ठगों ने मुंबई साइबर विभाग का अधिकारी बन सेक्टर-37 रहने वाले एक कारोबारी को जांच और गिरफ्तारी का डर दिखाकर 22 रुपये ठग लिए। ठगों ने कारोबारी की आईडी का इस्तेमाल कर बैंक खाता खोले जाने और उसमें मनी लॉन्ड्रिंग व गैरकानूनी लेनदेन होने की बात कही। इसके बाद खाते की जांच के नाम पर रकम एक खाते में ट्रांसफर करा ली। पीड़ित की शिकायत पर मंगलवार को केस दर्ज कर लिया गया। सेक्टर-37 निवासी कारोबारी ने बताया कि 31 जुलाई 2026 को उनके पास मुंबई साइबर विभाग के अधिकारी के नाम से फोन आया। कॉल करने वाले ने कहा कि उनकी आईडी का इस्तेमाल कर कुमार नाम के व्यक्ति के नाम पर एक बैंक खाता खोला गया है। इस खाते से मनी लॉन्ड्रिंग और गैरकानूनी गतिविधियां हुई हैं। ठग ने पीड़ित को यह कहकर डराया कि वह भी मामले में फंस गए हैं और जांच के लिए उन्हें हिरासत में लिया जा सकता है। खाते की जांच के लिए जमा करे पैसा
ठगों ने शिकायतकर्ता को डिजिटल अरेस्ट कर लिया और मदद करने के बहाने नाम, परिवार और बैंक खातों से जुड़ी जानकारी मांगी। शिकायतकर्ता को एक अगस्त की सुबह नौ बजे सीबीआई कार्यालय में एक अधिकारी से मिलने के लिए कहा गया। इसी दौरान आरोपियों ने दावा किया कि खाते की जांच के लिए 22 लाख रुपये जमा करने होंगे। इससे लेनदेन की जांच आसान होगी और खाते में पीड़ित का पैसा शामिल नहीं होने की पुष्टि हो जाएगी। भरोसा में लिया फिर कराए ट्रांसफर
ठगों ने जांच के बाद पूरी रकम मूल खाते में वापस करने का भरोसा भी पीड़ित को दिया। ठगों के झांसे में आकर पीड़ित ने 22 लाख रुपये आरटीजीएस के जरिए बताए गए बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए। रकम एक सहकारी बैंक के खाते में भेजी गई। रकम ट्रांसफर होने के बाद ठग पीड़ित पर और रुपये ट्रांसफर करने का दबाव बनाने लगे। इसके बाद पीड़ित को ठगी का शक हुआ और उन्होंने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दी।

