फरीदाबाद आज से बढ़ा प्रॉपर्टी टैक्स पानी-सीवर बिल का भार:कलेक्टर रेट से तय होगा टैक्स, पानी की खपत- बिना मीटर कनेक्शन पर बढ़ेगा शुल्क

फरीदाबाद आज से बढ़ा प्रॉपर्टी टैक्स पानी-सीवर बिल का भार:कलेक्टर रेट से तय होगा टैक्स, पानी की खपत- बिना मीटर कनेक्शन पर बढ़ेगा शुल्क

फरीदाबाद शहर के लोगों के लिए आज (1 सितंबर) से घर से जुड़े खर्चों में बदलाव होने जा रहा है। नगर निगम क्षेत्र में प्रॉपर्टी टैक्स की गणना अब कलेक्टर रेट के आधार पर की जाएगी। वहीं पानी और सीवर के शुल्क में भी नई दरें आज से लागू होंगी। पानी के शुल्क में करीब 14 साल बाद बदलाव किया गया है । नई व्यवस्था में पानी की खपत के अनुसार शुल्क तय किया गया है। कुछ श्रेणियों में दरें पहले के मुकाबले 200 प्रतिशत तक बढ़ाई गई हैं। कलेक्टर रेट ज्यादा तो प्रॉपर्टी टैक्स भी ज्यादा आज से अब प्रॉपर्टी टैक्स तय करने में संबंधित क्षेत्र का कलेक्टर रेट अहम भूमिका निभाएगा। इसका सीधा असर अलग-अलग कॉलोनियों में रहने वाले समान आकार के मकान मालिकों पर पड़ सकता है। यदि दो इलाकों के कलेक्टर रेट में अंतर है तो समान क्षेत्रफल की संपत्ति का टैक्स भी अलग हो सकता है। अधिक कलेक्टर रेट वाले क्षेत्र में संपत्ति मालिक को दूसरे क्षेत्र के मुकाबले अधिक टैक्स देना पड़ेगा। पानी की खपत बढ़ी तो बिल भी बढ़ेगा नई व्यवस्था में पानी की खपत के हिसाब से शुल्क निर्धारित किया गया है। 500 वर्ग गज तक के घरेलू कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं को 10 किलोलीटर तक मासिक खपत पर कोई पानी शुल्क नहीं देना होगा। 10 से 20 किलोलीटर पानी इस्तेमाल करने पर 6 रुपये प्रति किलोलीटर और 20 से 30 किलोलीटर तक 9.50 रुपये प्रति किलोलीटर की दर रहेगी। 30 किलोलीटर से ज्यादा खपत होने पर 12 रुपये प्रति किलोलीटर शुल्क लिया जाएगा। बिना मीटर कनेक्शन पर नया शुल्क जिन घरों या प्रतिष्ठानों में पानी का मीटर नहीं लगा है, उनके लिए भी नई शुल्क व्यवस्था लागू होगी। ऐसे कनेक्शनों पर पहले करीब 48 रुपये प्रतिमाह औसत शुल्क लिया जाता था। अब कनेक्शन की श्रेणी के अनुसार मासिक शुल्क 175 रुपये से लेकर 870 रुपये तक निर्धारित किया गया है। सीवर शुल्क भी पानी के बिल से जुड़ेगा नई व्यवस्था में घरेलू और व्यावसायिक कनेक्शनों के लिए सीवर शुल्क पानी के बिल का 25 प्रतिशत रखा गया है। ऐसे में पानी की खपत बढ़ने के साथ सीवर शुल्क में भी बढ़ोतरी की गई है। सरकार की ओर से पानी की नई दरें लागू करने के पीछे पानी की खपत को नियंत्रित करने और जल संरक्षण को बढ़ावा देने का तर्क दिया गया है। हालांकि, नई दरों का असर खासतौर पर अधिक पानी इस्तेमाल करने वाले और बिना मीटर वाले उपभोक्ताओं पर ज्यादा पड़ सकता है।

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