दिल्ली के सत्या निकेतन हादसे में 7 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। रविवार को गिरी पांच मंजिला बिल्डिंग के मलबे के अंदर से 7 लाशें बाहर निकली हैं। मरने वालों में एक छात्र और एक मजदूर की पहचान हुई थी। मृत छात्र अभिषेक कुमार वाराणसी के पड़ोसी जनपद चंदौली के लौंडा झांसी गांव के रहने वाले संतोष कुमार खरवार का लड़का है। संतोष ने मंगलवार को काशी में मणिकर्णिका घाट पर अपने बेटे को अंतिम विदाई दी और उसका दाह संस्कार किया। गमगीन माहौल में उसे मुखाग्नि देते हुए पिता फफक पड़े। बोले कारोबार करने का उसका सपना टूट गया। संतोष पेशे से इंजिनियर हैं और रेणूकूट, सोनभद्र में रहते हैं। सुबह 10 बजे अभिषेक का पार्थिव शरीर उसके पैतृक गांव से मणिकर्णिका घाट पहुंचा था। जहां हर-हर महादेव का जयघोष लगाया जा रहा था। बीकॉम सेकेंड ईयर का था स्टूडेंट हिंडाल्को रेणूकूट में इंजिनियर संतोष खरवार ने बताया – मेरा बेटा दिल्ली विश्वविद्यालय के मोतीलाल नेहरू कालेज में पढ़ रहा था। वह बीकॉम सेकेंड ईयर का छात्र था। और पढ़ने में बहुत तेज था। वह बीकॉम के बाद एमबीए कर अपना बिजनेस शुरू करना चाहता था। अब कारोबार का सपना टूट गया। उसके बाद संतोष की आंखे नम हो गईं। बहन की शादी के बाद नहीं आया था घर संतोष ने बताया – अभिषेक मेरे तीन बच्चों में सबसे छोटा था। मेरी बड़ी बेटी खुशबू नर्सिंग का कोर्स की है। दुसरे नंबर जो बेटा है ओम वह कोटा से कोचिंग कर रहा है और अभिषेक दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़ रहा था। अभिषेक दिसंबर में अपनी बहन की शादी में आया था। उसके बाद वापस गया तो फिर घर नहीं आया था। ऐसे में घर में कोहराम मचा हुआ है। छठ पूजा पर आने की किया था बात अभिषेक के बुआ के लड़के शिवम ने बताया – अभिषेक बहुत खुशमिजाज लड़का था और हमेशा मुझे फोन करता रहता था। जन्माष्टमी पर उसने पूरे परिवार से वीडियो काल पर बता की थी। यहां तक की अपने ननिहाल में भी फोन कर सबसे आशीर्वाद लिया था। मुझसे बात हुई तो बोला भइया अबकी छठ पूजा पर आना है। दिल्ली से पठाखे लाऊंगा लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। जांच के बाद मिले दोषियों को सजा इंजिनियर संतोष कुमार ने खुद को संभालते हुए कहा- बेटा चला गया पर दिल्ली सरकार से निवेदन है कि जो भी लोग इस हादसे के जिम्मेदार हैं। उन्हें कड़ी सजा मिले ताकि दोबारा ऐसी घटनाएं न हो और एक बाप को अपने बेटे की चिता को मुखग्नि देनी पड़े।

