उन्नाव में गंगा नदी का जलस्तर लगातार दूसरे दिन घटा है। रविवार सुबह केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के अनुसार, गंगा का जलस्तर 111.57 मीटर दर्ज किया गया। पिछले 24 घंटे में इसमें 13 सेंटीमीटर की कमी आई है। अब जलस्तर चेतावनी बिंदु 112 मीटर से 43 सेंटीमीटर नीचे पहुंच गया है। करीब तीन महीने बाद गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु से नीचे आने से शुक्लागंज और आसपास के तटीय इलाकों के लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, निचली बस्तियों और संपर्क मार्गों पर अब भी पानी भरा होने से लोगों की परेशानियां बनी हुई हैं। खतरे का निशान पार करने के बाद घरों तक पहुंचा था पानी गंगा का जलस्तर खतरे के निशान 113 मीटर को पार करने के बाद शुक्लागंज और आसपास के इलाकों में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई थी। गोताखोर, कर्बला, हुसैन नगर, तेजीपुरवा, सैय्यद कंपाउंड, रविदास नगर, मालवीय नगर, श्रीनगर और इंद्रानगर समेत कई मोहल्लों में घरों तक पानी पहुंच गया था। बाढ़ के कारण लोगों को जरूरी सामान लाने, कामकाज के लिए निकलने और सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई संपर्क मार्गों पर पानी भरने से आवागमन मुश्किल हो गया था। ग्रामीण क्षेत्रों में गगनीखेड़ा और फत्तेखेड़ा में भी बाढ़ का असर देखने को मिला। कान्हा गौशाला और पावर हाउस के पास भी पहुंचा था पानी नेतुआ स्थित कान्हा गौशाला में भी बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया था। वहीं, त्रिभुवनखेड़ा पावर हाउस के पास पानी पहुंचने के बाद स्थिति पर नजर रखी जा रही थी। गंगा का जलस्तर घटने से तटीय क्षेत्रों के लोगों को पानी उतरने की उम्मीद जगी है, लेकिन निचली बस्तियों में जमा पानी की निकासी में अभी समय लग सकता है। संपर्क मार्गों पर जलभराव के कारण जनजीवन पूरी तरह सामान्य नहीं हो सका है। ऐसे में लोगों को गंगा के जलस्तर में होने वाले बदलाव पर नजर रखते हुए सतर्क रहने की जरूरत है।

