अयोध्या जिले के बीकापुर और रुदौली विधानसभा क्षेत्रों के बीच सियासी खींचतान के चलते नैपुरा पंप हाउस का लोकार्पण विवादों में उलझ गया है।निर्माण कार्य पूरा होने के बावजूद शिलापट पर विधानसभा क्षेत्र के नाम को लेकर शुरू हुए विवाद ने लोकार्पण कार्यक्रम को टाल दिया है। दरअसल, पंप हाउस का नाम रुदौली विधानसभा क्षेत्र के नैपुरा गांव के नाम पर रखा गया है, लेकिन इसकी भौगोलिक स्थिति बीकापुर विधानसभा क्षेत्र के सोहावल तहसील अंतर्गत रामनगर धौरहरा में है। इसी को लेकर अब दोनों क्षेत्रों में श्रेय लेने की होड़ मची हुई है। ग्रामीणों के अनुसार 25 सितंबर को जल संसाधन मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह के हाथों पंप हाउस का लोकार्पण होना था। इसके लिए शिलापट लगाने का स्ट्रक्चर भी तैयार कर लिया गया था। लेकिन जब शिलापट में पंप हाउस को रुदौली तहसील में दर्शाया गया तो बीकापुर क्षेत्र के ग्रामीणों ने कड़ा विरोध जताया, जिसके बाद कार्यक्रम टल गया। ग्रामीणों का दावा है कि बीकापुर विधायक डॉ. अमित सिंह चौहान की मध्यस्थता से स्थानीय निवासी विवेक सिंह ने अपनी निजी भूमि ग्राम समाज की भूमि से अदला-बदली कराकर पंप हाउस स्थापना का रास्ता साफ किया था। ऐसे में पंप हाउस बीकापुर क्षेत्र में होने के बावजूद शिलापट पर रुदौली का नाम लिखना गलत है। इस पर बीकापुर विधायक डॉ.अमित सिंह चौहान ने कहा कि यह क्रेडिट का मामला नहीं, बल्कि तथ्य का मामला है।यदि पंप हाउस बीकापुर में स्थापित है तो शिलापट पर रुदौली का नाम कैसे आएगा। उन्होंने बताया कि उनके पिता पूर्व सिंचाई मंत्री मुन्ना सिंह चौहान और माता पूर्व विधायक शोभा सिंह चौहान भी इस संबंध में पत्राचार कर चुके हैं। उधर,रुदौली विधायक रामचंद्र यादव भी पंप हाउस के लिए लंबे समय से प्रयासरत रहे हैं,क्योंकि बाढ़ से रुदौली और सोहावल दोनों तहसीलों का बड़ा इलाका प्रभावित होता है।नलकूप खंड बाराबंकी द्वारा निर्मित इस पंप हाउस के चार पंप बाढ़ का पानी उठाकर सरयू में डाल रहे हैं। अधिशासी अभियंता शशांक कुमार ने बताया कि परीक्षण के बाद इसे बाढ़ कार्य खंड को सौंपा जाएगा। बाढ़ कार्य खंड के अधिशासी अभियंता संजय सिंह ने कहा कि अभी लोकार्पण का सवाल ही नहीं, पहले परीक्षण पूरा होना है।

