बदायूं में 20 हजार परिवारों से 200 करोड़ की ठगी:कोई बिना इलाज मरा, किसी का ऑपरेशन रुका, लोगों का सवाल- पैसा कब वापस मिलेगा?

बदायूं में 20 हजार परिवारों से 200 करोड़ की ठगी:कोई बिना इलाज मरा, किसी का ऑपरेशन रुका, लोगों का सवाल- पैसा कब वापस मिलेगा?

‘मैं चाय की दुकान चलाता था। मेरा भांजा भी मदद करता था। उसके पैर में गैंगरीन था, जिसका ऑपरेशन होना था। मैंने अपने और भांजे के नाम पर दो अकाउंट अमर-ज्योति कंपनी में खुलवाए थे। कंपनी फ्रॉड करके भाग गई। भांजे का ऑपरेशन नहीं हो पाया और उसकी मौत हो गई।’ ये कहना है बदायूं के कल्याण सिंह का, जिनका पैसा चिटफंड कंपनी में डूब गया। ये कहानी सिर्फ कल्याण सिंह की नहीं, बल्कि 20 हजार से ज्यादा परिवारों की है। लोगों ने पाई-पाई जोड़कर इस उम्मीद से कंपनी में जमा किया था कि वक्त आने पर यही छोटी-छोटी बचत उनके बड़े काम आएगी। इस मामले में 7 सितंबर को मुख्य आरोपी दो सगे भाई गिरफ्तार हुए हैं। अभी तक 25 से 30 करोड़ रुपए के घोटाले की बात सामने आ रही है, जबकि पीड़ितों और मामले से जुड़े लोगों के बीच यह रकम 200 करोड़ रुपए तक पहुंचने की चर्चा है। अमर ज्योति कंपनी के जाल में फंसे लोगों के लिए नुकसान सिर्फ रुपए का नहीं है। किसी की बेटी की शादी अटक गई है, किसी के घर में इलाज की चिंता है तो कहीं इलाज न मिलने से जान तक चली गई है। लोगों के मन में एक ही सवाल है कि उनकी मेहनत की कमाई आखिर वापस कब मिलेगी? अब सिलसेलवार तरीके से जानिए पूरा मामला… बरेली के शशिकांत मौर्य, उसके भाई सूर्यकांत और श्रीकांत ने 2004 में अमर-ज्योति चिटफंड कंपनी शुरू की थी। 10 साल पहले यह कंपनी बदायूं आई। यहां शहर से मीरा सराय जाने वाले रोड पर ऑफिस बनाया। कंपनी ने 200 लड़कों को कमीशन एजेंट बनाकर बाजार में उतारा। एजेंटंस का काम था- लोगों को कंपनी की पॉलिसी बताकर झांसे में लेना और उनकी कमाई बटोरना। इन लोगों ने गरीब तबके को अपना टारगेट बनाया। हर दिन कमाने-खाने वाले लोगों के लिए बचत करना मुश्किल होता है। एजेंट्स ने इन लोगों को ही बचत के फायदे बताना शुरू किया। छोटी बचत से बड़े सपने पूरे करने का झांसा दिया दिहाड़ी मजदूरी करने वाले लोगों और महिलाओं को बताया गया कि 50-50 रुपए जमा करके भी बड़ी पूंजी बनाई जा सकती है। बीच में अगर जरूरत पड़ी तो इन पैसों को बिना किसी नुकसान के निकाला भी जा सकता है। साथ ही जमा की गई रकम पर बड़ा ब्याज मिलेगा। छोटी बचत से बड़े सपने पूरे होने का झांसा देकर एजेंट्स रोज लोगों से संपर्क करने लगे। किसी ने 50 तो किसी ने 100 रुपए रोजाना की RD (आवर्ती जमा) खुलवाई। धीरे-धीरे जिले के छोटे-छोटे व्यापारी, रोजमर्रा की कमाई करने वाले मजदूर तबके के लोग, घरों में काम करके छोटी सी कमाई करने वाली महिलाओं समेत अधिवक्ता भी इनके जाल में फंसते चले गए। कंपनी 5 साल में रुपए डबल करने और एक साल में 18% ब्याज का झांसा दे रही थी। ब्याज के साथ रुपए मिले तो भरोसा बढ़ने लगा कंपनी में पैसा जमा करने वाले लोगों को लग रहा था कि अभी बचत कर रहे हैं, जो आगे काम आएगी। किसी पिता ने बेटी की शादी के लिए रकम जोड़ी, किसी के भाई के इलाज के लिए पैसा रखा था तो किसी ने पाई-पाई जोड़कर अपने घर का सपना देखा था। लोगों को भरोसा होने लगा था कि उनकी मेहनत की कमाई सुरक्षित है। कंपनी को रफ्तार उस वक्त मिली, जब लोगों को समय पर ब्याज समेत पैसा वापस मिलने लगा। भरोसा बढ़ा तो लोगों ने निवेश बढ़ा दिया। अब लोग खुद कंपनी में अपना खाता खुलवाने ऑफिस तक पहुंचने लगे। जबकि रिकवरी एजेंट दिनभर दुकानों, घरों पर जाकर लोगों से रुपये लेते और पासबुक पर एंट्री करते थे। उसी एंट्री बुक के आधार पर कंपनी की मेन पासबुक महीने के अंत में अपडेट होती थी। रुपए वापसी में टालमटोल से उठा भरोसा साल 2025 की शुरुआत से ही लोगों का पैसा वापस करने में कंपनी टालमटोल करने लगी। कई-कई दिन तक चक्कर लगाने के बाद भी रुपए मिलना बंद हो गया। हालांकि अभी भी लोगों से रुपए जमा कराए जा रहे थे और कंपनी बदायूं में चल रही थी। पैसा वापस न मिलने की चर्चा फैली तो लोगों ने जमा करना बंद कर दिया। अब लोग कैसे भी कंपनी से रुपए निकालना चाह रहे थे। धीरे-धीरे लोगों का भरोसा उठ रहा था। जून 2025 तक लोगों को अहसास हो गया कि उनके साथ ठगी हुई है। ऑफिस से लेकर एसएसपी ऑफिस तक हंगामा हुआ। पुलिस ने शशिकांत एंड ग्रुप पर मुकदमे दर्ज किए। 5 केस बदायूं की सदर कोतवाली में दर्ज हैं। इनमें एक मुकदमे में जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रहे वरिष्ठ अधिवक्ता पवन कुमार गुप्ता और एक में बार के महासचिव रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद परमार वादी हैं। कंपनी ऑफिस बंद करके फरार हो गई। बदायूं से लेकर बरेली तक निवेशक घर और दफ्तरों पर आंदोलन करने लगे। आरोपी हाइकोर्ट की शरण में पहुंचे तो कोर्ट ने भी निवेशकों की रकम वापसी की शर्त पर इन्हें अंतरिम जमानत दे दी। लेकिन, शर्त पूरी न होने पर स्टे ऑर्डर निष्क्रिय हो गया। 7 सितंबर 2026 को STF ने लखनऊ से 2 आरोपी शशिकांत और सूर्यकांत को गिरफ्तार कर लिया। अब पढ़िए पीड़ितों का दर्द… चाय का खोखा लगाने वाले कल्याण सिंह ने बताया, मैंने दो बार कंपनी में पैसा लगाया था और दोनों बार ब्याज के साथ वापस मिल गया। मुझे कंपनी पर भरोसा हो गया था। मेरा भांजा राजेश दुकान में चाय बनाया करता था और रात में वहीं सो जाता था। उसके पैर में गैंगरीन था, जिसका ऑपरेशन होना था। मैंने तीसरी बार फिर से एक आरडी खुलवा दी और राजेश के नाम पर भी आरडी खुलवा दी थी। मुझे लगा ब्याज के साथ रुपए वापस मिलेगा तो भांजे का ऑपरेशन करवा देंगे। अचानक से कंपनी भाग गई। मेरा 72 हजार और भांजे का 28 हजार रुपए डूब गया। रुपए न मिलने से उसका ऑपरेशन नहीं हो पाया और दो महीने पहले मौत हो गई। पैर का ऑपरेशन कराने के लिए जमा की थी पूंजी पान-मसाला की दुकान लगाने वाले सुनील बताते हैं कि कंपनी मेरा 20-22 हजार रुपए लेकर भाग गई। मुझे पैर का ऑपरेशन करवाना था। मेरे पैर में रॉड पड़नी थी, लेकिन कंपनी ने फ्रॉड कर दिया। मोहल्ले के कई लोगों के साथ धोखा हुआ। सबके साथ मैंने भी एप्लीकेशन दी थी। 300 से 400 अधिवक्ता भी बने थे शिकार जिला बार एसोसिएशन के पूर्व महासचिव अरविंद परमार भी इस ठगी का शिकार बने थे। उन्होंने बताया, कंपनी लोगों का पैसा डेली, वीकली और मंथली रूप से जमा करती थी। ब्याज के साथ रुपए वापस करने की सीमा 1-2 या 5 साल होती थी। करीब 20 साल से यह कंपनी काम कर रही थी। इसमें करीब 250 एजेंट काम कर रहे थे। लोगों को जब भरोसा हो गया कि हमारे पैसे ब्याज सहित मिल रहे हैं तो पिछली साल अप्रैल में यह कंपनी यहां से भाग गई। 300 से 400 वकील और 15 से 20 हजार लोग इनका शिकार बने। शहर के ठेले वाले, खोमचे वाले, घरों में काम करने वाली महिलाएं, दिहाड़ी वाले और आपके व्यापारी वर्ग के लोग थे, जिनके पैसे इस कंपनी में इन्वेस्ट थे। हम लोगों ने फिर इस कंपनी के खिलाफ मुकदमे लिखाए, जिसमें बदायूं में 5 FIR दर्ज हैं। उनमें से एक में मैं खुद वादी हूं। यहां से लेके हाईकोर्ट तक हम लोगों ने लड़ाई लड़ी। एसएसपी से दो दिन पहले मुलाकात करके यह मांग की थी कि जो शेष मुकदमे हैं, उनमें चार्जशीट लगाई जाए, जिससे इनके खिलाफ कार्रवाई हो। अब तक 10 लोगों की गिरफ्तारी 6 जून, 2025 को इस मामले के 4 एजेंट गिरफ्तार किए गए। इनमें विजेंद्र मौर्य, कमल बाबू मौर्य, अवनीश कुमार मौर्य और अरविंद मौर्य शामिल थे। 15 जून 2025 को 3 एजेंट और पकड़े गए। इनमें शोभित कुमार वर्मा, नवीन शर्मा और अमित साहू शामिल हैं। अप्रैल में पुलिस ने एक एजेंट को पकड़ा। 7 सितंबर 2026 को दोनों भाई गिरफ्तार किए गए। अब तक कुल 10 गिरफ्तारी हुई हैं। पुलिस ने पीठ थपथपाई, लेकिन सवाल बरकरार अमर ज्योति चिटफंड घोटाले में आरोपियों तक पहुंचने के लिए पूरा सिस्टम जुटा, लेकिन जांच की सबसे अहम कड़ी अब भी अनसुलझी है। घोटालेबाजों ने अब तक कुछ कुबूल नहीं किया है। चर्चा ये भी है कि आरोपियों की गिरफ्तारी सुनियोजित ढंग से की गई, जिससे उन्हें राहत मिल सके और पुलिस पर बना दबाव कम हो। आरोप है कि हायर लेवल के अफसरों की सरपरस्ती में यह पूरा खेल हुआ। एसटीएफ और पुलिस ने कुछ आरोपियों को गिरफ्तार कर अपनी पीठ थपथपा ली, लेकिन उनके तीसरे भाई, बेटे और पत्नी तक का पता नहीं लगा सके हैं। करोड़ों के घोटाले में आरोपियों की कहां-कहां संपत्तियां हैं, निवेशकों का पैसा किस रास्ते गया और उससे क्या-क्या खरीदा गया, इसका भी कोई डेटा सामने नहीं आया। शिकायतों के साथ बढ़ सकती है ठगी की रकम SSP अंकिता शर्मा ने बताया कि STF नोएडा और बदायूं पुलिस ने 50-50 हजार के आरोपी सूर्यकांत और शशिकांत को लखनऊ से गिरफ्तार किया है। आरोपी 2004 से अमर ज्योति जैसी विभिन्न फर्जी कंपनियों के जरिए लोगों को कम समय में पैसा दोगुना करने का लालच देकर ठगी करते थे और 2025 में पैसे लेकर फरार हो गए थे। आरोपियों पर बदायूं में 5 और बरेली 4 मुकदमे दर्ज हैं। अब तक 30 करोड़ से ज्यादा की ठगी का मामला सामने आया है, जिसकी रकम नई शिकायतों के साथ बढ़ सकती है। —————- यह खबर भी पढ़िए… यूपी में कांग्रेस का टिकट चाहिए तो 20 लाख दिखाओ:2027 चुनाव में पार्टी फंड बंद; जीतने वाले को 40 लाख ‘इनाम’ 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अपने प्रत्याशियों को चुनाव लड़ने के लिए पार्टी फंड नहीं देगी। टिकट का दावेदार चुनाव लड़ने में आर्थिक रूप से कितना सक्षम है, अब यह भी देखा जाएगा। टिकट की दावेदारी करने वाले व्यक्ति को अपने खाते में करीब 20 लाख रुपए दिखाने होंगे। पार्टी का मानना है कि जो व्यक्ति अपने चुनाव अभियान की शुरुआत में खुद खर्च करने की स्थिति में नहीं होगा, उसके लिए मजबूती से चुनाव लड़ना भी मुश्किल हो सकता है। पढ़ें पूरी खबर…

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