पीलीभीत में 17 साल पुराने मारपीट के मामले में कोर्ट ने श्यामाचरन को दोषी करार देते हुए एक साल जेल और एक हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। मामला 43 रुपए की दिहाड़ी को लेकर हुए विवाद से जुड़ा था। आरोपी का यह पहला अपराध होने के कारण उसे यूपी फर्स्ट ऑफेंडर एक्ट के तहत प्रोबेशन का लाभ दिया गया और सजा एक साल के लिए टाल दी गई। 2009 में मजदूरी को लेकर हुआ था विवाद घटना 8 अप्रैल 2009 की है। लिलहर गांव निवासी पुत्तूलाल ने शिकायत दी थी कि श्यामाचरन और उसके साथियों ने उनके बेटे लक्ष्मण पर 43 रुपए दिहाड़ी पर काम करने का दबाव बनाया था। लक्ष्मण के मना करने पर उसके साथ मारपीट की गई। पुलिस ने मामले में श्यामाचरन और सोनकली के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। मुकदमे की सुनवाई के दौरान सोनकली की मौत हो गई। सिर्फ मारपीट का दोष सिद्ध कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर श्यामाचरन को भारतीय दंड संहिता की धारा 323 के तहत मारपीट का दोषी माना। बाकी आरोपों में उसे बरी कर दिया गया। कोर्ट ने एक साल की सजा और एक हजार रुपए जुर्माना लगाया। पहले अपराध और अन्य परिस्थितियों को देखते हुए उसे यूपी फर्स्ट ऑफेंडर एक्ट के तहत प्रोबेशन का लाभ दिया गया।

