सीतापुर में जेबी दारूका पेपर मिल, कटीली के मजदूरों का बकाया वेतन नहीं मिलने पर बुधवार दोपहर करीब 2: 30 बजे मामला गरमा गया। करीब एक करोड़ रुपये के भुगतान की मांग को लेकर मजदूर लखनऊ पैदल मार्च करने के लिए गल्ला मंडी गेट पहुंचे। हालांकि, पुलिस-प्रशासन ने उन्हें लखनऊ जाने से रोक दिया। इसके बाद किसान नेता पिंदर सिंह सिद्धू के नेतृत्व में मजदूरों ने मिल मालिकों के खिलाफ कार्रवाई और बकाया वेतन दिलाने की मांग उठाई। मजदूरों ने मामले में तहरीर भी दी है। मजदूरों की अगुवाई कर रहे किसान नेता पिंदर सिंह सिद्धू ने बताया कि पेपर मिल बंद होने के कारण करीब 115 श्रमिकों का तीन महीने का वेतन बकाया है। किसी मजदूर का 25 हजार तो किसी का 30 हजार रुपये भुगतान होना है। कुल बकाया करीब एक करोड़ रुपये बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी शासन-प्रशासन के हस्तक्षेप और सिटी मजिस्ट्रेट के यहां समझौते के बावजूद मजदूरों को पूरा भुगतान नहीं मिला। अधिकारियों के सामने कई बार आश्वासन दिए गए, लेकिन वादे पूरे नहीं हुए। मालिकों को तत्काल कुछ भुगतान करना चाहिए सिद्धू के मुताबिक, मिल मालिकों के बीच आपसी विवाद के कारण मिल बंद है। अब मालिकों की ओर से मिल बेचने की बात कही जा रही है। उनका कहना है कि बिक्री की रकम मिलने पर पहले बैंक और फिर मजदूरों का भुगतान किया जाएगा। किसान नेता ने सवाल उठाया कि जब मजदूरों ने काम किया है तो उनकी मेहनत की कमाई के लिए उन्हें इंतजार क्यों करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि मजदूरों के घरों में दिवाली पर भी चूल्हा और दीपक जल सके, इसके लिए मिल मालिकों को तत्काल कुछ भुगतान करना चाहिए। प्रशासन की ओर से जल्द भुगतान कराने का आश्वासन मिलने के बाद लखनऊ पैदल मार्च स्थगित कर दिया गया। हालांकि, किसान नेता ने स्पष्ट किया कि मजदूरों की ओर से तहरीर दी गई है और मुकदमा दर्ज होने के बाद ही वे अपने घर लौटेंगे। मजदूरों ने बकाया वेतन दिलाने और जिम्मेदार मिल मालिकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

