बक्सर सांसद ने लोकसभा अध्यक्ष को लिखा पत्र:IPS ने भेजा था 5 करोड़ का मानहानि नोटिस, संसदीय विशेषाधिकार के उल्लंघन की जांच मांगी

बक्सर सांसद ने लोकसभा अध्यक्ष को लिखा पत्र:IPS ने भेजा था 5 करोड़ का मानहानि नोटिस, संसदीय विशेषाधिकार के उल्लंघन की जांच मांगी

बक्सर के सांसद सुधाकर सिंह ने बिहार के IPS अधिकारी कुंदन कृष्णन की ओर से भेजे गए 5 करोड़ रुपये के मानहानि नोटिस को लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखा है। सांसद ने इसे संसदीय दायित्वों में बाधा डालने की कोशिश बताते हुए मामले की जांच कराने की मांग की है। भारत भूषण तिवारी की मौत पर सवाल उठाने के बाद मिला नोटिस यह नोटिस भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में भारत भूषण तिवारी की संदिग्ध मौत और कथित फर्जी मुठभेड़ को लेकर सवाल उठाने के बाद मिला था। नोटिस में माफी मांगने और ऐसा नहीं करने पर 5 करोड़ रुपये का मानहानि वाद दायर करने की चेतावनी दी गई है। सुधाकर सिंह ने अपने पत्र में संविधान के अनुच्छेद 105 का हवाला देते हुए कहा कि संसद सदस्यों को सदन में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्राप्त है। उन्होंने मांग की है कि मामले की जांच केवल निचले स्तर के पुलिसकर्मियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि तत्कालीन पुलिस कमान और वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। कुंदन कृष्णन उस समय बिहार एसटीएफ के महानिदेशक थे। विशेषाधिकार समिति को मामला भेजने की मांग सांसद ने लोकसभा अध्यक्ष से मामले की जांच कराने और प्रथमदृष्टया आधार मिलने पर इसे विशेषाधिकार समिति के पास भेजने का अनुरोध किया है। उन्होंने बिहार सरकार से यह जानकारी मांगने की भी अपील की है कि संबंधित अधिकारी ने मानहानि नोटिस भेजने के लिए सरकारी अनुमति ली थी या नहीं और इसके लिए किस प्रावधान का इस्तेमाल किया गया। निजी विधि फर्म की भूमिका पर भी सवाल सुधाकर सिंह ने नोटिस भेजने में इस्तेमाल की गई निजी विधि फर्म की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा है कि क्या बिहार सरकार ने संबंधित फर्म को अपनी ओर से पक्ष रखने का अधिकार दिया था। यदि ऐसा प्राधिकरण जारी किया गया था, तो उसका आदेश और दायरा स्पष्ट किया जाना चाहिए। इसके अलावा, सांसद ने संबंधित सक्षम प्राधिकारियों से मामले की न्यायिक जांच की मौजूदा स्थिति और उसके निष्कर्षों को सार्वजनिक करने के संबंध में जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की है। सुधाकर सिंह ने लोकसभा अध्यक्ष से निर्वाचित प्रतिनिधियों की स्वतंत्रता और संसद की गरिमा की रक्षा के लिए उचित कदम उठाने की अपील की है। फिलहाल, इस मामले में कुंदन कृष्णन का पक्ष उपलब्ध नहीं है। मानहानि नोटिस की वैधता और संसदीय विशेषाधिकार से जुड़े सवालों पर अंतिम स्थिति संबंधित कानूनी प्रक्रिया और सक्षम प्राधिकारियों के निर्णय से स्पष्ट होगी। बक्सर के सांसद सुधाकर सिंह ने बिहार के IPS अधिकारी कुंदन कृष्णन की ओर से भेजे गए 5 करोड़ रुपये के मानहानि नोटिस को लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखा है। सांसद ने इसे संसदीय दायित्वों में बाधा डालने की कोशिश बताते हुए मामले की जांच कराने की मांग की है। भारत भूषण तिवारी की मौत पर सवाल उठाने के बाद मिला नोटिस यह नोटिस भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में भारत भूषण तिवारी की संदिग्ध मौत और कथित फर्जी मुठभेड़ को लेकर सवाल उठाने के बाद मिला था। नोटिस में माफी मांगने और ऐसा नहीं करने पर 5 करोड़ रुपये का मानहानि वाद दायर करने की चेतावनी दी गई है। सुधाकर सिंह ने अपने पत्र में संविधान के अनुच्छेद 105 का हवाला देते हुए कहा कि संसद सदस्यों को सदन में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्राप्त है। उन्होंने मांग की है कि मामले की जांच केवल निचले स्तर के पुलिसकर्मियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि तत्कालीन पुलिस कमान और वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। कुंदन कृष्णन उस समय बिहार एसटीएफ के महानिदेशक थे। विशेषाधिकार समिति को मामला भेजने की मांग सांसद ने लोकसभा अध्यक्ष से मामले की जांच कराने और प्रथमदृष्टया आधार मिलने पर इसे विशेषाधिकार समिति के पास भेजने का अनुरोध किया है। उन्होंने बिहार सरकार से यह जानकारी मांगने की भी अपील की है कि संबंधित अधिकारी ने मानहानि नोटिस भेजने के लिए सरकारी अनुमति ली थी या नहीं और इसके लिए किस प्रावधान का इस्तेमाल किया गया। निजी विधि फर्म की भूमिका पर भी सवाल सुधाकर सिंह ने नोटिस भेजने में इस्तेमाल की गई निजी विधि फर्म की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा है कि क्या बिहार सरकार ने संबंधित फर्म को अपनी ओर से पक्ष रखने का अधिकार दिया था। यदि ऐसा प्राधिकरण जारी किया गया था, तो उसका आदेश और दायरा स्पष्ट किया जाना चाहिए। इसके अलावा, सांसद ने संबंधित सक्षम प्राधिकारियों से मामले की न्यायिक जांच की मौजूदा स्थिति और उसके निष्कर्षों को सार्वजनिक करने के संबंध में जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की है। सुधाकर सिंह ने लोकसभा अध्यक्ष से निर्वाचित प्रतिनिधियों की स्वतंत्रता और संसद की गरिमा की रक्षा के लिए उचित कदम उठाने की अपील की है। फिलहाल, इस मामले में कुंदन कृष्णन का पक्ष उपलब्ध नहीं है। मानहानि नोटिस की वैधता और संसदीय विशेषाधिकार से जुड़े सवालों पर अंतिम स्थिति संबंधित कानूनी प्रक्रिया और सक्षम प्राधिकारियों के निर्णय से स्पष्ट होगी।  

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