बिहार के विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा का नया नेतृत्व चुनने के लिए अभूतपूर्व मुकाबला देखने को मिल रहा है। लोकभवन द्वारा कुलपति और प्रतिकुलपति के 10 पदों के लिए जारी विज्ञापन पर अब तक 8 हजार आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। औसतन एक पद पर 800 उम्मीदवार मैदान में हैं। पिछली बार यह संख्या करीब 3 हजार थी, जिसमें इस बार दोगुनी से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है। लोकभवन द्वारा ऑनलाइन आवेदन प्रणाली को सुगम बनाने से देश-विदेश में कार्यरत बिहार मूल के विद्वानों और अन्य राज्यों के अकादमिक लीडर्स ने सीधे आवेदन किया है। इस बार 24 राज्यों और विदेशों से भी दावेदारी आई है। इनमें केंद्रीय विश्वविद्यालयों, आईआईटीज, एनआईटीज, आईआईएम और राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों के वरिष्ठ प्रोफेसर व विभागाध्यक्ष शामिल हैं। वर्तमान में मौलाना मजहरूल हक अरबी-फारसी विश्वविद्यालय, मगध विश्वविद्यालय, तिलका मांझी विश्वविद्यालय और वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय में कुलपति के पद खाली हैं। अन्य 6 विश्वविद्यालयों में भी जल्द कुलपति के पद रिक्त होने वाले हैं। वहीं, 15 विश्वविद्यालयों में प्रतिकुलपति के पद खाली हैं। एक ही उम्मीदवार द्वारा कई विश्वविद्यालयों के लिए अलग-अलग फॉर्म भरने (मल्टीपल सबमिशन) के कारण भी यह संख्या अधिक है। लिस्टिंग कैसे होगी : चयन के 3 मुख्य चरण स्क्रूटिनी के बाद सर्च कमेटी द्वारा पारदर्शी प्रक्रिया के जरिए शॉर्टलिस्ट किया जाएगा। सर्च कमेटी के सामने स्क्रूटिनी की 4 बड़ी चुनौतियां योग्य व विजनरी चेहरा चुनना सर्च कमेटी के लिए चुनौती है अनुभव के नए मानक से बढ़े आवेदक शिक्षाविद प्रो. रास बिहारी सिंह बताते हैं कि नियमों में बदलाव से आवेदन बढ़े हैं। पहले नोटिफिकेशन की तिथि से 10 वर्ष अनुभव जरूरी था। अब प्रोमोशन तिथि से 10 वर्ष कर दिया गया है। इससे बड़ी संख्या में प्रोफेसर पात्र हो गए हैं। वहीं, बिहार के प्रति आकर्षण से दूसरे राज्यों में भी काफी आदेवन आए हैं। बिहार के विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा का नया नेतृत्व चुनने के लिए अभूतपूर्व मुकाबला देखने को मिल रहा है। लोकभवन द्वारा कुलपति और प्रतिकुलपति के 10 पदों के लिए जारी विज्ञापन पर अब तक 8 हजार आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। औसतन एक पद पर 800 उम्मीदवार मैदान में हैं। पिछली बार यह संख्या करीब 3 हजार थी, जिसमें इस बार दोगुनी से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है। लोकभवन द्वारा ऑनलाइन आवेदन प्रणाली को सुगम बनाने से देश-विदेश में कार्यरत बिहार मूल के विद्वानों और अन्य राज्यों के अकादमिक लीडर्स ने सीधे आवेदन किया है। इस बार 24 राज्यों और विदेशों से भी दावेदारी आई है। इनमें केंद्रीय विश्वविद्यालयों, आईआईटीज, एनआईटीज, आईआईएम और राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों के वरिष्ठ प्रोफेसर व विभागाध्यक्ष शामिल हैं। वर्तमान में मौलाना मजहरूल हक अरबी-फारसी विश्वविद्यालय, मगध विश्वविद्यालय, तिलका मांझी विश्वविद्यालय और वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय में कुलपति के पद खाली हैं। अन्य 6 विश्वविद्यालयों में भी जल्द कुलपति के पद रिक्त होने वाले हैं। वहीं, 15 विश्वविद्यालयों में प्रतिकुलपति के पद खाली हैं। एक ही उम्मीदवार द्वारा कई विश्वविद्यालयों के लिए अलग-अलग फॉर्म भरने (मल्टीपल सबमिशन) के कारण भी यह संख्या अधिक है। लिस्टिंग कैसे होगी : चयन के 3 मुख्य चरण स्क्रूटिनी के बाद सर्च कमेटी द्वारा पारदर्शी प्रक्रिया के जरिए शॉर्टलिस्ट किया जाएगा। सर्च कमेटी के सामने स्क्रूटिनी की 4 बड़ी चुनौतियां योग्य व विजनरी चेहरा चुनना सर्च कमेटी के लिए चुनौती है अनुभव के नए मानक से बढ़े आवेदक शिक्षाविद प्रो. रास बिहारी सिंह बताते हैं कि नियमों में बदलाव से आवेदन बढ़े हैं। पहले नोटिफिकेशन की तिथि से 10 वर्ष अनुभव जरूरी था। अब प्रोमोशन तिथि से 10 वर्ष कर दिया गया है। इससे बड़ी संख्या में प्रोफेसर पात्र हो गए हैं। वहीं, बिहार के प्रति आकर्षण से दूसरे राज्यों में भी काफी आदेवन आए हैं।

