बस्ती के जिला चिकित्सालय परिसर स्थित होम्योपैथिक अस्पताल में संसाधनों की भारी कमी है। मरीजों को आठ माह से दवा रखने वाली शीशियां नहीं मिल पा रही हैं, जबकि कई जरूरी दवाएं भी पिछले छह माह से स्टॉक में नहीं हैं। अस्पताल में मौजूद दवाओं को मरीजों तक पहुंचाने के लिए पुरानी या उधार की शीशियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शुक्रवार दोपहर 12:50 बजे अस्पताल की पड़ताल के दौरान कई खामियां सामने आईं। अस्पताल परिसर के बाहर होम्योपैथी के जनक डॉ. हैनिमैन की प्रतिमा उपेक्षित मिली। मरीजों के बैठने के लिए रखी कई कुर्सियां टूटी हुई थीं। दवा कक्ष में जानकारी लेने पर पता चला कि कई महत्वपूर्ण दवाएं खत्म हो चुकी हैं। ऐसे में इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों को अपेक्षित दवाएं नहीं मिल पा रही हैं और उन्हें निराश होकर लौटना पड़ रहा है। अस्पताल में दो होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी, एक फार्मासिस्ट और एक वार्ड ब्वॉय तैनात हैं। जिला चिकित्सालय परिसर में होने के कारण यहां मरीजों की आवाजाही रहती है, लेकिन दवाओं और जरूरी सुविधाओं के अभाव में अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। वरिष्ठ चिकित्साधिकारी डॉ. संतोष कुमार दुबे ने बताया कि कुछ जरूरी दवाएं करीब छह माह से समाप्त हैं। इनके लिए मांग पत्र (इंडेंट) भेजा गया है, लेकिन जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी की ओर से अभी तक दवाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। डॉ. दुबे ने यह भी बताया कि शीशियां लगभग आठ माह से खत्म हैं, जिससे दवा वितरण में काफी दिक्कत हो रही है। टूटी कुर्सियों के संबंध में भी कई बार लिखित रूप से अवगत कराया जा चुका है।

