पिता ने तीन बच्चों को 7 घंटे बंधक बनाया:आजमगढ़ SP से बोला- पास आए तो सबको भून दूंगा, बेटी के लिए चॉकलेट मंगवाई; बेटे को गोली मारी

पिता ने तीन बच्चों को 7 घंटे बंधक बनाया:आजमगढ़ SP से बोला- पास आए तो सबको भून दूंगा, बेटी के लिए चॉकलेट मंगवाई; बेटे को गोली मारी

आजमगढ़ में पत्नी–बेटे और दो पुजारियों की हत्या करने वाले अरविंद के घर में चार दिन से महामृत्युंय का पाठ हो रहा था। अरविंद इसका विरोध कर रहा था। मंगलवार को पूजा खत्म होने के बाद उसने पुजारियों से आधार कार्ड मांगा। इसी बात को लेकर विवाद शुरू हुआ। उसने अपने तीन बच्चों को 7 घंटे तक बंधक बनाए रखा। एक–एक कर पुलिस–प्रशासन के सामने डिमांड करता रहा और सभी की मौजूदगी में अपने बेटे को गोली मार दी। पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। ऐसे में ATS, SOG और पुलिस की जवाबी कारवाई में वो खुद मारा गया। विवाद कैसे-कैसे आगे बढ़ा। 7 घंटे तक बच्चे उसके कब्जे में कैसे रहे। पुलिस ने पूरे ऑपरेशन को कैसे अंजाम दिया? पढ़िए पूरी रिपोर्ट- अरविंद की मां कमला को लगता था कि घर में भूत का साया। इसी वजह से अरविंद का मानसिक संतुलन ठीक नहीं है। घर में सुख-शांति और अरविंद के लिए घर में महामृत्युंय जाप का पाठ शुरू कराया। पाठ करने के लिए पंडित महेंद्र पाठक (60), अखिलेश मिश्रा (55), उनके बेटे हिमांशु समेत 4 पंडितों को बुलाया गया। गांव के गोलू सिंह ने बताया कि पहले दिन से अरविंद पूजा का विरोध कर रहा था। सोमवार को भी अरविंद ने पूजा का विरोध किया था। तब भी पुलिस आई थी और उसे समझाकर चली गई थी। मंगलवार को पूजा का अंतिम दिन था। शाम के करीब 5.30 बजे थे। महामृत्युंज पाठ की आरती होने के बाद पंडित लोग पूर्णाहुति की तैयारी कर रहे थे। गांव के लोग प्रसाद लेकर अपने घर जाने लगे थे। इसी बीच अरविंद पहुंचा। उसने पंडितों से आधार कार्ड मांगा। कहा- आप लोग कहां से आए हैं, कौन है, इसकी जानकारी हमें चाहिए। पंडित बोले–बाबू साहब! हम लोग पुजारी हैं, हम लोग आधार कार्ड क्यों लेके घूमेंगे? फेरी वाले तो हैं नहीं कोई? नेपाल या बांग्लादेश से तो नहीं आए हैं? यह सुनते ही अरविंद भड़क गया। उसने पंडितों को फटकारा और अपने घर से भगाने लगा। बोला- यहां से फौरन भाग जाओ, वरना पीट दूंगा। यह सुनते ही उसकी पत्नी बबिता गुस्से में उसके सामने आई। बोली कि ये तुम क्या बोल रहे हो। पंडितों का अपमान करना ठीक नहीं है।
यह बात सुनकर अरविंद पत्नी से विवाद करने लगा। गुस्से में रिवाल्वर निकाली और पत्नी के सिर पर मार दिया। पत्नी के जमीन पर गिरते ही पंडित भागने लगे। पंडित महेंद्र पाठक उठकर पूजा स्थल से 5 कदम दूर ही भाग पाए थे कि अरविंद ने दौड़कर दूसरी गोली उनके सिर में मारी। इसके बाद अखिलेश मिश्रा और उनका बेटा हिमांशु घर के मेन गेट पर पहुंच गए और उसे खोलने लगे। तभी पीछे से चिल्लाता हुआ अरविंद दौड़ता हुआ आया। उसे गुस्से में देखकर हिमांशु घर की दीवार कूदकर बाहर भाग गया। जबकि उसके पिता अखिलेश मिश्रा अंदर ही रह गए। आरोपी अरविंद ने तीसरी गोली उनके सिर पर मारी। वह लहूलुहान होकर सड़क पर गिर पड़े। गोलियों की आवाज सुनकर गांव के लोग मौके पर पहुंचे। गांव वालों को देखकर अरविंद ने हवा में रिवाल्वर लहराई। इस कारण से गांव वाले दूर ही रुक गए। तीनों की हत्या करने के बाद अरविंद अपने तीनों बेटों के साथ खुद को घर के एक कमरे में बंद कर लिया। अब पढ़िए 7 घंटे तक क्या हुआ शाम करीब 7 बजे अहरौला थाना प्रभारी रामकिशोर शर्मा और डायल 112 पहुंची। मेन गेट से पुलिस अंदर घुसी। देखा कि घर के अंदर तीन लोगों की लाशें पड़ी हुईं थीं। आरोपी अरविंद ने बच्चों समेत खुद को एक कमरे में बंद कर रखा है। वह कमरे की खिड़की से बाहर झांक रहा है। पुलिस ने उससे कहा कि दरवाजा खोल दो। मगर अरविंद ने दरवाजा नहीं खोला। उसने कहा कि पहले एसएसपी को बुलाओ, तब हम दरवाजा खोलेंगे। करीब 7.15 बजे पुलिस कप्तान डॉ. अनिल कुमार, एसपी ग्रामीण चिराग जैन पहुंचे। उन्होंने अरविंद से कहा कि दरवाजा खोल दो। हम तुम्हारे साथ कुछ नहीं करेंगे। रात 8 बजे बहन पहुंची, बोला- तू यहां क्यों आई है रात 8 बजे पुलिस ने अरविंद की बहन साधना को बुलाया। साधना ने कहा कहा कि भइया दरवाजा खोल दो। बहन को देखते ही अरविंद भड़क गया। उसने कहा कि तू यहां क्या करने आई हो? तेरा घर-द्वार नहीं है क्या? बहन ने कहा कि यह मेरा भी तो घर है। अंदर से अरविंंद चिल्लाया। यह तुम्हारा घर नहीं है। जाओ यहां से। बहन बोली कि अंदर छोटी बच्ची है, उसे लाओ मुझे दे दो। वह भूखी होगी। उसे मैं दूध पिला दूं। अरविंद ने उसे रिवॉल्वर दिखाकर भगा दिया। करीब 8.30 बजे अरविंद की मां कमला को बुलाया गया। कमला ने भी समझाया, लेकिन अरविंद ने दरवाजा नहीं खोला। उसने कहा कि मेरे भाई की हत्या हो गई। किसी ने मदद नहीं की। आरोपी बोला- मेरे भाई के हत्यारे बाहर घूम रहे करीब 9 बजे एसएसपी ने कहा कि अरविंद तुम घबराओ नहीं। हम लोग तुम्हारे परिवार के साथ हैं। अरविंद बोला कि 8 साल हो गए। मेरी भाई की हत्या कर दी गई। मुझे न्याय नहीं मिला। हत्यारोपी बाहर घूम रहे हैं। मुझे जान का खतरा है। फिर अरविंद ने एसएसपी से कहा कि SDM, तहसीलदार को बुलाओ, फिर दरवाजा खोलेंगे। कप्तान ने एसडीएम को फोन किया। रात करीब 9.30 बजे तक एसडीएम और तहसीलदार भी मौके पर पहुंच गए। इसी बीच कप्तान ने SOG और 6 थानों की फोर्स को भी मौके पर बुला लिया। पीएसी भी पहुंची। पुलिस फोर्स ने उसके घर को चारों ओर से घेर लिया। SDM के मौके पर पहुंचने पर कप्तान ने अरविंद से कहा कि एसडीएम साहब आ गए हैं। अब दरवाजा खोल दो। तुम डरो नहीं। तुम्हारी जो मांग होगी। हम लोग उसे सुनेंगे। रात 11.30 बजे अरविंद बोला- ADG को बुलाओ इसके बाद भी अरविंद ने दरवाजा नहीं खोला। उसने कहा कि एडीजी को बुलाओ, तब हम कमरे का दरवाजा खोलेंगे। 11,30 पर वाराणसी के एडीजी नवीन अरोरा पहुंचे। एडीजी ने अरविंद से कहा कि हम तुम्हारे साथ हैं। तुम घबराओ नहीं। बच्चों को बाहर भेज दो। हम तुम्हें कुछ नहीं करेंगे। तुम्हारी बात को सुना जाएगा। दरवाजा खोलकर बाहर आओ। बच्चे रो रहे थे, पुलिस ने चॉकलेट मंगवाई यह सुनकर अरविंद बोला कि मेरे बच्चों को भूख लगी है। वह रो रहे हैं। उनके लिए गांव की दुकान से चॉकलेट मंगवा दो। पुलिस ने 500 रुपए की बच्चों के लिए चॉकलेट मंगवाई। रात करीब 12 बजे अरविंद बोला कि अब हम बाहर नहीं आएंगे। रात बहुत हो गई है। मेरी बेटी और बच्चे सो गए हैं। रात को मैं घर से बाहर नहीं निकलता। अब मैं सुबह उजाले में कमरा खोलूंगा और बाहर निकलूंगा। अभी निकला तो मैं मारा जाऊंगा। यह सुनकर पुलिस कप्तान ने कहा कि ऐसा कुछ नहीं होगा। तुम और तुम्हारे बच्चे सुरक्षित रहेंगे। तुम दरवाजा खोल दो और बाहर आ जाओ। रात 12.30 बजे ATS पहुंची, 1 बजे एनकाउंटर कर दिया रात करीब 12.30 बजे वाराणसी से ATS पहुंची। अरविंद ने कहा कि आप लोग चले जाइए। वरना मैं अपने बच्चों को मार दूंगा। इसी बीच कमरे से गोली चलने की आवाज आई। इसके बाद ATS और SOG अलर्ट हो गई। टीम ने स्टेन ग्रेनेड और टियर गैस घर के अंदर छोड़ दी। फिर करीब 20 जवान और कप्तान अंदर घुसे और कमरे का दरवाजा तोड़ दिया। पुलिस के एंट्री करते ही अरविंद ने चेतावनी देते हुए पुलिस पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। उसने 6 राउंड फायरिंग की। पुलिस ने भी जवाब दिया। इसमें एक गोली उसे लगी। पुलिस घायल अवस्था में अरविंद और उसके बेटे को जिला अस्पताल लेकर पहुंची। जहां 3:30 बजे डॉक्टरों ने अरविंद को मृत घोषित कर दिया।

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *