मुशहरी प्रखंड की छपरा मेघ पंचायत स्थित स्वयंभू बाबा दूधनाथ महादेव धाम में सावन की चौथी और अंतिम सोमवारी को 25 हजार से अधिक कांवरियों और श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया। इस अवसर पर बाबा दूधनाथ महादेव का बर्फ की सिली से महाश्रृंगार किया गया, जो भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। पंडित मुकुल झा ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ बाबा दूधनाथ महादेव की विधिवत पूजा-अर्चना, अभिषेक और श्रृंगार संपन्न कराया। इसके उपरांत मंदिर परिसर में महाआरती का आयोजन किया गया। अंतिम सोमवारी के लिए कांवरियों और श्रद्धालुओं ने पहलेजा तथा बूढ़ी गंडक नदी के आथर घाट से जल ग्रहण किया। सुबह से ही मंदिर परिसर में भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिसमें बड़ी संख्या में महिला श्रद्धालु भी शामिल थीं। सभी ने बाबा का आशीर्वाद प्राप्त किया। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु जिला प्रशासन ने व्यापक प्रबंध किए थे। मंदिर परिसर और आसपास टेंट लगाए गए थे, साथ ही सीसीटीवी कैमरों से निरंतर निगरानी की गई। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए एसडीआरएफ की टीम भी तैनात रही। स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक स्वास्थ्य शिविर भी स्थापित किया गया था। मुशहरी पीएचसी से मनोज गुप्ता समेत अन्य स्वास्थ्यकर्मी श्रद्धालुओं की सेवा में तत्पर रहे। मंदिर समिति के अध्यक्ष शंकर प्रसाद सिंह ने बताया कि अंतिम सोमवारी पर कांवरियों और श्रद्धालुओं ने शांतिपूर्ण ढंग से जलाभिषेक और पूजा-अर्चना की। उन्होंने प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, एसडीआरएफ और मंदिर समिति के सहयोग से पूरी व्यवस्था के सुचारू संचालन पर संतोष व्यक्त किया। पूरे मंदिर परिसर में ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयकारे गूंजते रहे, जिससे वातावरण भक्तिमय हो गया। सावन की अंतिम सोमवारी श्रद्धा और उत्साह के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुई। मुशहरी प्रखंड की छपरा मेघ पंचायत स्थित स्वयंभू बाबा दूधनाथ महादेव धाम में सावन की चौथी और अंतिम सोमवारी को 25 हजार से अधिक कांवरियों और श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया। इस अवसर पर बाबा दूधनाथ महादेव का बर्फ की सिली से महाश्रृंगार किया गया, जो भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। पंडित मुकुल झा ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ बाबा दूधनाथ महादेव की विधिवत पूजा-अर्चना, अभिषेक और श्रृंगार संपन्न कराया। इसके उपरांत मंदिर परिसर में महाआरती का आयोजन किया गया। अंतिम सोमवारी के लिए कांवरियों और श्रद्धालुओं ने पहलेजा तथा बूढ़ी गंडक नदी के आथर घाट से जल ग्रहण किया। सुबह से ही मंदिर परिसर में भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिसमें बड़ी संख्या में महिला श्रद्धालु भी शामिल थीं। सभी ने बाबा का आशीर्वाद प्राप्त किया। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु जिला प्रशासन ने व्यापक प्रबंध किए थे। मंदिर परिसर और आसपास टेंट लगाए गए थे, साथ ही सीसीटीवी कैमरों से निरंतर निगरानी की गई। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए एसडीआरएफ की टीम भी तैनात रही। स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक स्वास्थ्य शिविर भी स्थापित किया गया था। मुशहरी पीएचसी से मनोज गुप्ता समेत अन्य स्वास्थ्यकर्मी श्रद्धालुओं की सेवा में तत्पर रहे। मंदिर समिति के अध्यक्ष शंकर प्रसाद सिंह ने बताया कि अंतिम सोमवारी पर कांवरियों और श्रद्धालुओं ने शांतिपूर्ण ढंग से जलाभिषेक और पूजा-अर्चना की। उन्होंने प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, एसडीआरएफ और मंदिर समिति के सहयोग से पूरी व्यवस्था के सुचारू संचालन पर संतोष व्यक्त किया। पूरे मंदिर परिसर में ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयकारे गूंजते रहे, जिससे वातावरण भक्तिमय हो गया। सावन की अंतिम सोमवारी श्रद्धा और उत्साह के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुई।

