नोएडा में मीठे पानी की सप्लाई बढ़ेगी:यमुना किनारे बनेंगे 2 नए रैनीवेल, गंगाजल बंद होने पर भी मिलेगी राहत

नोएडा में मीठे पानी की सप्लाई बढ़ेगी:यमुना किनारे बनेंगे 2 नए रैनीवेल, गंगाजल बंद होने पर भी मिलेगी राहत

शहर में मीठे और साफ पानी की सप्लाई बढ़ाने के लिए नोएडा प्राधिकरण दो नए रैनीवेल बनाएगा। ये रैनीवेल सेक्टर-135 और सेक्टर-132 में यमुना नदी के किनारे बनाए जाएंगे। दोनों की क्षमता 17-17 एमएलडी होगी। यानी इनसे रोजाना कुल 34 एमएलडी पानी की सप्लाई हो सकेगी। परियोजना पर करीब 45 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इन रैनीवेल से लोगों को करीब 300 से 400 टीडीएस वाला पानी उपलब्ध कराने की योजना है। प्राधिकरण का कहना है कि गंग नहर की सफाई या किसी तकनीकी खराबी के कारण गंगाजल की सप्लाई बंद होने पर रैनीवेल शहर की पानी की जरूरत पूरी करने में मदद करेंगे। नोएडा में रोजाना पानी की मांग 450 एमएलडी से अधिक है। शहर को करीब 100 क्यूसेक यानी 240 एमएलडी गंगाजल की सप्लाई मिलती है। इसके अलावा करीब 110 एमएलडी पानी नलकूपों और 100 एमएलडी पानी रैनीवेल के जरिए उपलब्ध कराया जा रहा है। नोएडा में गंगाजल की सप्लाई गाजियाबाद के प्रताप विहार और सिद्धार्थ विहार स्थित प्लांटों से होती है। यहां से क्रमश: 80 और 20 क्यूसेक पानी की सप्लाई नोएडा पहुंचती है। अभी 8 रैनीवेल सक्रिय, 3 और जल्द शुरू होंगे
जीएम जल आरपी सिंह ने बताया कि नोएडा में अभी 8 रैनीवेल सक्रिय हैं। जिनसे रोजाना करीब 100 एमएलडी पानी की सप्लाई हो रही है। तीन अन्य रैनीवेल जल्द ही शुरू किए जाएंगे। इसके अलावा सेक्टर-132 और 135 में दो नए रैनीवेल बनाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इन सभी के शुरू होने के बाद रैनीवेल से करीब 160 एमएलडी पानी की सप्लाई की जा सकेगी। इससे गंगाजल की सप्लाई बाधित होने की स्थिति में पानी की कमी से काफी हद तक राहत मिलेगी। गंग नहर की सफाई के दौरान मिलेगा विकल्प
अधिकारियों के अनुसार गंग नहर की सफाई या किसी अन्य फॉल्ट के दौरान गंगाजल की सप्लाई प्रभावित हो जाती है। ऐसे में शहर में पानी का दबाव और सप्लाई व्यवस्था प्रभावित होती है। नए रैनीवेल शुरू होने के बाद इस कमी की भरपाई रैनीवेल के पानी से की जा सकेगी। फरीदाबाद मॉडल से मिली प्रेरणा
प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि फरीदाबाद में करीब 32 रैनीवेल काम कर रहे हैं और वहां पानी की सप्लाई में इनका बड़ा योगदान है। इसी मॉडल को नोएडा में भी बढ़ाया जा रहा है। यमुना का बड़ा हिस्सा नोएडा से होकर गुजरता है। इसलिए नदी किनारे रैनीवेल बनाकर भूजल का बेहतर उपयोग किया जा सकता है।

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