तिब्बत में विशाल ग्लेशियर झील फटने से उत्तर बिहार की नदियों में अचानक बाढ़ का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने से डुमरिया घाट पर नदी खतरे के निशान 62.22 मीटर से 44 मीटर ऊपर बह रही है स्थिति को देखते हुए बिहार सरकार ने अभी भी 6 जिलों को अगले 24 घंटे तक हाईअलर्ट पर रखा है। इन 6 जिलों में पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, सारण, वैशाली, गोपालगंज और मुजफ्फरपुर शामिल है। वाल्मीकिनगर गंडक बराज के सभी 36 गेट खोल दिए गए हैं। शुक्रवार शाम 5 बजे बराज से 1,02,100 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। तटबंधों की सुरक्षा और नदी के जलस्तर की 24 घंटे निगरानी की जा रही है। NDRF, SDRF और स्थानीय बचाव दलों को भी आपात स्थिति के लिए अलर्ट रखा गया है। धर, नेपाल में दो दिनों से फंसे महाराष्ट्र के 110 पर्यटक शुक्रवार को सुरक्षित सीतामढ़ी लौटे। इनमें नागपुर, नासिक और पुणे क्षेत्र के श्रद्धालु शामिल हैं। दो तस्वीरें देखिए… गंडक में पानी का लेवल कैसे बढ़ा, प्रशासन की क्या है तैयारी NDRF-SDRF की टीम तैनात, क्या है तैयारी शिव पुराण महायज्ञ में शामिल होने गए थे महाराष्ट्र के श्रद्धालु प्रशासन ने सभी यात्रियों को भिट्ठा थाना लाया गया, जहां उनके लिए नाश्ते और भोजन की व्यवस्था की गई। स्वास्थ्य जांच के बाद सभी को बस से पटना भेजा गया। यहां से यात्री अपने-अपने घरों के लिए रवाना होंगे। श्रद्धालुओं ने बताया कि वे नेपाल के पोखरा घूमने के बाद काठमांडू में आयोजित शिव पुराण महायज्ञ में शामिल होने गए थे। कार्यक्रम के बाद उनकी वापसी की तैयारी थी, लेकिन आपदा के कारण रास्ते बंद हो गए और उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया गया। लंबे समय तक फंसे रहने के कारण यात्रियों के पास पैसे भी खत्म हो गए थे। यात्रियों की शुक्रवार सुबह 8 बजे दानापुर से ट्रेन थी। परेशान यात्रियों ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से संपर्क किया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने सीतामढ़ी सांसद देवेश चंद्र ठाकुर को फोन कर यात्रियों के नेपाल में फंसे होने की जानकारी दी। सांसद ने नेपाल के मुख्यमंत्री और वहां के सांसदों से संपर्क कर यात्रियों को सुरक्षित निकालने की पहल की। इसके बाद काठमांडू के सांसद संदीप राणा गुरुवार सुबह करीब 8 बजे यात्रियों से मिले। उनकी मदद से बस की व्यवस्था कराई गई। तमाम परेशानियों के बाद शुक्रवार को सभी यात्री सुरक्षित भिट्ठामोड़ बॉर्डर पहुंचे। यहां से उन्हें भिट्ठा थाना लाया गया। प्रशासन ने उनलोगों को खाना खिलाया। इसके बाद मंडिकल जांच कराकर उन्हें पटना रवाना कर दिया गया। बगहा में नदी में कटाव के बाद ग्रामीणों का हंगामा बगहा में गंडक नदी के लगातार कटाव से मंगलपुर गांव पर खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों ने स्थायी सुरक्षा कार्य की मांग को लेकर बगहा-वाल्मीकिनगर मुख्य मार्ग NH-727 को मंगलपुर के पास जाम कर प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। लगभग दो घंटे तक हाईवे जाम रखा। इससे सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और लोगों को समझाकर उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया ग्रामीणों हरमूरत बीन का कहना है कि बारिश के समय केवल बोरियां और बांस-बल्ला लगाकर कटाव नहीं रोका जा सकता है। अगर नदी इसी तरह जमीन काटती रही तो मंगलपुर गांव का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। रामसूरत ने बताया कि गांव एक ओर NH-727 और दूसरी ओर गंडक नदी के बीच बसा है और हर मानसून में यहां कटाव होता है। इस बार भी करीब 7-8 फीट तक जमीन कट चुकी है। केवल बालू की बोरियों से कटाव रोकना संभव नहीं है। भागलपुर में 70 मीटर तटबंध गंगा में समाया, 1700 घर जलमग्न भागलपुर में गंगा की तेज धारा के कारण खरीक प्रखंड के राघोपुर-काजीकोरैया तटबंध पर कटाव तेज हो गया है। पिछले 24 घंटे में तटबंध का करीब 70 मीटर हिस्सा गंगा में समा गया। पिछले छह दिनों में तटबंध का करीब 200 मीटर हिस्सा गंगा में समा चुका है। इससे पहले सोमवार को अपस्ट्रीम हिस्से में करीब 20 मीटर तटबंध नदी में समा गया था। कटाव और जलस्तर बढ़ने के कारण इलाके के करीब 1700 घर जलमग्न हैं, जबकि लगभग 7000 की आबादी प्रभावित हुई है। लोगों के सामने घर-बार और जरूरी सामान बचाने की चुनौती बनी हुई है। कटाव को रोकने के लिए जल संसाधन विभाग युद्ध स्तर पर बचाव कार्य में जुटा है। हालांकि, गंगा की तेज धारा के कारण कटाव निरोधी कार्य में लगातार परेशानी आ रही है। ========================== ये खबरें भी पढ़ें… ‘आंखों के सामने बह गई कार…लगा अब हमारी बारी है’:नेपाल से रेस्क्यू 106 भारतीयों की आपबीती; बोले- जिस पुल से आए वो भी डूब गया नेपाल से रेस्क्यू किए गए भारतीयों का, 106 लोगों को शुक्रवार शाम बिहार सरकार की मदद से सुरक्षित सीतामढ़ी लाया गया। इसके बाद इन्हें बस की मदद से देर रात पटना भेजा गया। वहां से ट्रेन की मदद से सुरक्षित इनके राज्य महाराष्ट्र भेजा गया। नेपाल में भीषण बाढ़ से अब तक 500 से ज्यादा लोगों की मौत और 1900 से ज्यादा लोगों के लापता होने की खबर है। इनमें बिहार के भी कई लोग शामिल हैं। पूरी खबर पढ़ें… तिब्बत में विशाल ग्लेशियर झील फटने से उत्तर बिहार की नदियों में अचानक बाढ़ का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने से डुमरिया घाट पर नदी खतरे के निशान 62.22 मीटर से 44 मीटर ऊपर बह रही है स्थिति को देखते हुए बिहार सरकार ने अभी भी 6 जिलों को अगले 24 घंटे तक हाईअलर्ट पर रखा है। इन 6 जिलों में पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, सारण, वैशाली, गोपालगंज और मुजफ्फरपुर शामिल है। वाल्मीकिनगर गंडक बराज के सभी 36 गेट खोल दिए गए हैं। शुक्रवार शाम 5 बजे बराज से 1,02,100 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। तटबंधों की सुरक्षा और नदी के जलस्तर की 24 घंटे निगरानी की जा रही है। NDRF, SDRF और स्थानीय बचाव दलों को भी आपात स्थिति के लिए अलर्ट रखा गया है। धर, नेपाल में दो दिनों से फंसे महाराष्ट्र के 110 पर्यटक शुक्रवार को सुरक्षित सीतामढ़ी लौटे। इनमें नागपुर, नासिक और पुणे क्षेत्र के श्रद्धालु शामिल हैं। दो तस्वीरें देखिए… गंडक में पानी का लेवल कैसे बढ़ा, प्रशासन की क्या है तैयारी NDRF-SDRF की टीम तैनात, क्या है तैयारी शिव पुराण महायज्ञ में शामिल होने गए थे महाराष्ट्र के श्रद्धालु प्रशासन ने सभी यात्रियों को भिट्ठा थाना लाया गया, जहां उनके लिए नाश्ते और भोजन की व्यवस्था की गई। स्वास्थ्य जांच के बाद सभी को बस से पटना भेजा गया। यहां से यात्री अपने-अपने घरों के लिए रवाना होंगे। श्रद्धालुओं ने बताया कि वे नेपाल के पोखरा घूमने के बाद काठमांडू में आयोजित शिव पुराण महायज्ञ में शामिल होने गए थे। कार्यक्रम के बाद उनकी वापसी की तैयारी थी, लेकिन आपदा के कारण रास्ते बंद हो गए और उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया गया। लंबे समय तक फंसे रहने के कारण यात्रियों के पास पैसे भी खत्म हो गए थे। यात्रियों की शुक्रवार सुबह 8 बजे दानापुर से ट्रेन थी। परेशान यात्रियों ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से संपर्क किया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने सीतामढ़ी सांसद देवेश चंद्र ठाकुर को फोन कर यात्रियों के नेपाल में फंसे होने की जानकारी दी। सांसद ने नेपाल के मुख्यमंत्री और वहां के सांसदों से संपर्क कर यात्रियों को सुरक्षित निकालने की पहल की। इसके बाद काठमांडू के सांसद संदीप राणा गुरुवार सुबह करीब 8 बजे यात्रियों से मिले। उनकी मदद से बस की व्यवस्था कराई गई। तमाम परेशानियों के बाद शुक्रवार को सभी यात्री सुरक्षित भिट्ठामोड़ बॉर्डर पहुंचे। यहां से उन्हें भिट्ठा थाना लाया गया। प्रशासन ने उनलोगों को खाना खिलाया। इसके बाद मंडिकल जांच कराकर उन्हें पटना रवाना कर दिया गया। बगहा में नदी में कटाव के बाद ग्रामीणों का हंगामा बगहा में गंडक नदी के लगातार कटाव से मंगलपुर गांव पर खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों ने स्थायी सुरक्षा कार्य की मांग को लेकर बगहा-वाल्मीकिनगर मुख्य मार्ग NH-727 को मंगलपुर के पास जाम कर प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। लगभग दो घंटे तक हाईवे जाम रखा। इससे सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और लोगों को समझाकर उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया ग्रामीणों हरमूरत बीन का कहना है कि बारिश के समय केवल बोरियां और बांस-बल्ला लगाकर कटाव नहीं रोका जा सकता है। अगर नदी इसी तरह जमीन काटती रही तो मंगलपुर गांव का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। रामसूरत ने बताया कि गांव एक ओर NH-727 और दूसरी ओर गंडक नदी के बीच बसा है और हर मानसून में यहां कटाव होता है। इस बार भी करीब 7-8 फीट तक जमीन कट चुकी है। केवल बालू की बोरियों से कटाव रोकना संभव नहीं है। भागलपुर में 70 मीटर तटबंध गंगा में समाया, 1700 घर जलमग्न भागलपुर में गंगा की तेज धारा के कारण खरीक प्रखंड के राघोपुर-काजीकोरैया तटबंध पर कटाव तेज हो गया है। पिछले 24 घंटे में तटबंध का करीब 70 मीटर हिस्सा गंगा में समा गया। पिछले छह दिनों में तटबंध का करीब 200 मीटर हिस्सा गंगा में समा चुका है। इससे पहले सोमवार को अपस्ट्रीम हिस्से में करीब 20 मीटर तटबंध नदी में समा गया था। कटाव और जलस्तर बढ़ने के कारण इलाके के करीब 1700 घर जलमग्न हैं, जबकि लगभग 7000 की आबादी प्रभावित हुई है। लोगों के सामने घर-बार और जरूरी सामान बचाने की चुनौती बनी हुई है। कटाव को रोकने के लिए जल संसाधन विभाग युद्ध स्तर पर बचाव कार्य में जुटा है। हालांकि, गंगा की तेज धारा के कारण कटाव निरोधी कार्य में लगातार परेशानी आ रही है। ========================== ये खबरें भी पढ़ें… ‘आंखों के सामने बह गई कार…लगा अब हमारी बारी है’:नेपाल से रेस्क्यू 106 भारतीयों की आपबीती; बोले- जिस पुल से आए वो भी डूब गया नेपाल से रेस्क्यू किए गए भारतीयों का, 106 लोगों को शुक्रवार शाम बिहार सरकार की मदद से सुरक्षित सीतामढ़ी लाया गया। इसके बाद इन्हें बस की मदद से देर रात पटना भेजा गया। वहां से ट्रेन की मदद से सुरक्षित इनके राज्य महाराष्ट्र भेजा गया। नेपाल में भीषण बाढ़ से अब तक 500 से ज्यादा लोगों की मौत और 1900 से ज्यादा लोगों के लापता होने की खबर है। इनमें बिहार के भी कई लोग शामिल हैं। पूरी खबर पढ़ें…

