Vomiting Syndrome Symptoms: कई बार इंसान को अचानक से बहुत तेज उल्टी और जी मिचलाने की शिकायत होने लगती है। यह उल्टी इतनी भयानक होती है कि दिन में कई-कई बार आती है और व्यक्ति पूरी तरह से पस्त हो जाता है। लेकिन हैरानी की बात यह होती है कि कुछ घंटे या दिन बीतने के बाद यह समस्या अपने आप बिल्कुल ठीक भी हो जाती है और व्यक्ति फिर से सामान्य महसूस करने लगता है। अक्सर लोग इसे केवल पेट की खराबी, फूड पॉइजनिंग या बदहजमी मानकर टाल देते हैं। एनएचएस के अनुसार, अगर यह परेशानी एक तय पैटर्न के तहत बार-बार लौटकर आ रही है, तो इसे बिल्कुल भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। इसको साइक्लिक वोमिटिंग सिंड्रोम (Cyclic Vomiting Syndrome or CVS) कहा जाता है। यह एक ऐसी बीमारी है जिसमें व्यक्ति को बिना किसी स्पष्ट कारण के उल्टी के गंभीर दौरे (Attacks) पड़ते हैं। आइए समझते हैं कि साइक्लिक वोमिटिंग सिंड्रोम क्या है, इसके शुरुआती लक्षण क्या हैं और इससे कैसे निपटा जा सकता है।
क्या है साइक्लिक वोमिटिंग सिंड्रोम?
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, साइक्लिक वोमिटिंग सिंड्रोम पेट और नसों से जुड़ा एक दुर्लभ विकार है। इसमें मरीज को एक निश्चित अंतराल के बाद अचानक उल्टी और मतली के दौरे पड़ते हैं। यह दौर कुछ घंटों से लेकर 2-3 दिनों तक लगातार जारी रह सकता है। इस बीमारी की सबसे अनोखी बात यह है कि दो दौरों के बीच का समय बिल्कुल सामान्य होता है। यानी जब उल्टी का दौरा खत्म हो जाता है, तो मरीज पूरी तरह से स्वस्थ महसूस करता है और उसे पेट से जुड़ी कोई परेशानी नहीं होती। यह समस्या बच्चों और वयस्कों दोनों में देखी जा सकती है।
कैसे पहचानें इसके लक्षण?
- लगातार तेज उल्टी होना।
- समय और पैटर्न का तय होना।
- अत्यधिक थकावट और सुस्ती।
- पेट दर्द और सिरदर्द होना।
- रोशनी और आवाज से चिड़चिड़ापन।
- त्वचा का पीला पड़ना।
यह परेशानी क्यों होती है?
- अत्यधिक तनाव, डर या बहुत ज्यादा खुशी का माहौल।
- नींद पूरी न होना या बहुत ज्यादा शारीरिक थकावट।
- कुछ खास तरह के खाद्य पदार्थ (जैसे चॉकलेट, पनीर या कैफीन)।
- मौसम का अचानक बदलना या सफर (Motion Sickness)।
- खाली पेट रहना या लंबे समय तक उपवास रखना।
क्या इसका इलाज संभव है और इससे कैसे बचें?
साइक्लिक वोमिटिंग सिंड्रोम का कोई एक पक्का इलाज नहीं है, लेकिन सही समय पर देखभाल और जीवनशैली में बदलाव करके इसके दौरों की आवृत्ति (Frequency) और गंभीरता को काफी हद तक कम किया जा सकता है;
- शरीर में पानी की कमी न होने दें।
- शांत और अंधेरे कमरे में आराम।
- दवाइयों की मदद से कम हो सकती है।
- खान-पान की आदतों में सुधार।

