहायता मिल सकेगी। इस फैसले को लागू करने की दिशा में मंगलवार से कदम उठाया गया है। पंचायत और नगर निकाय में महिलाओं को 50% आरक्षण मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में पंचायत और नगर निकाय चुनावों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। इसके परिणामस्वरूप आज करीब 59-60 प्रतिशत महिलाएं जनप्रतिनिधि के रूप में चुनी जा रही हैं। उन्होंने इसे महिला सशक्तीकरण की दिशा में बिहार की बड़ी उपलब्धि बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2020 में सरकार ने 10 लाख सरकारी नौकरी और 10 लाख रोजगार देने का लक्ष्य रखा था। इसके मुकाबले करीब 12 लाख सरकारी नौकरियां देने और लगभग 51 लाख लोगों को रोजगार से जोड़ने का काम किया गया है। अब सरकार ने एक करोड़ लोगों को सीधे सरकारी नौकरी और रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य रखा है। महिलाओं को रोजगार से जोड़ना इसी लक्ष्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है। विद्यार्थियों की समस्याओं के लिए ‘सहयोग’ पोर्टल मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान के लिए शुरू किए गए विद्यार्थी सहयोग शिविर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन व्यवस्था पहले से चल रही है और अब शिविरों के माध्यम से भी छात्रों की समस्याओं का समाधान किया जाएगा। हॉस्टल, छात्रावास, स्कूल, कॉलेज और शिक्षा से जुड़ी अन्य समस्याओं को इसमें शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री के अनुसार सहयोग पोर्टल पर अब तक करीब 6.46 लाख आवेदन आए हैं, जिनमें 96 प्रतिशत आवेदनों का निष्पादन किया जा चुका है। ‘सुधा सखी’ प्रशिक्षण और प्रमाण-पत्र वितरित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने ‘सुधा सखी’ प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ किया। जीविका-सुधा बिक्री केंद्रों के आवंटन-पत्र भी बांटे गए। महिलाओं द्वारा संचालित पशु औषधि बिक्री केंद्रों के लिए चयनित महिलाओं को चयन-पत्र दिए गए। इसके अलावा दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों के निबंधन प्रमाण-पत्र भी वितरित किए गए। मिथिला हस्तकला को-ऑपरेटिव सोसाइटी की घोषणा कार्यक्रम में मिथिला हस्तकला को-ऑपरेटिव सोसाइटी की घोषणा की गई। नवनियुक्त पदाधिकारियों और सदस्यों को प्रमाण-पत्र दिए गए। पद्मश्री दुलारी देवी को अध्यक्ष, पद्मश्री शांति देवी और पद्मश्री शिवम पासवान को सह-अध्यक्ष बनाया गया। रानी झा को सदस्य बनाया गया। जीविका दीदियों ने मुख्यमंत्री को बांधी राखी रक्षाबंधन के मौके पर जीविका दीदियों, सुधा सखियों और दुग्ध उत्पादक महिलाओं ने मुख्यमंत्री को राखी बांधी और शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने भी सभी बहनों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के सुधा स्टॉलों का निरीक्षण किया और वहां रखे उत्पादों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि महिलाओं और बहनों की प्रगति से ही विकसित और समृद्ध बिहार का सपना पूरा होगा। सरकार ने अगले तीन वर्षों में बिहार की एक करोड़ महिलाओं को सीधे रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य रखा है। रक्षाबंधन के पहले आज मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित संवाद सभागार में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने महिलाओं के रोजगार, आर्थिक सशक्तीकरण और स्वास्थ्य से जुड़ी कई योजनाओं की शुरुआत की। तीन दिन तक चलेगा विशेष अभियान मुख्यमंत्री ने 25, 26 और 27 अगस्त तक चलने वाले विशेष अभियान की शुरुआत की। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग, डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग और अनुसूचित जाति-जनजाति कल्याण विभाग की योजनाओं का लाभ महिलाओं तक पहुंचाया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि महिलाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अधिक से अधिक अवसर मिलें। 2030 से पहले एक करोड़ महिलाओं को रोजगार मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2030 के विधानसभा चुनाव से पहले एक करोड़ महिलाओं को सीधे रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि जीविका से करीब 1.81 करोड़ महिलाएं जुड़ी हैं और 13 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूह महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का काम कर रहे हैं। महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना केवल परिवार के लिए नहीं, बल्कि पूरे बिहार की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए जरूरी है। ‘अनीमिया मुक्त बिहार’ अभियान शुरू मुख्यमंत्री ने ‘अनीमिया मुक्त बिहार’ विशेष अभियान का भी शुभारंभ किया। यह अभियान 25 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक चलेगा। इसके तहत एनीमिया की रोकथाम, जांच, इलाज और इसके प्रति जागरूकता बढ़ाने का काम किया जाएगा। अभियान के तहत करीब 1 करोड़ 20 लाख 82 हजार 500 लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है। बच्चों, महिलाओं और खासकर गर्भवती महिलाओं की जांच की जाएगी। जरूरत के अनुसार उन्हें इलाज और दवा उपलब्ध कराई जाएगी। गर्भवती महिलाओं में एनीमिया मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर समस्या बन सकता है। इसलिए सरकार इस अभियान को बड़े स्तर पर चला रही है। जिलों में 36 तरह के ऑपरेशन की सुविधा मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं को जिला स्तर पर मजबूत किया जा रहा है। अब जिलों में 36 तरह के ऑपरेशन की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इससे लोगों को छोटी-बड़ी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए बार-बार पटना आने की जरूरत कम होगी। उन्होंने टीबी उन्मूलन अभियान के तहत की जा रही स्क्रीनिंग का भी जिक्र किया। महिलाओं को ‘सुधा सखी’ के जरिए मिलेगा रोजगार पशुपालन और दुग्ध क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए सरकार ने ‘सुधा सखी’ योजना पर जोर दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी करीब 12 लाख किसान दुग्ध उत्पादन से जुड़े हैं। सरकार इसे बढ़ाकर 50 लाख से अधिक करना चाहती है। महिलाओं को सुधा सखी, जीविका सुधा बिक्री केंद्र और दूध संग्रहण केंद्रों से जोड़कर रोजगार दिया जाएगा। डेयरी क्षेत्र में महिलाओं की राष्ट्रीय भागीदारी करीब 70 प्रतिशत है। बिहार में इसे बढ़ाकर 80 प्रतिशत करने का लक्ष्य है। सुधा केंद्र खोलने पर करीब 60 हजार रुपये की मदद मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत सुधा बिक्री केंद्र खोलने वाली महिलाओं को दूसरी और तीसरी किस्त मिलाकर करीब 60 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है। सभी पंचायतों में एक सुधा बिक्री केंद्र खोलने के लिए महिलाओं का चयन लॉटरी के माध्यम से किया जाएगा। बाद में इस योजना को गांवों तक भी विस्तार देने की योजना है। सभी 534 प्रखंडों में खुलेंगे पशु औषधि केंद्र पशुपालकों को गांव के पास ही पशु चिकित्सा और दवा उपलब्ध कराने के लिए राज्य के सभी 534 प्रखंडों में पशु औषधि बिक्री केंद्र खोलने का अभियान शुरू किया गया है। इन केंद्रों को महिलाओं द्वारा संचालित किया जाएगा। कार्यक्रम में चयनित महिलाओं को इसके लिए चयन-पत्र भी दिए गए। मुख्यमंत्री ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिलाओं के लिए भी बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि यदि इस वर्ग की कोई महिला अंतरजातीय विवाह करती है तो उसे बिहार सरकार की ओर से 1.25 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। केंद्र सरकार की ओर से भी 1.25 लाख रुपये की सहायता का प्रावधान है। इस तरह लाभुक महिला को कुल 2.50 लाख रुपये की सहायता मिल सकेगी। इस फैसले को लागू करने की दिशा में मंगलवार से कदम उठाया गया है। पंचायत और नगर निकाय में महिलाओं को 50% आरक्षण मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में पंचायत और नगर निकाय चुनावों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। इसके परिणामस्वरूप आज करीब 59-60 प्रतिशत महिलाएं जनप्रतिनिधि के रूप में चुनी जा रही हैं। उन्होंने इसे महिला सशक्तीकरण की दिशा में बिहार की बड़ी उपलब्धि बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2020 में सरकार ने 10 लाख सरकारी नौकरी और 10 लाख रोजगार देने का लक्ष्य रखा था। इसके मुकाबले करीब 12 लाख सरकारी नौकरियां देने और लगभग 51 लाख लोगों को रोजगार से जोड़ने का काम किया गया है। अब सरकार ने एक करोड़ लोगों को सीधे सरकारी नौकरी और रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य रखा है। महिलाओं को रोजगार से जोड़ना इसी लक्ष्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है। विद्यार्थियों की समस्याओं के लिए ‘सहयोग’ पोर्टल मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान के लिए शुरू किए गए विद्यार्थी सहयोग शिविर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन व्यवस्था पहले से चल रही है और अब शिविरों के माध्यम से भी छात्रों की समस्याओं का समाधान किया जाएगा। हॉस्टल, छात्रावास, स्कूल, कॉलेज और शिक्षा से जुड़ी अन्य समस्याओं को इसमें शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री के अनुसार सहयोग पोर्टल पर अब तक करीब 6.46 लाख आवेदन आए हैं, जिनमें 96 प्रतिशत आवेदनों का निष्पादन किया जा चुका है। ‘सुधा सखी’ प्रशिक्षण और प्रमाण-पत्र वितरित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने ‘सुधा सखी’ प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ किया। जीविका-सुधा बिक्री केंद्रों के आवंटन-पत्र भी बांटे गए। महिलाओं द्वारा संचालित पशु औषधि बिक्री केंद्रों के लिए चयनित महिलाओं को चयन-पत्र दिए गए। इसके अलावा दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों के निबंधन प्रमाण-पत्र भी वितरित किए गए। मिथिला हस्तकला को-ऑपरेटिव सोसाइटी की घोषणा कार्यक्रम में मिथिला हस्तकला को-ऑपरेटिव सोसाइटी की घोषणा की गई। नवनियुक्त पदाधिकारियों और सदस्यों को प्रमाण-पत्र दिए गए। पद्मश्री दुलारी देवी को अध्यक्ष, पद्मश्री शांति देवी और पद्मश्री शिवम पासवान को सह-अध्यक्ष बनाया गया। रानी झा को सदस्य बनाया गया। जीविका दीदियों ने मुख्यमंत्री को बांधी राखी रक्षाबंधन के मौके पर जीविका दीदियों, सुधा सखियों और दुग्ध उत्पादक महिलाओं ने मुख्यमंत्री को राखी बांधी और शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने भी सभी बहनों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के सुधा स्टॉलों का निरीक्षण किया और वहां रखे उत्पादों की जानकारी ली।  

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