पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में वायु प्रदूषण और पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में याचिका दायर की गई है। मे. पेन्सोल इंडस्ट्रीज लि. और गुजरात अंबुजा एक्सपोर्टस लि. ने मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें पहले जारी किए गए क्लोजर आदेश को वापस लेकर संबंधित स्टील इकाई को कुछ शर्तों के साथ दोबारा संचालन की अनुमति दी गई थी। याचिकाकर्ताओं ने 16 जून 2026 के आदेश को चुनौती देते हुए मांग की है कि 8 मई को जारी क्लोजर आदेश को फिर से प्रभावी किया जाए और जब तक सभी जरूरी प्रदूषण नियंत्रण प्रणालियां स्थापित नहीं होतीं, तब तक संबंधित इकाई का संचालन रोका जाए। पहले शिकायतें मिलीं, फिर बोर्ड ने किया निरीक्षण याचिका के मुताबिक संबंधित स्टील इकाई पीथमपुर के सेक्टर-III में स्थित है और इंडक्शन फर्नेस के जरिए TMT स्टील बार और रॉड का निर्माण करती है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि अप्रैल 2024 में व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने के बाद से इकाई से धुआं, धूल, फ्यूम्स और सूक्ष्म कणों का उत्सर्जन हो रहा था। इस संबंध में 1 मई और 6 मई 2024 को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी के समक्ष शिकायतें भी की गई थीं। अप्रैल 2026 में दो बार निरीक्षण प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने संबंधित इकाई का 14 अप्रैल और 28 अप्रैल 2026 को निरीक्षण किया। याचिका में दावा किया गया है कि दोनों निरीक्षणों में प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी कमियां सामने आईं। विशेष रूप से दोनों इंडक्शन फर्नेस के लिए जरूरी डॉग हाउस टाइप फ्यूम एक्सट्रैक्शन सिस्टम स्थापित नहीं पाया गया। इसके अलावा निरीक्षण के दौरान फ्यूजिटिव एमिशन की स्थिति भी दर्ज किए जाने का दावा किया गया है। 8 मई को बोर्ड ने जारी किया था क्लोजर आदेश निरीक्षण में मिली कमियों के आधार पर मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 8 मई 2026 को वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 की धारा 31ए के तहत क्लोजर आदेश जारी किया था। इस आदेश में संबंधित इकाई का उत्पादन तत्काल बंद करने और बिजली आपूर्ति काटने के निर्देश दिए गए थे। क्लोजर के बाद भी संचालन का आरोप याचिकाकर्ताओं ने दावा किया है कि क्लोजर आदेश जारी होने के बावजूद 9 मई 2026 से यूनिट का संचालन जारी रहा। इसके समर्थन में CCTV फुटेज और वीडियो रिकॉर्डिंग होने का दावा किया गया है। याचिका के मुताबिक बिजली कनेक्शन भी नहीं काटा गया। याचिकाकर्ताओं ने अधिकारियों को वीडियो और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य उपलब्ध कराने की बात भी कही है। 16 जून को क्लोजर आदेश वापस लिया याचिका के अनुसार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव ने 16 जून 2026 को पहले जारी क्लोजर आदेश को वापस ले लिया। इसके बाद संबंधित उद्योग को पर्यावरणीय नियंत्रण से जुड़े जरूरी कार्य 31 जुलाई 2026 तक पूरे करने की अनुमति दी गई। इसके लिए 17.62 लाख रुपए की बैंक गारंटी जमा करने की शर्त रखी गई थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि केवल बैंक गारंटी जमा करना प्रदूषण नियंत्रण उपकरण स्थापित करने और पर्यावरणीय मानकों का वास्तविक अनुपालन सुनिश्चित करने का विकल्प नहीं हो सकता। पड़ोसी उद्योगों के उत्पादों में बाहरी कण मिलने का दावा याचिका में आरोप लगाया गया है कि संबंधित इकाई से निकलने वाले धूल और सूक्ष्म कणों के कारण आसपास की औद्योगिक इकाइयों को भी परेशानी हुई। पेन्सॉल इंडस्ट्रीज ने अपने ग्रीस उत्पादों में बाहरी कण पाए जाने की ग्राहकों की शिकायतों और लैब टेस्ट रिपोर्ट का हवाला दिया है। याचिका में दावा किया गया है कि इससे कंपनी के उत्पाद प्रभावित हुए और उसे आर्थिक नुकसान के साथ प्रतिष्ठा संबंधी नुकसान भी उठाना पड़ा। इसके अलावा कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की बात याचिका में कही गई है। हाईकोर्ट से क्या मांग की गई? याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट से मुख्य रूप से ये मांगें की हैं पर्यावरणीय मानकों के पालन का मुद्दा याचिका में संविधान के अनुच्छेद 226/227 के साथ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 5 और वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 की धारा 31ए सहित विभिन्न कानूनी प्रावधानों का उल्लेख किया गया है। याचिका एडवोकेट अभिनव पी. धनोतकर के माध्यम से प्रस्तुत की गई है। फिलहाल याचिका में लगाए गए प्रदूषण संबंधी आरोप न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं।

