दुर्ग बस स्टैंड के यात्री प्रतीक्षालय के पास पुलिस ने गांजा बेचने की कोशिश कर रहे महाराष्ट्र के एक युवक को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक युवक दूसरे राज्य से गांजा लेकर दुर्ग पहुंचा था और बस स्टैंड के आसपास ग्राहकों की तलाश कर रहा था। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया। तलाशी में उसके काले रंग के बैग से 2 किलो 520 ग्राम गांजा बरामद हुआ। पदमनाभपुर पुलिस के अनुसार, 6 सितंबर को सूचना मिली थी कि दुर्ग बस स्टैंड के यात्री प्रतीक्षालय के पास एक व्यक्ति गांजा बेचने के लिए खड़ा है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और आसपास नजर रखनी शुरू की। संदिग्ध व्यक्ति दिखाई देने पर पुलिस ने घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया। पूछताछ में युवक ने अपना नाम वसंत श्याम राव ओमकारे, उम्र 32 वर्ष बताया। वह महाराष्ट्र के पुणे जिले का रहने वाला है। पुलिस ने उसके पास रखे काले बैग की तलाशी ली तो उसमें गांजा मिला। वजन करने पर गांजा 2.520 किलो निकला। दूसरे राज्य से गांजा लाकर बेचने की कोशिश
पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि आरोपी दूसरे राज्य से गांजा लेकर दुर्ग आया था। वह बस स्टैंड जैसे भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थान के आसपास ग्राहक तलाशकर गांजा बेचने की कोशिश कर रहा था। पुलिस के अनुसार, उसका मकसद गांजा बेचकर पैसा कमाना था। पुलिस ने आरोपी के पास से 2.520 किलो गांजा, 540 रुपए बिक्री रकम और एक की-पैड मोबाइल फोन बरामद किया है। जब्त सामान की कुल कीमत करीब 1 लाख 26 हजार 540 रुपए बताई गई है। इसमें गांजे की अनुमानित कीमत 1 लाख 25 हजार रुपए है। बस स्टैंड पर लगातार हो रही इस तरह की गतिविधियां
बता दें कि पिछले कुछ महीनों से दुर्ग के बस स्टैंड पर इस तरह गतिविधियां संचालित होने की जानकारी सामने आ रही है। बस स्टैंड जैसे स्थान पर हर समय दूसरे शहरों से आने-जाने वाले लोगों की भीड़ रहती है। ऐसे में बाहर से आने वाले व्यक्ति की पहचान करना सामान्य लोगों के लिए आसान नहीं होता। पुलिस की शुरुआती जानकारी के अनुसार, आरोपी इसी तरह के सार्वजनिक स्थान के आसपास ग्राहक तलाश रहा था। हालांकि पुलिस अब यह भी पता लगाने में जुटी है कि वह गांजा कहां से लेकर आया था और इसे दुर्ग में किन लोगों को बेचने वाला था। पुलिस ने आरोपी वसंत श्याम राव ओमकारे को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। अब जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि गांजा किससे खरीदा गया था और दुर्ग में इसे किन लोगों तक पहुंचाया जाना था।

