बज़्म ए अहबाब संस्था के संस्थापक स्व शाकिर हुसैन तशना कानपूरी की याद में करेली स्थित अदब घर में कवियों और शायरों ने यादें ताजा करते हुए रचनाओं से हंसाया और गुदगुदाया। कवि सम्मेलन व मुशायरा में कौमी एकता की झलक देखने को मिली। शाकिर हुसैन तशना के बेटे व वर्तमान अध्यक्ष अमजद हुसैन रावी ने सभी का स्वागत किया। असरार नियाज़ी की अध्यक्षता व बख्तियार युसूफ के संचालन में शायराना महफ़िल सजी। पांच लोगों को स्व तशना कानपूरी सम्मान से सम्मानित किया गया।
दस लोगों को बज़्म ए अहबाब संस्था का प्रशस्ति-पत्र देकर उनका उत्साह बढ़ाया गया। शायर असलम इलाहाबादी, फरमूद इलाहाबादी, वाक़िफ अंसारी, डॉ क़मर आब्दी, डॉ मोहम्मद शाहिद खान, असलम निज़ामी, सुनील दानिश, डॉ राहुल शुक्ला, राम लखन चौरसिया, शाहिद सफर, सुहैल अख्तर व कार्यक्रम आयोजक अमजद हुसैन रावी ने बेहतरीन अशआरो व उत्कृष्ट रचनाओं से श्रोताओं को बांधे रखा।
इक़बाल माहिर व शाकिर हुसैन तशना की शायरी व उर्दू अदब के लिए किए योगदान की सराहना की गई।
असरार नियाज़ी ने कहा इक़बाल माहिर व तशना कानपूरी ने अपनी शायरी मेयार को जो बुलंदी बख्शी वह आज के दौर के शायरों के लिए मोतियों में पिरोकर रखने जैसी है। आसिफ उस्मानी, शहाब हनफी, मोईन हबीबी, असद कुरैशी, सैय्यद मोहम्मद अस्करी, असद हुसैन ताबी, महमूद खान, मोहम्मद शारिक़ आदि मौजूद रहे।

