पनामा विल्ट की मार से केले की खेती पर संकट

पनामा विल्ट की मार से केले की खेती पर संकट

भास्कर न्यूज| खगड़िया केला उत्पादन के लिए पहचान रखने वाले खगड़िया जिले में किसानों के सामने अब फसल को रोगों और कीटों से बचाने की चुनौती बढ़ने लगी है। जिले में करीब 1800 हेक्टेयर में केले की खेती होती है और सालाना लगभग 38 हजार टन उत्पादन होता है। परबत्ता सहित जिले के अन्य प्रखंडों में बड़े पैमाने पर किसान केले की खेती करते हैं। हालांकि, पनामा विल्ट रोग के बढ़ते प्रकोप से जिले में केले की खेती का रकबा धीरे-धीरे घटने लगा है। ऐसे में किसानों को पारंपरिक तरीकों के साथ वैज्ञानिक तकनीक अपनाने और पौधों की नियमित निगरानी करने की जरूरत है। जिला उद्यान पदाधिकारी अभय कुमार मंडल ने बताया कि पनामा विल्ट केले की फसल के लिए गंभीर समस्या है। प्रसंस्करण उद्योग से बढ़ सकती है आय केले की खेती के बावजूद जिले में स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण उद्योग की कमी किसानों के लिए बड़ी चुनौती है। भंडारण, परिवहन और बेहतर बाजार की सुविधा नहीं मिलने से कई बार किसानों को उपज बेचने में परेशानी होती है। केला आधारित प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित होने से किसानों को स्थानीय बाजार मिल सकता है और रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं। बेहतर पौध संरक्षण, वैज्ञानिक खेती और बाजार की सुविधा से जिले में केले के उत्पादन को टिकाऊ बनाया जा सकता है। भास्कर न्यूज| खगड़िया केला उत्पादन के लिए पहचान रखने वाले खगड़िया जिले में किसानों के सामने अब फसल को रोगों और कीटों से बचाने की चुनौती बढ़ने लगी है। जिले में करीब 1800 हेक्टेयर में केले की खेती होती है और सालाना लगभग 38 हजार टन उत्पादन होता है। परबत्ता सहित जिले के अन्य प्रखंडों में बड़े पैमाने पर किसान केले की खेती करते हैं। हालांकि, पनामा विल्ट रोग के बढ़ते प्रकोप से जिले में केले की खेती का रकबा धीरे-धीरे घटने लगा है। ऐसे में किसानों को पारंपरिक तरीकों के साथ वैज्ञानिक तकनीक अपनाने और पौधों की नियमित निगरानी करने की जरूरत है। जिला उद्यान पदाधिकारी अभय कुमार मंडल ने बताया कि पनामा विल्ट केले की फसल के लिए गंभीर समस्या है। प्रसंस्करण उद्योग से बढ़ सकती है आय केले की खेती के बावजूद जिले में स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण उद्योग की कमी किसानों के लिए बड़ी चुनौती है। भंडारण, परिवहन और बेहतर बाजार की सुविधा नहीं मिलने से कई बार किसानों को उपज बेचने में परेशानी होती है। केला आधारित प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित होने से किसानों को स्थानीय बाजार मिल सकता है और रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं। बेहतर पौध संरक्षण, वैज्ञानिक खेती और बाजार की सुविधा से जिले में केले के उत्पादन को टिकाऊ बनाया जा सकता है।  

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