पत्रिका पड़ताल: चित्तौड़गढ़-प्रतापगढ़ डेयरी में बड़ा खुलासा, ब्लैकलिस्टेड कंपनी को सौंप दी प्लांट की सुरक्षा

पत्रिका पड़ताल: चित्तौड़गढ़-प्रतापगढ़ डेयरी में बड़ा खुलासा, ब्लैकलिस्टेड कंपनी को सौंप दी प्लांट की सुरक्षा

-अतुल पोरवाल

Chittorgarh Pratapgarh Dairy News: चित्तौड़गढ़: राजस्थान में किसी भी ब्लैकलिस्टेड (काली सूची में डाली गई) सिक्योरिटी सर्विस कंपनी या ठेकेदार को अधिकतम तीन वर्ष की अवधि तक कोई भी सरकारी या अर्द्धसरकारी ठेका दिए जाने का प्रावधान नहीं है। इसके बावजूद, चित्तौड़गढ़-प्रतापगढ़ दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति ने नियमों को ताक पर रखकर ‘केके सिक्योरिटी सर्विस’ को चौकीदारी का ठेका दे रखा है, जो वर्ष 2025 से ही ब्लैकलिस्टेड है।

पत्रिका पड़ताल में सामने आया बड़ा खुलासा

‘पत्रिका’ की पड़ताल में यह बड़ा खुलासा हुआ है कि यह सिक्योरिटी फर्म बूंदी जिले की नैनवां नगर पालिका द्वारा वर्ष 2025 में ही काली सूची में डाली जा चुकी है। इसके बावजूद डेयरी प्रबंधन की इस फर्म पर विशेष मेहरबानी कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। नियमों के अनुसार, ब्लैकलिस्टेड कंपनी को अगले तीन साल तक किसी भी सरकारी संस्थान में ठेका नहीं दिया जा सकता, फिर भी चित्तौड़गढ़ डेयरी में इस नियम की अनदेखी की गई।

पहले से चर्चाओं में है डेयरी

बता दें कि चित्तौड़गढ़ डेयरी पहले से ही कई अव्यवस्थाओं को लेकर चर्चाओं में है। दुग्ध वितरण वाहनों के ठेकों से लेकर दूध की गुणवत्ता और अन्य कई गंभीर प्रकरणों में सहकारी समिति की अध्यक्ष एवं जिला कलेक्टर डॉ. मंजू कई बार एमडी से तीखे सवाल कर चुकी हैं, लेकिन सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर अब तक ध्यान नहीं गया।

श्रमिकों के शोषण और धांधली के चलते हुई थी कार्रवाई

नैनवां नगर पालिका में इस फर्म के खिलाफ अपने ही श्रमिकों (गार्डों) के साथ गंभीर अनियमितता करने के कारण कार्रवाई की गई थी। नगर पालिका के आदेश में स्पष्ट उल्लेख किया गया था कि इस कंपनी ने अपने कर्मचारियों के वेतन से 3.25 प्रतिशत ईएसआई और 13 प्रतिशत ईपीएफ की राशि तो काट ली, लेकिन उस रकम को संबंधित खातों में जमा नहीं कराया।

इस वित्तीय अनियमितता और श्रमिकों के शोषण की शिकायत मिलने के बाद नैनवां नगर पालिका ने कंपनी को दो बार नोटिस जारी किए, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला और न ही आदेशों की पालना हुई। इसके चलते नैनवां नगर पालिका ने 7 जुलाई 2025 को ‘केके सिक्योरिटी सर्विस’ को आधिकारिक रूप से ब्लैकलिस्ट कर दिया।

10 लाख रुपए का है एक साल का अनुबंध

विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ‘केके सिक्योरिटी सर्विस’ को करीब 10 माह पूर्व यह ठेका दिया गया था। एक वर्ष की अवधि वाले इस अनुबंध की कुल राशि लगभग 10 लाख रुपए है, जिसके तहत चित्तौड़गढ़ प्लांट के अलावा प्रतापगढ़ उपशाखा और अन्य स्थानों पर कुल 39 गार्ड तैनात किए गए हैं।

ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि सुरक्षा के लिए जारी विज्ञप्ति और टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने वाली एजेंसियों के दस्तावेजों की सूक्ष्म जांच के बाद भी आखिर किस आधार पर इस ब्लैकलिस्टेड कंपनी को उपकृत किया गया।

क्या बोले अधिकारी…

डेयरी समिति में ‘केके सिक्योरिटी सर्विस’ काम कर रही है, लेकिन इसे ठेका मेरे कार्यकाल से पहले दिया गया था। यह कंपनी ब्लैकलिस्टेड है, इसकी जानकारी मुझे नहीं है। यदि ऐसा है, तो मामले की जांच करवाकर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
-राजकुमार शर्मा, एमडी

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