बिजनौर में मुस्लिम कारीगर बनाते हैं रावण के पुतले:दशकों से चली आ रही परंपरा, दशहरा पर दिखती है हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल

बिजनौर में मुस्लिम कारीगर बनाते हैं रावण के पुतले:दशकों से चली आ रही परंपरा, दशहरा पर दिखती है हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल

देशभर में दशहरा का पर्व आज मनाया जाएगा। बिजनौर में रावण और कुंभकरण के पुतलों का दहन होगा। इन पुतलों को मुस्लिम कारीगर महीनों की मेहनत से तैयार करते हैं, जो हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की मिसाल पेश करता है। दशहरा सिर्फ धार्मिक आस्था का नहीं, बल्कि आपसी भाईचारे और साझा संस्कृति का संदेश भी देता है। बिजनौर में रावण दहन की परंपरा से हसीनुद्दीन और उनके परिवार की रोजी-रोटी जुड़ी है। उनका परिवार पीढ़ियों से रावण के पुतले बनाने का काम करता आ रहा है। हसीनुद्दीन बताते हैं कि उनके पूर्वज भी यह काम करते थे और अब वह इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। बांस, कागज और अन्य सामग्री से पुतले तैयार किए जाते हैं, जिसमें काफी मेहनत और समय लगता है। यह काम उनके परिवार के लिए केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि आजीविका का मुख्य साधन भी है। एक मुस्लिम परिवार का हिंदू पर्व के आयोजन में भूमिका निभाना बिजनौर की गंगा-जमुनी तहजीब और साझा संस्कृति की मिसाल है। हसीनुद्दीन का परिवार इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए बताता है कि हुनर, मेहनत और आपसी सहयोग की कोई धार्मिक सीमा नहीं होती।

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *