प्रयागराज में निकली रावण की भव्य शोभायात्रा:हाथी पर चांदी के सिंहासन पर सवार हुए लंकाधिपति, कटरा में नहीं होता पुतला दहन

प्रयागराज में निकली रावण की भव्य शोभायात्रा:हाथी पर चांदी के सिंहासन पर सवार हुए लंकाधिपति, कटरा में नहीं होता पुतला दहन

प्रयागराज में मंगलवार को लंकाधिपति रावण की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। श्री कटरा रामलीला कमेटी की ओर से महर्षि भरद्वाज आश्रम में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना के बाद शुरू हुई शोभायात्रा में रावण हाथी पर सवार होकर निकले। इस दौरान रजत चौकी पर मंदोदरी और विभिन्न रथों पर कुंभकर्ण, विभीषण व मेघनाद के पात्र सवार रहे। शोभायात्रा महर्षि भरद्वाज आश्रम से शुरू होकर कर्नलगंज, नेतराम चौराहा, पानी की टंकी, कचहरी, कटरा, मनमोहन पार्क होते हुए श्री कटरा रामलीला कमेटी के प्रांगण में पहुंचकर समाप्त हुई। रावण को ननिहाल कटरा इलाका
कटरा रामलीला कमेटी के अनुसार, त्रेतायुग में महर्षि भरद्वाज का आश्रम वर्तमान कटरा क्षेत्र में स्थित था। पौराणिक मान्यताओं के आधार पर रावण को महर्षि भरद्वाज का नाती और कटरा को उनका ननिहाल माना जाता है। इसी वजह से यहां रावण को केवल अधर्म के प्रतीक के रूप में नहीं, बल्कि ऋषिपुत्र, प्रकांड विद्वान, महान तपस्वी और पराक्रमी के रूप में सम्मान दिया जाता है। कमेटी दशहरे पर रावण का पुतला दहन नहीं करती। रामलीला के मंचन में रावण के ज्ञान, तपस्या और पराक्रम वाले पक्ष को प्रमुखता दी जाती है। हाथी पर चांदी के सिंहासन पर निकली रावण शोभायात्रा
पितृपक्ष की एकादशी तिथि पर महर्षि भरद्वाज आश्रम में मंत्रोच्चार से रावण की पूजा होती है। रामदल से पहले रावण की अलौकिक शोभायात्रा निकाली जाती है। अबकी छह अक्टूबर को रावण हाथी पर रखे चांदी के सिंहासन पर आसीन होकर निकले। वहीं, उनकी पत्नी मंदोदरी चांदी की चौकी में बैठीं। ब्राह्मण कलाकार ही निभाते हैं रावण की भूमिका
रावण ब्राह्मण थे। कमेटी की परंपरा के अनुसार रावण की भूमिका ऐसे ब्राह्मण कलाकार को दी जाती है, जिसका आचरण सात्विक हो। कलाकार को मांस और मदिरा का सेवन न करने तथा भविष्य में भी इससे दूर रहने की शपथ लेनी होती है। सभी कसौटियों पर खरा उतरने वाले कलाकार का ही चयन रावण के पात्र के लिए किया जाता है। रावण का महात्म्य
कुबेर लंकापति रावण के भाई और महर्षि भरद्वाज उनके नाना हुए। यही कारण है कि प्रभु श्रीराम लंकेश का वध करके प्रयाग आए तो महर्षि भरद्वाज ने ब्रह्म हत्या करने के कारण उन्हें आशीर्वाद देने से इनकार कर दिया। ब्रह्म हत्या से मुक्ति को श्रीराम ने सवा करोड़ पार्थिव शिवलिंग का अभिषेक किया तब उन्हें आशीर्वाद मिला। रामलीला की शुरुआत 10 अक्टूबर से
कमेटी के पदाधिकारियों ने बताया कि कटरा रामलीला का आगाज पितृपक्ष की एकादशी पर रावण की शोभायात्रा से होता है। इस वर्ष रामलीला का मंचन 10 अक्टूबर से रावण जन्म प्रसंग के साथ शुरू होगा। रावण चांदी के सिंहासन पर और मंदोदरी चांदी की चौकी पर सवार होकर शोभायात्रा में शामिल हुईं।

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