पलामू टाइगर रिजर्व जंगल सफारी के लिए 40 वाहन रजिस्टर्ड:पहली बार दो सर्किट पर जंगल सफारी हुई शुरू, सुरक्षा के लिए लगाए जा रहे CCTV‎

पलामू टाइगर रिजर्व जंगल सफारी के लिए 40 वाहन रजिस्टर्ड:पहली बार दो सर्किट पर जंगल सफारी हुई शुरू, सुरक्षा के लिए लगाए जा रहे CCTV‎

झारखंड का गौरव और देश के सबसे पुराने टाइगर रिजर्व‎ में से एक पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) तीन महीने‎ के मानसून ब्रेक के बाद एक बार फिर पर्यटकों से ‎गुलजार हो गया है। एक अक्टूबर से पीटीआर का मुख्य‎ आकर्षण, बेतला नेशनल पार्क पर्यटकों के लिए खोल‎ दिया गया है। बारिश के बाद पीटीआर का जंगल पूरी‎ तरह निखर गया है। घनी हरियाली, पहाड़, झरने और ‎प्राकृतिक वातावरण के बीच वन्य जीवों की चहल कदमी ‎पर्यटकों को रोमांचित कर रही है। पीटीआर प्रबंधन ने‎इस बार पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए‎ कई बड़े बदलाव किए हैं। सबसे बड़ा बदलाव जंगल‎ सफारी को लेकर किया गया है। अब तक बेतला में सिर्फ‎ एक रूट से सफारी होती थी।‎ ‎ एंटी-पोचिंग कैंप भी किया गया सक्रिय
पलामू टाइगर रिजर्व में इस बार‎ सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए‎गए हैं। पर्यटकों की सुरक्षा और ‎बाघों समेत वन्यजीवों के ‎संरक्षण के लिए जगह-जगह ‎सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे‎ हैं। एंटी-पोचिंग कैंप सक्रिय कर ‎दिया गया है। जंगल की 24 घंटे‎ निगरानी हो रही है। टिकटिंग ‎व्यवस्था को भी पीटीआर के ‎मुख्य द्वार पर व्यवस्थित किया‎गया है। पर्यटकों को एक ही‎ जगह पर सारी जानकारी और‎ सुविधाएं मिलेंगी। जल्द ही ‎पीटीआर के लिए इंटीग्रेटेड ऐप‎ भी लाया जा रहा है। इससे टूर ‎प्लानिंग, सफारी बुकिंग और‎गाइड की जानकारी एक ही ‎प्लेटफॉर्म पर मिल जाएगी।‎ पार्क में सैलानियों को मिलेगा ‎स्थानीय व्यंजनों का स्वाद‎
पीटीआर प्रबंधन ईको-टूरिज्म को ‎बढ़ावा दे रहा है। पार्क के अंदर‎ खाने-पीने की व्यवस्था में पलामू के ‎पारंपरिक और आदिवासी व्यंजनों को ‎शामिल किया जा रहा है। इससे‎ पर्यटकों को स्थानीय स्वाद मिलेगा।‎ पीटीआर झारखंड ‎का इकलौता टाइगर रिजर्व
स्थानीय युवाओं को रोजगार भी‎ मिलेगा। स्थानीय उत्पादों और‎ हस्तशिल्प की बिक्री के लिए भी ‎काउंटर लगाए जा रहे हैं। 1930 के ‎दशक में स्थापित पीटीआर झारखंड ‎का इकलौता टाइगर रिजर्व है। यह ‎करीब 1129 वर्ग किमी में फैला है।‎ बेतला इसका मुख्य पर्यटन जोन है।‎ मानसून के बाद अब एक बार फिर ‎पीटीआर पर्यटकों के स्वागत के लिए ‎पूरी तरह तैयार है।‎ जंगल का ज्यादा हिस्सा देख सकेंगे पर्यटक
उपनिदेशक पीटीआर के‎उपनिदेशक प्रजेश कांत जेना ने बताया कि दो सर्किट बनने से पर्यटकों को जंगल‎का ज्यादा हिस्सा देखने को मिलेगा। एक ही जगह पर भीड़ नहीं लगेगी। पर्यटक‎दोनों सर्किट में रजिस्टर्ड ओपन जीप से गाइडेड सफारी का आनंद ले सकेंगे।‎दोनों के लिए अलग-अलग बुकिंग करनी होगी। ऑनलाइन टिकट बुकिंग शुरू‎कर दी गई है। पीटीआर में सफारी के दौरान बाइसन, चीतल, सांभर, हिरण, भालू,‎हाथी, तेंदुआ और मोर समेत कई वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में देखने‎का मौका मिलता है। बारिश के बाद जंगल में पानी और हरियाली भरपूर है।‎ झारखंड का गौरव और देश के सबसे पुराने टाइगर रिजर्व‎ में से एक पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) तीन महीने‎ के मानसून ब्रेक के बाद एक बार फिर पर्यटकों से ‎गुलजार हो गया है। एक अक्टूबर से पीटीआर का मुख्य‎ आकर्षण, बेतला नेशनल पार्क पर्यटकों के लिए खोल‎ दिया गया है। बारिश के बाद पीटीआर का जंगल पूरी‎ तरह निखर गया है। घनी हरियाली, पहाड़, झरने और ‎प्राकृतिक वातावरण के बीच वन्य जीवों की चहल कदमी ‎पर्यटकों को रोमांचित कर रही है। पीटीआर प्रबंधन ने‎इस बार पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए‎ कई बड़े बदलाव किए हैं। सबसे बड़ा बदलाव जंगल‎ सफारी को लेकर किया गया है। अब तक बेतला में सिर्फ‎ एक रूट से सफारी होती थी।‎ ‎ एंटी-पोचिंग कैंप भी किया गया सक्रिय
पलामू टाइगर रिजर्व में इस बार‎ सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए‎गए हैं। पर्यटकों की सुरक्षा और ‎बाघों समेत वन्यजीवों के ‎संरक्षण के लिए जगह-जगह ‎सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे‎ हैं। एंटी-पोचिंग कैंप सक्रिय कर ‎दिया गया है। जंगल की 24 घंटे‎ निगरानी हो रही है। टिकटिंग ‎व्यवस्था को भी पीटीआर के ‎मुख्य द्वार पर व्यवस्थित किया‎गया है। पर्यटकों को एक ही‎ जगह पर सारी जानकारी और‎ सुविधाएं मिलेंगी। जल्द ही ‎पीटीआर के लिए इंटीग्रेटेड ऐप‎ भी लाया जा रहा है। इससे टूर ‎प्लानिंग, सफारी बुकिंग और‎गाइड की जानकारी एक ही ‎प्लेटफॉर्म पर मिल जाएगी।‎ पार्क में सैलानियों को मिलेगा ‎स्थानीय व्यंजनों का स्वाद‎
पीटीआर प्रबंधन ईको-टूरिज्म को ‎बढ़ावा दे रहा है। पार्क के अंदर‎ खाने-पीने की व्यवस्था में पलामू के ‎पारंपरिक और आदिवासी व्यंजनों को ‎शामिल किया जा रहा है। इससे‎ पर्यटकों को स्थानीय स्वाद मिलेगा।‎ पीटीआर झारखंड ‎का इकलौता टाइगर रिजर्व
स्थानीय युवाओं को रोजगार भी‎ मिलेगा। स्थानीय उत्पादों और‎ हस्तशिल्प की बिक्री के लिए भी ‎काउंटर लगाए जा रहे हैं। 1930 के ‎दशक में स्थापित पीटीआर झारखंड ‎का इकलौता टाइगर रिजर्व है। यह ‎करीब 1129 वर्ग किमी में फैला है।‎ बेतला इसका मुख्य पर्यटन जोन है।‎ मानसून के बाद अब एक बार फिर ‎पीटीआर पर्यटकों के स्वागत के लिए ‎पूरी तरह तैयार है।‎ जंगल का ज्यादा हिस्सा देख सकेंगे पर्यटक
उपनिदेशक पीटीआर के‎उपनिदेशक प्रजेश कांत जेना ने बताया कि दो सर्किट बनने से पर्यटकों को जंगल‎का ज्यादा हिस्सा देखने को मिलेगा। एक ही जगह पर भीड़ नहीं लगेगी। पर्यटक‎दोनों सर्किट में रजिस्टर्ड ओपन जीप से गाइडेड सफारी का आनंद ले सकेंगे।‎दोनों के लिए अलग-अलग बुकिंग करनी होगी। ऑनलाइन टिकट बुकिंग शुरू‎कर दी गई है। पीटीआर में सफारी के दौरान बाइसन, चीतल, सांभर, हिरण, भालू,‎हाथी, तेंदुआ और मोर समेत कई वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में देखने‎का मौका मिलता है। बारिश के बाद जंगल में पानी और हरियाली भरपूर है।‎  

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