पुलिस की प्रताड़ना से 3 दिन सो नहीं पाया इंजीनियर:क्राइम ब्रांच,मोबाइल डेटा लीक और FIR का डर दिखाया; गाड़ी में बैठाकर ले गए

पुलिस की प्रताड़ना से 3 दिन सो नहीं पाया इंजीनियर:क्राइम ब्रांच,मोबाइल डेटा लीक और FIR का डर दिखाया; गाड़ी में बैठाकर ले गए

क्राइम ब्रांच के तत्कालीन टीआई सुजीत श्रीवास्तव, एक कॉन्स्टेबल, ड्राइवर और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस की FIR के बाद मामले में कई नए तथ्य सामने आए हैं। ‘दैनिक भास्कर’ की पड़ताल और जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक जिस महिला ने लोकायुक्त पुलिस को शिकायत है उसका बेटा पेशे से आईटी इंजीनियर है। उस पर मोबाइल डेटा लीक होने, बैंक खाते से संदिग्ध ट्रांजिक्शन और FIR का डर दिखाकर लगातार दबाव में रखा गया।
आरोप है कि उसे कई बार गाड़ी में बैठाकर ले जाया गया और कुछ मौकों पर उसका मोबाइल भी अपने पास रख लिया गया। केस का एक अलग पहलू यह कि पीड़ित इंजीनियर का दो हफ्ते पहले इंदौर बायपास पर एक्सीडेंट हो गया। इसके सिर, पैर सहित अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें लगी है और ICU में एडमिट है। वह बात करने की स्थिति में भी नही है। शुरुआती दिनों में युवक इतना परेशान हो गया था कि करीब तीन दिन तक ठीक से सो नहीं पाया। रुपए का इंतजाम करने के लिए उसके पास करीब सात बार फोन आए। युवक के व्यवहार में बदलाव देखकर परिवार को शक हुआ। बातचीत में पूरी बात सामने आने के बाद उसकी मां ने 2 अप्रैल को लोकायुक्त पुलिस से शिकायत की। सबसे पहले 3 एआई तस्वीरों में देखिए प्रताड़ना… ऐसे बढ़ता गया दबाव जांच सहित अन्य सूत्रों के मुताबिक मार्च के आखिरी 3-4 दिन में शुरुआत में घटनाक्रम की शुरुआत हुई। इंजीनियर के पास टीआई से जुड़े लोगों के फोन आने शुरू हुए। उसे शिकायत और कथित जांच के नाम पर दबाव में लिया गया। इसके लिए जबर्दस्त मनोवैज्ञानिक तरीके से प्रेशर बनाया गया। मोबाइल और बैंक खाते का डर : युवक से कहा गया कि उसके मोबाइल नंबर और बैंक अकाउंट से संदिग्ध ट्रांजिक्शन हुए हैं। मोबाइल का डेटा लीक होने की बात कहकर उसे डराया गया। FIR और परिवार को बताने की धमकी : उसे कहा जाता था कि मामला सामने आने पर FIR दर्ज हो सकती है और इसकी जानकारी उसके परिवार तक पहुंच जाएगी। उसे परिवार को भी कुछ नहीं बताने के लिए कहा गया।
गाड़ी में बैठाकर ले जाने का आरोप : सूत्रों के मुताबिक तत्कालीन टीआई सुजीत श्रीवास्तव युवक को कई बार अपनी गाड़ी में बैठाकर ले जाते थे। कुछ मौकों पर उसे गाड़ी में ही रोककर रखा गया। उसका मोबाइल भी अपने पास लेने की बात सामने आई है।
अधिकारी के नाम पर रुपए मांगने के आरोप : टीआई से जुड़े बताए जा रहे दो अन्य लोगों के युवक के पास फोन आते थे। वे कहते थे कि रुपए दे दो, अधिकारी ने रकम मांगी है। ऐसे लोगों से करीब 4-5 बार बातचीत हुई।
रुपयों के इंतजाम के लिए करीब 7 कॉल : परिवार को मामले की जानकारी मिलने से पहले युवक पर रकम जुटाने का लगातार दबाव बनाया गया। इसी दौरान उसे करीब सात बार फोन आने की बात सामने आई।
तीन दिन तक नहीं सो पाया : लगातार फोन और दबाव के कारण युवक बेहद परेशान हो गया था। परिवार ने उसके व्यवहार में बदलाव देखा तो पूछताछ की, जिसके बाद पूरा घटनाक्रम सामने आया। कॉल रिकॉर्डिंग समेत तकनीकी साक्ष्य जुटाए परिवार ने युवक के पास आए कुछ फोन कॉल की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी। रकम के लेन-देन से जुड़े स्क्रीन शॉट्स दस्तावेज और अन्य तकनीकी साक्ष्य भी जुटाए गए। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर लोकायुक्त पुलिस से संपर्क किया गया। सूत्रों के मुताबिक लोकायुक्त की कोशिश थी कि सभी संबंधित लोगों को रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ा जाए, लेकिन परिस्थितियां ऐसी नहीं बन सकीं। इसके बाद जांच के दौरान टीआई के नजदीकी बताए जा रहे व्यक्ति के खाते में UPI के जरिए रकम ट्रांसफर होने और बाकी राशि नकद दिए जाने से जुड़े साक्ष्य जुटाए गए। साढ़े चार महीने चली तकनीकी जांच शिकायत के बाद लोकायुक्त पुलिस ने उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों का सत्यापन किया। कॉल डिटेल, लेन-देन और अन्य तथ्यों से कड़ियां जोड़ने में जांच एजेंसी को करीब साढ़े चार महीने लगे। इसके बाद 24 अगस्त को क्राइम ब्रांच के तत्कालीन टीआई सुजीत श्रीवास्तव, कॉन्स्टेबल विकास सेंधव, निजी ड्राइवर अभय सिंह और निजी व्यक्ति दीपक पटेल के खिलाफ केस दर्ज किया गया। लोकायुक्त ने आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम की धारा 7 और BNS की धारा 61(2) के तहत प्रकरण दर्ज किया है। अब विवेचना में रिश्वत की मांग, रकम के लेन-देन और प्रत्येक आरोपी की भूमिका की जांच की जा रही है। एक्सीडेंट के बाद युवक अस्पताल में, बात करने की स्थिति में नहीं संबंधित युवक आईटी इंजीनियर है। वह पहले अमेरिका में रहकर नौकरी कर चुका है और फिलहाल भारत से ही एक विदेशी कंपनी के लिए ऑनलाइन काम करता है। घटना के बाद 13 अगस्त को इंदौर में बायपास स्थित फीनिक्स मॉल के पास उसका एक्सीडेंट हो गया। हादसे में सिर, पैर समेत शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं। फिलहाल वह बातचीत करने की स्थिति में नहीं है। ये खबर भी पढ़ें… इंदौर क्राइम ब्रांच के तत्कालीन TI सहित 4 पर FIR इंदौर क्राइम ब्रांच के तत्कालीन टीआई, एक कॉन्स्टेबल समेत चार लोगों के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस ने FIR दर्ज की है। इन पर एक महिला के बेटे को छोड़ने के ऐवज में 1.20 लाख रुपए की रिश्वत लेने के आरोप हैं। महिला के बेटे को उसके खिलाफ शिकायत के सिलसिले में क्राइम ब्रांच कार्यालय बुलाया गया था। उस पर कार्रवाई नहीं करने और छोड़ने के एवज में रिश्वत की मांग की गई थी।पूरी खबर पढ़ें

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