‘टाटा बाय-बाय’ के बाद प्रोफाइल से हटाई PM की फोटो:राज्यसभा सूची आते ही भाजपा की अंदरूनी कलह आई सामने, घर वापसी कर सकते है धर्मेंद्र कश्यप

‘टाटा बाय-बाय’ के बाद प्रोफाइल से हटाई PM की फोटो:राज्यसभा सूची आते ही भाजपा की अंदरूनी कलह आई सामने, घर वापसी कर सकते है धर्मेंद्र कश्यप

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची जारी होते ही उत्तर प्रदेश के बरेली और रुहेलखंड के सियासी हलकों में खुला घमासान शुरू हो गया है। आंवला लोकसभा सीट से पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने पार्टी के फैसले के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया है।
दोपहर में फेसबुक पर महज तीन शब्दों की रहस्यमयी पोस्ट- “टाटा, बाय-बाय…” लिखने के बाद, रात करीब 10 बजे उन्होंने एक और बड़ा सांकेतिक कदम उठाया। धर्मेंद्र कश्यप ने अपने आधिकारिक फेसबुक प्रोफाइल से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ लगी अपनी तस्वीर हटा दी और अपनी एकल फोटो लगा ली। उनके इस कदम के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है और कयास लगाए जा रहे हैं कि वे जल्द ही भाजपा छोड़ समाजवादी पार्टी (सपा) का दामन थाम सकते हैं। खबर से जुड़े 3 अहम बिंदु: लोकसभा में हार के बाद राज्यसभा से बंधी थी उम्मीदें
बीते लोकसभा चुनाव में आंवला सीट से दो बार सांसद रहे धर्मेंद्र कश्यप को सपा उम्मीदवार नीरज मौर्य के हाथों नजदीकी मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा था। हार के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा थी कि रुहेलखंड में कश्यप समाज के बड़े जनाधार को साधे रखने के लिए पार्टी उन्हें संगठन में कोई बड़ा पद देगी या उच्च सदन (राज्यसभा) भेजेगी। इसके अलावा उनकी बेटी कीर्ति कश्यप भी बदायूं की दातागंज विधानसभा सीट पर सक्रिय रहकर जमीन तैयार कर रही थीं। लेकिन राज्यसभा सूची में न तो खुद धर्मेंद्र कश्यप को जगह मिली और न ही परिवार के भविष्य को लेकर कोई सकारात्मक संकेत मिले, जिससे उनकी नाराजगी चरम पर पहुंच गई। सोशल मीडिया पर बवाल: 1000 से ज्यादा कमेंट्स, लिखा- ‘भाजपा में भी परिवारवाद’
धर्मेंद्र कश्यप की पोस्ट आते ही सोशल मीडिया पर उनके समर्थकों की तीखी प्रतिक्रियाएं उमड़ पड़ीं। एक समर्थक ने लिखा- “उचित निर्णय, जो होगा सही होगा।” एक अन्य यूजर ने लिखा- “परिवारवाद के जाल से दूर रहे भारतीय जनता पार्टी, अब इसी कारण से लोग बाहर जाएंगे।” सपा समर्थकों ने भी इस पोस्ट पर खुलकर कमेंट करते हुए लिखा- “स्वागत अभिनंदन, अग्रिम शुभकामनाएं।” बरेली से लखनऊ तक… इस बगावत के 3 बड़े सियासी मायने 1. साइकिल पर सवार होने की चर्चा तेज (घर वापसी):
धर्मेंद्र कश्यप ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत समाजवादी पार्टी से ही की थी और वे सपा से विधायक भी रहे थे। बाद में वे भाजपा में शामिल होकर सांसद बने। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि भाजपा से मोहभंग होने के बाद वे अपनी पुरानी जमीन पर ‘घर वापसी’ कर सकते हैं। 2. रुहेलखंड में भाजपा के ओबीसी वोट बैंक को झटका:
रुहेलखंड की बरेली, बदायूं, पीलीभीत और शाहजहांपुर सीटों पर कश्यप, निषाद बिरादरी की निर्णायक आबादी है। धर्मेंद्र कश्यप इस वर्ग के कद्दावर चेहरे माने जाते हैं। उनके अलग होने से भाजपा के गैर-यादव ओबीसी समीकरण में बड़ी सेंध लग सकती है। 3. अखिलेश के ‘PDA’ फॉर्मूले को मिलेगा बड़ा चेहरा:
सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव लगातार ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के फॉर्मूले पर काम कर रहे हैं। यदि धर्मेंद्र कश्यप सपा का रुख करते हैं, तो बरेली-बदायूं बेल्ट में सपा को कश्यप समाज का एक स्थापित और मजबूत जनाधार वाला नेता मिल जाएगा। इससे करीब एक दर्जन से अधिक विधानसभा सीटों पर फर्क पड़ सकता है।

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *