बहादुरगढ़ के मुख्य बाजार स्थित एस.ए. ज्वैलर्स में आंखों में लाल मिर्च पाउडर डालकर गनपॉइंट पर लूट की कोशिश और गोली चलाने के करीब साढ़े पांच साल पुराने मामले में अदालत ने मुख्य आरोपी रेशम निवासी फरीदकोट, पंजाब को बरी कर दिया है। झज्जर की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुखप्रीत सिंह की अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को उचित संदेह से परे साबित नहीं कर पाया। मामले में दूसरा आरोपी रणबीर निवासी मोगा, पंजाब सुनवाई के दौरान फरार हो गया था। अदालत उसे पहले ही भगोड़ा घोषित कर चुकी है। दुकान में घुसे थे दो युवक, महिला की आंखों में डाली थी मिर्च अभियोजन के अनुसार घटना 22 फरवरी 2021 की शाम करीब 7:30 बजे बहादुरगढ़ की पुरानी सब्जी मंडी स्थित एस.ए. ज्वैलर्स की है। उस समय दुकान पर मालिक सुदीप अग्रवाल की मां परमोद अग्रवाल और कर्मचारी सैफ-उल-शेख उर्फ सूरज मौजूद थे। आरोप था कि दो युवक दुकान में दाखिल हुए। एक आरोपी ने तमंचा दिखाकर दोनों को काबू करने का प्रयास किया और महिला की आंखों में लाल मिर्च पाउडर डाल दिया। कर्मचारी सूरज ने विरोध किया तो उसके सिर पर तमंचे के बट से वार किया गया। आरोपी ने गोली चलाने का प्रयास भी किया, लेकिन गोली नहीं चली। शोर सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए। इसी दौरान एक आरोपी रणबीर को लोगों ने पकड़ लिया, जबकि दूसरा आरोपी मौके से फरार हो गया। घटना के अगले दिन बहादुरगढ़ के बाजारों में विरोध भी हुआ था और व्यापारियों ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर रोष जताया था। कोर्ट में सबसे बड़ा सवाल- रेशम ही दूसरा आरोपी था, यह साबित कैसे हुआ? सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता यशवीर सिंह ने आरोपी की पहचान और पुलिस जांच पर सवाल उठाए। अदालत के सामने भी इन बिंदुओं को अभियोजन के लिए महत्वपूर्ण माना गया। पहचान को लेकर गवाहों की गवाही कमजोर रही शिकायतकर्ता सुदीप और उसकी मां परमोद ने अदालत में स्वीकार किया कि वे दूसरे आरोपी की स्पष्ट पहचान नहीं कर पाए थे। खास तौर पर महिला की आंखों में मिर्च पाउडर डाले जाने के कारण पहचान को लेकर संदेह की स्थिति बनी रही। TIP नहीं कराई गई रेशम को मौके से गिरफ्तार नहीं किया गया था, बल्कि उसे बाद में पकड़ा गया था। FIR भी अज्ञात आरोपियों के खिलाफ दर्ज हुई थी। इसके बावजूद पुलिस ने गवाहों से आरोपी की Test Identification Parade (TIP) नहीं कराई। बचाव पक्ष ने इसे पहचान की प्रक्रिया में गंभीर कमी बताया। पुलिस और चश्मदीदों के बयान में अंतर मौके पर मौजूद कर्मचारियों और चश्मदीदों के अनुसार एक आरोपी को मौके पर पकड़ा गया और दूसरा भाग गया था। वहीं कुछ पुलिस अधिकारियों के बयानों में दो युवकों को भीड़ द्वारा पकड़े जाने की बात सामने आई। इन विरोधाभासों ने अभियोजन के मामले को कमजोर किया। जिस तमंचे से हमला बताया, उसकी टेस्ट फायरिंग तक नहीं हुई मामले में हथियार की बरामदगी भी पुलिस के लिए बड़ी कमजोरी बनी। अदालत के सामने आया कि वारदात में इस्तेमाल बताया गया तमंचा रेशम की निशानदेही पर बरामद नहीं हुआ था, बल्कि शिकायतकर्ता ने ही इसे पुलिस को सौंपा था। इसके अलावा पुलिस यह भी ठोस रूप से साबित नहीं कर पाई कि बरामद तमंचा वारदात के समय कार्यशील स्थिति में था। हथियार की आर्मरर से टेस्ट फायरिंग भी नहीं कराई गई। अदालत ने संबंधित हाईकोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए हथियार की कार्यशीलता साबित नहीं होने को भी अभियोजन के मामले की महत्वपूर्ण कमी माना। संदेह का लाभ मिला, सभी धाराओं से बरी सभी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों की समीक्षा के बाद अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष रेशम के खिलाफ IPC की धारा 393, 394, 398/34 और आर्म्स एक्ट की धारा 25/27 के आरोपों को उचित संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहा। इसके बाद अदालत ने रेशम को संदेह का लाभ देते हुए सभी आरोपों से बरी कर दिया। रणबीर पकड़ा गया तो आगे बढ़ेगी सुनवाई मामले के दूसरे आरोपी रणबीर को अदालत पहले ही भगोड़ा घोषित कर चुकी है। अदालत ने केस की फाइल और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। रणबीर के पुलिस के हाथ लगने या अदालत में आत्मसमर्पण करने के बाद उसके खिलाफ मामले की सुनवाई आगे बढ़ाई जा सकेगी। यानी वारदात में लूट की कोशिश, मिर्च पाउडर से हमला और हथियार का इस्तेमाल जैसे गंभीर आरोपों के बावजूद रेशम के खिलाफ आरोपी की पहचान, हथियार की बरामदगी और उसकी कार्यशीलता साबित करने में जांच की कमियां अभियोजन के लिए भारी पड़ गईं और अदालत में मामला संदेह से परे साबित नहीं हो सका।

