भास्कर न्यूज | पूर्णिया टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत शनिवार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी), बरहरा कोठी में 34 टीबी मरीजों के बीच फूड बास्केट का वितरण किया गया। कार्यक्रम का आयोजन जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. मो. तनवीर हैदर के नेतृत्व में हुआ। इस पोषण सहयोग का मुख्य उद्देश्य मरीजों को उपचार के दौरान पौष्टिक आहार उपलब्ध कराकर उनके स्वास्थ्य में तेजी से सुधार लाना है। कार्यक्रम में बीएचएम आलोक कुमार, बीसीएम बंदना कुमारी, बीएएम सत्यनारायण कुमार, एसटीएस अमित कुमार सुमन सहित चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अन्य कर्मी मौजूद रहे। {दो सप्ताह या अधिक समय तक लगातार खांसी, बुखार, रात में पसीना आना, वजन घटना या भूख कम लगने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं। {मरीज डॉक्टर की सलाह से नियमित दवा लें और उपचार का पूरा कोर्स करें, बीच में दवा बंद न करें। {खांसते या छींकते समय मुंह व नाक को रूमाल या टिश्यू से जरूर ढकें। {मरीज के कमरे में पर्याप्त हवा और रोशनी (वेंटिलेशन) की व्यवस्था रखें। {मरीज के संपर्क में रहने वाले परिजन भी लक्षण दिखने पर तत्काल जांच कराएं। {पौष्टिक भोजन लें ताकि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनी रहे। {लक्षणों को छिपाने या घरेलू नुस्खों में समय गंवाने के बजाय सीधे सरकारी अस्पताल पहुंचकर जांच कराएं। ^टीबी की रोकथाम के लिए गांव और वार्ड स्तर पर नियमित जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। संभावित मरीजों की समय पर जांच कराना और दवा बीच में छोड़ने वालों की निगरानी करना सबसे प्रभावी कदम है। सामुदायिक स्तर पर पोषण सहयोग से मदद मिलती है। -डॉ. पीके कनौजिया, सिविल सर्जन ^टीबी पूरी तरह इलाज योग्य बीमारी है। समय पर जांच, नियमित उपचार और उचित पोषण से मरीज स्वस्थ हो सकते हैं। मरीज डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार का पूरा कोर्स अवश्य करें। -डॉ. नेहा भारती, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ^टीबी के इलाज के साथ पर्याप्त और पौष्टिक आहार मरीज के स्वास्थ्य सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। समाज के सक्षम लोगों को जनभागीदारी अभियान से जुड़कर टीबी मरीजों की मदद के लिए आगे आना चाहिए। -डॉ. मो. तनवीर हैदर, जिला संचारी रोग पदाधिकारी भास्कर न्यूज | पूर्णिया टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत शनिवार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी), बरहरा कोठी में 34 टीबी मरीजों के बीच फूड बास्केट का वितरण किया गया। कार्यक्रम का आयोजन जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. मो. तनवीर हैदर के नेतृत्व में हुआ। इस पोषण सहयोग का मुख्य उद्देश्य मरीजों को उपचार के दौरान पौष्टिक आहार उपलब्ध कराकर उनके स्वास्थ्य में तेजी से सुधार लाना है। कार्यक्रम में बीएचएम आलोक कुमार, बीसीएम बंदना कुमारी, बीएएम सत्यनारायण कुमार, एसटीएस अमित कुमार सुमन सहित चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अन्य कर्मी मौजूद रहे। {दो सप्ताह या अधिक समय तक लगातार खांसी, बुखार, रात में पसीना आना, वजन घटना या भूख कम लगने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं। {मरीज डॉक्टर की सलाह से नियमित दवा लें और उपचार का पूरा कोर्स करें, बीच में दवा बंद न करें। {खांसते या छींकते समय मुंह व नाक को रूमाल या टिश्यू से जरूर ढकें। {मरीज के कमरे में पर्याप्त हवा और रोशनी (वेंटिलेशन) की व्यवस्था रखें। {मरीज के संपर्क में रहने वाले परिजन भी लक्षण दिखने पर तत्काल जांच कराएं। {पौष्टिक भोजन लें ताकि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनी रहे। {लक्षणों को छिपाने या घरेलू नुस्खों में समय गंवाने के बजाय सीधे सरकारी अस्पताल पहुंचकर जांच कराएं। ^टीबी की रोकथाम के लिए गांव और वार्ड स्तर पर नियमित जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। संभावित मरीजों की समय पर जांच कराना और दवा बीच में छोड़ने वालों की निगरानी करना सबसे प्रभावी कदम है। सामुदायिक स्तर पर पोषण सहयोग से मदद मिलती है। -डॉ. पीके कनौजिया, सिविल सर्जन ^टीबी पूरी तरह इलाज योग्य बीमारी है। समय पर जांच, नियमित उपचार और उचित पोषण से मरीज स्वस्थ हो सकते हैं। मरीज डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार का पूरा कोर्स अवश्य करें। -डॉ. नेहा भारती, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ^टीबी के इलाज के साथ पर्याप्त और पौष्टिक आहार मरीज के स्वास्थ्य सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। समाज के सक्षम लोगों को जनभागीदारी अभियान से जुड़कर टीबी मरीजों की मदद के लिए आगे आना चाहिए। -डॉ. मो. तनवीर हैदर, जिला संचारी रोग पदाधिकारी

