गयाजी जिले के डुमरिया प्रखंड में पिछले चार दिनों से लगातार बारिश हो रही है, जिससे ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है। इसी बारिश के कारण छकरबंधा पंचायत के महुलनिया गांव में मंगलवार देर रात एक खपरैल मकान के दो हिस्से अचानक ढह गए। घटना के समय परिवार के सभी पांच सदस्य घर के अंदर सो रहे थे। मकान गिरने की आवाज और घर में पानी घुसने के बाद परिवार के लोग किसी तरह बाहर निकले और बाल-बाल बच गए। घर के मालिक सुरेश यादव ने बताया कि मंगलवार रात उनके परिवार के पांच सदस्य घर में सो रहे थे। देर रात तेज बारिश के कारण घर में पानी भरने लगा। इसी दौरान मकान की मिट्टी की दीवारें कमजोर होकर अचानक गिर गईं। देखते ही देखते खपरैल मकान के दो हिस्से जमीन पर आ गिरे। इस घटना के बाद परिवार में हड़कंप मच गया। सुरेश यादव ने बताया कि उनका मकान काफी पुराना और मिट्टी का बना था। लगातार बारिश से दीवारों में पानी भर गया था, जिससे मकान पहले से ही कमजोर हो गया था। गनीमत रही कि मकान गिरने से पहले परिवार के सदस्यों को खतरे का एहसास हो गया और वे बाहर निकल गए। इससे एक हादसा टल गया। मकान के दो हिस्से ढहने से अब परिवार के सामने रहने की बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। घर में रखा सामान भी बारिश और मलबे से खराब हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार बारिश के कारण गांव में मिट्टी और खपरैल से बने कई मकानों की हालत खराब हो गई है। ऐसे मकानों में रहने वाले परिवारों पर किसी हादसे का खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि कमजोर मकानों का सर्वे कराकर प्रभावित परिवारों को सुरक्षित जगह पहुंचाया जाए और जरूरी मदद दी जाए। इस बारे में सीओ संजय कुमार ने बताया कि पीड़ित परिवार से आवेदन मिलने पर मामले की जांच की जाएगी। जांच के बाद सरकारी नियमों के अनुसार कार्रवाई होगी। गयाजी जिले के डुमरिया प्रखंड में पिछले चार दिनों से लगातार बारिश हो रही है, जिससे ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है। इसी बारिश के कारण छकरबंधा पंचायत के महुलनिया गांव में मंगलवार देर रात एक खपरैल मकान के दो हिस्से अचानक ढह गए। घटना के समय परिवार के सभी पांच सदस्य घर के अंदर सो रहे थे। मकान गिरने की आवाज और घर में पानी घुसने के बाद परिवार के लोग किसी तरह बाहर निकले और बाल-बाल बच गए। घर के मालिक सुरेश यादव ने बताया कि मंगलवार रात उनके परिवार के पांच सदस्य घर में सो रहे थे। देर रात तेज बारिश के कारण घर में पानी भरने लगा। इसी दौरान मकान की मिट्टी की दीवारें कमजोर होकर अचानक गिर गईं। देखते ही देखते खपरैल मकान के दो हिस्से जमीन पर आ गिरे। इस घटना के बाद परिवार में हड़कंप मच गया। सुरेश यादव ने बताया कि उनका मकान काफी पुराना और मिट्टी का बना था। लगातार बारिश से दीवारों में पानी भर गया था, जिससे मकान पहले से ही कमजोर हो गया था। गनीमत रही कि मकान गिरने से पहले परिवार के सदस्यों को खतरे का एहसास हो गया और वे बाहर निकल गए। इससे एक हादसा टल गया। मकान के दो हिस्से ढहने से अब परिवार के सामने रहने की बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। घर में रखा सामान भी बारिश और मलबे से खराब हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार बारिश के कारण गांव में मिट्टी और खपरैल से बने कई मकानों की हालत खराब हो गई है। ऐसे मकानों में रहने वाले परिवारों पर किसी हादसे का खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि कमजोर मकानों का सर्वे कराकर प्रभावित परिवारों को सुरक्षित जगह पहुंचाया जाए और जरूरी मदद दी जाए। इस बारे में सीओ संजय कुमार ने बताया कि पीड़ित परिवार से आवेदन मिलने पर मामले की जांच की जाएगी। जांच के बाद सरकारी नियमों के अनुसार कार्रवाई होगी।

