_photocaption_बोकारो | बोकारो के सेक्टर-1 में खिलौने बेचते दो बच्चे, बचपन की मासूमियत पर जिम्मेदारियों का पहरा देखने को मिला। जिस उम्र में बच्चों के हाथों में खिलौने होने चाहिए, जिस उम्र में उन्हें दोस्तों के साथ खेलना और किताबों में अपना भविष्य तलाशना चाहिए, उस उम्र में दो नन्हे बच्चे परिवार की रोजी-रोटी के लिए खिलौने बेचते नजर आए। सड़क किनारे खिलौने बेचते इन बच्चों के चेहरों पर भले ही बचपन की मासूमियत नजर आती हो, लेकिन उनके छोटे-छोटे कंधों पर परिवार की जरूरतों का बोझ है। उनके लिए खिलौने महज खेलने की चीज नहीं, बल्कि घर की जरूरतें पूरी करने का जरिया है। पेट की आग के सामने उनकी मासूम इच्छाएं पीछे छूट गई हैं।*photocaption* _photocaption_बोकारो | बोकारो के सेक्टर-1 में खिलौने बेचते दो बच्चे, बचपन की मासूमियत पर जिम्मेदारियों का पहरा देखने को मिला। जिस उम्र में बच्चों के हाथों में खिलौने होने चाहिए, जिस उम्र में उन्हें दोस्तों के साथ खेलना और किताबों में अपना भविष्य तलाशना चाहिए, उस उम्र में दो नन्हे बच्चे परिवार की रोजी-रोटी के लिए खिलौने बेचते नजर आए। सड़क किनारे खिलौने बेचते इन बच्चों के चेहरों पर भले ही बचपन की मासूमियत नजर आती हो, लेकिन उनके छोटे-छोटे कंधों पर परिवार की जरूरतों का बोझ है। उनके लिए खिलौने महज खेलने की चीज नहीं, बल्कि घर की जरूरतें पूरी करने का जरिया है। पेट की आग के सामने उनकी मासूम इच्छाएं पीछे छूट गई हैं।*photocaption*

