जनसुराज पार्टी के सूत्रधार और बांकीपुर विधानसभा से नए विधायक प्रशांत किशोर शुक्रवार को पूर्णिया पहुंचे। यह उनकी पहली चुनावी जीत के बाद पूर्णिया की पहली यात्रा थी। उनकी जीत के बाद पूर्णिया पहुंचने पर जनसुराज पार्टी के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं में खुशी दिखी। शहर में घुसते ही कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी के साथ उनका स्वागत किया। पूर्णिया पहुंचने के बाद प्रशांत किशोर ने स्थानीय पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने पार्टी की संगठनात्मक गतिविधियों, सदस्यता अभियान और आगामी राजनीतिक रोडमैप की समीक्षा की। बैठक में सीमांचल क्षेत्र में पार्टी की पैठ को और मजबूत करने तथा जन-जन तक जनसुराज के विचारों को पहुंचाने की रणनीति पर विस्तृत चर्चा की गई। बिहार में बदलाव की शुरुआत: जनसुराज नेता पार्टी से जुड़े नेताओं ने प्रशांत किशोर की बांकीपुर उपचुनाव में मिली ऐतिहासिक जीत को महज एक विधानसभा की जीत न मानकर बिहार में नई राजनीतिक क्रांति और बदलाव की शुरुआत करार दिया है। स्थानीय नेताओं का कहना है कि जनता अब पारंपरिक राजनीतिक गठबंधनों से इतर एक नए और मजबूत विकल्प को स्वीकार कर रही है। पूर्व सांसद पप्पू सिंह के आवास पर कोर टीम की बैठक अपनी यात्रा के दौरान प्रशांत किशोर जनसुराज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व सांसद उदय सिंह उर्फ पप्पू सिंह के पूर्णिया स्थित आवास पहुंचे। वहां उन्होंने पार्टी की कोर टीम और वरिष्ठ नेताओं के साथ एक अहम बैठक की। कद्दावर नेता रहे हैं पप्पू सिंह उदय सिंह उर्फ पप्पू सिंह पूर्णिया की राजनीति का एक बड़ा नाम रहे हैं। वे भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर पूर्णिया संसदीय सीट से दो बार (2004 और 2009) सांसद रह चुके हैं। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद वे कांग्रेस में शामिल हुए थे और 2019 का चुनाव उन्होंने कांग्रेस के प्रत्याशी के रूप में लड़ा था। इस चुनाव में मिली हार के बाद उन्होंने प्रशांत किशोर की अगुवाई वाले जनसुराज अभियान से जुड़कर नई राजनीतिक पारी शुरू की और बाद में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली। हालांकि, हाल के दिनों में उन्होंने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए कुछ समय के लिए सक्रिय राजनीति से अवकाश लिया था। जनसुराज का मजबूत गढ़ है पूर्णिया सियासी पंडितों की मानें तो बांकीपुर उपचुनाव जीतने के बाद प्रशांत किशोर का पूर्णिया पहुंचना राजनीतिक दृष्टिकोण से काफी मायने रखता है। पूर्णिया और आसपास का सीमांचल इलाका जनसुराज का एक प्रमुख क्षेत्रीय गढ़ माना जाता है। पूर्व सांसद पप्पू सिंह के राजनीतिक जनाधार और प्रशांत किशोर के रणनीतिक कौशल के कारण इस इलाके में पार्टी का सांगठनिक ढांचा काफी मजबूत होने की स्थिति में है। प्रशांत किशोर का यह दौरा सीमांचल में जनसुराज के प्रभाव को और मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। जनसुराज पार्टी के सूत्रधार और बांकीपुर विधानसभा से नए विधायक प्रशांत किशोर शुक्रवार को पूर्णिया पहुंचे। यह उनकी पहली चुनावी जीत के बाद पूर्णिया की पहली यात्रा थी। उनकी जीत के बाद पूर्णिया पहुंचने पर जनसुराज पार्टी के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं में खुशी दिखी। शहर में घुसते ही कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी के साथ उनका स्वागत किया। पूर्णिया पहुंचने के बाद प्रशांत किशोर ने स्थानीय पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने पार्टी की संगठनात्मक गतिविधियों, सदस्यता अभियान और आगामी राजनीतिक रोडमैप की समीक्षा की। बैठक में सीमांचल क्षेत्र में पार्टी की पैठ को और मजबूत करने तथा जन-जन तक जनसुराज के विचारों को पहुंचाने की रणनीति पर विस्तृत चर्चा की गई। बिहार में बदलाव की शुरुआत: जनसुराज नेता पार्टी से जुड़े नेताओं ने प्रशांत किशोर की बांकीपुर उपचुनाव में मिली ऐतिहासिक जीत को महज एक विधानसभा की जीत न मानकर बिहार में नई राजनीतिक क्रांति और बदलाव की शुरुआत करार दिया है। स्थानीय नेताओं का कहना है कि जनता अब पारंपरिक राजनीतिक गठबंधनों से इतर एक नए और मजबूत विकल्प को स्वीकार कर रही है। पूर्व सांसद पप्पू सिंह के आवास पर कोर टीम की बैठक अपनी यात्रा के दौरान प्रशांत किशोर जनसुराज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व सांसद उदय सिंह उर्फ पप्पू सिंह के पूर्णिया स्थित आवास पहुंचे। वहां उन्होंने पार्टी की कोर टीम और वरिष्ठ नेताओं के साथ एक अहम बैठक की। कद्दावर नेता रहे हैं पप्पू सिंह उदय सिंह उर्फ पप्पू सिंह पूर्णिया की राजनीति का एक बड़ा नाम रहे हैं। वे भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर पूर्णिया संसदीय सीट से दो बार (2004 और 2009) सांसद रह चुके हैं। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद वे कांग्रेस में शामिल हुए थे और 2019 का चुनाव उन्होंने कांग्रेस के प्रत्याशी के रूप में लड़ा था। इस चुनाव में मिली हार के बाद उन्होंने प्रशांत किशोर की अगुवाई वाले जनसुराज अभियान से जुड़कर नई राजनीतिक पारी शुरू की और बाद में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली। हालांकि, हाल के दिनों में उन्होंने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए कुछ समय के लिए सक्रिय राजनीति से अवकाश लिया था। जनसुराज का मजबूत गढ़ है पूर्णिया सियासी पंडितों की मानें तो बांकीपुर उपचुनाव जीतने के बाद प्रशांत किशोर का पूर्णिया पहुंचना राजनीतिक दृष्टिकोण से काफी मायने रखता है। पूर्णिया और आसपास का सीमांचल इलाका जनसुराज का एक प्रमुख क्षेत्रीय गढ़ माना जाता है। पूर्व सांसद पप्पू सिंह के राजनीतिक जनाधार और प्रशांत किशोर के रणनीतिक कौशल के कारण इस इलाके में पार्टी का सांगठनिक ढांचा काफी मजबूत होने की स्थिति में है। प्रशांत किशोर का यह दौरा सीमांचल में जनसुराज के प्रभाव को और मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

