नालंदा में एनएच-20 पर स्थित पैठना टोल से बचने के लिए एसएच-78 (बिहटा-सरमेरा पथ) का रुख करने वाले वाहन चालकों की जेब अब ढीली होगी। बिहार कैबिनेट द्वारा राज्य उच्च पथों पर टोल वसूली के फैसले के तहत अब नूरसराय के पास नया टोल प्लाजा स्थापित करने की तैयारी तेज हो गई है। इसका सीधा असर ‘टूरिस्ट वे ऑफ राजगीर’ के जरिए राजगीर जाने वाले पर्यटकों और नियमित यात्रियों पर पड़ेगा। पैठना टोल प्लाजा चालू होने के बाद टोल टैक्स बचाने के फेर में बड़ी संख्या में वाहनों ने एसएच-78 का रुख किया था। इससे बिहटा-सरमेरा पथ पर वाहनों की आवाजाही में 20 गुना से अधिक का इजाफा दर्ज किया गया। बिहटा-सरमेरा कॉरिडोर नालंदा, पटना, मोकामा और हाजीपुर को जोड़ने वाली प्रमुख जीवनरेखा है। अब नूरसराय तिमुहाना के पास टोल प्लाजा बनने से एनएच से बचकर स्टेट हाईवे पर निकलने का यह ‘शॉर्टकट’ भी सशुल्क हो जाएगा। पर्यटन और जेब पर सीधा असर राजगीर, नालंदा विश्वविद्यालय और अंतरराष्ट्रीय खेल परिसर की यात्रा करने वाले पर्यटकों, व्यावसायिक वाहनों और दैनिक यात्रियों के लिए सफर अब महंगा होगा। नई व्यवस्था लागू होते ही एनएच-20 और एसएच-78 के बीच होने वाला रूट डायवर्जन पूरी तरह थम जाएगा। एसएच पर शुल्क के मानक राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत ‘बिहार पथ उपयोगकर्ता शुल्क नियमावली-2026’ के तहत स्टेट हाईवे पर हल्के वाहनों (कार/जीप आदि) के लिए 1.25 रुपये प्रति किलोमीटर की दर तय की गई है, जबकि भारी और व्यावसायिक वाहनों के लिए दरें अधिक निर्धारित हैं। दूसरे चरण में एसएच-71 भी दायरे में कैबिनेट ने राज्य के 55 स्टेट हाईवे और 44 बड़े पुलों पर टोल वसूली के प्रस्ताव और बूथ निर्माण के लिए फंड को स्वीकृति दी है। पहले चरण में एसएच-78 के बाद दूसरे चरण में जहानाबाद-पार्वती एसएच-71 (लंबाई लगभग 85 किमी) पर भी टोल प्लाजा स्थापित होगा। यह मार्ग जहानाबाद से घोसी, इस्लामपुर, राजगीर, गिरियक और कतरीसराय होते हुए पार्वती (नवादा) तक जाता है। आरसीडी के कार्यपालक अभियंता विकास चंद्र ने बताया कि राज्य के जिन 55 एसएच पर पहले चरण में टोल वसूली शुरू होनी है, उनमें एसएच-78 भी शामिल है। नालंदा जिले में इसके अतिरिक्त एसएच-71, एसएच-4 और टूरिस्ट वे ऑफ राजगीर भी राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। नालंदा में एनएच-20 पर स्थित पैठना टोल से बचने के लिए एसएच-78 (बिहटा-सरमेरा पथ) का रुख करने वाले वाहन चालकों की जेब अब ढीली होगी। बिहार कैबिनेट द्वारा राज्य उच्च पथों पर टोल वसूली के फैसले के तहत अब नूरसराय के पास नया टोल प्लाजा स्थापित करने की तैयारी तेज हो गई है। इसका सीधा असर ‘टूरिस्ट वे ऑफ राजगीर’ के जरिए राजगीर जाने वाले पर्यटकों और नियमित यात्रियों पर पड़ेगा। पैठना टोल प्लाजा चालू होने के बाद टोल टैक्स बचाने के फेर में बड़ी संख्या में वाहनों ने एसएच-78 का रुख किया था। इससे बिहटा-सरमेरा पथ पर वाहनों की आवाजाही में 20 गुना से अधिक का इजाफा दर्ज किया गया। बिहटा-सरमेरा कॉरिडोर नालंदा, पटना, मोकामा और हाजीपुर को जोड़ने वाली प्रमुख जीवनरेखा है। अब नूरसराय तिमुहाना के पास टोल प्लाजा बनने से एनएच से बचकर स्टेट हाईवे पर निकलने का यह ‘शॉर्टकट’ भी सशुल्क हो जाएगा। पर्यटन और जेब पर सीधा असर राजगीर, नालंदा विश्वविद्यालय और अंतरराष्ट्रीय खेल परिसर की यात्रा करने वाले पर्यटकों, व्यावसायिक वाहनों और दैनिक यात्रियों के लिए सफर अब महंगा होगा। नई व्यवस्था लागू होते ही एनएच-20 और एसएच-78 के बीच होने वाला रूट डायवर्जन पूरी तरह थम जाएगा। एसएच पर शुल्क के मानक राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत ‘बिहार पथ उपयोगकर्ता शुल्क नियमावली-2026’ के तहत स्टेट हाईवे पर हल्के वाहनों (कार/जीप आदि) के लिए 1.25 रुपये प्रति किलोमीटर की दर तय की गई है, जबकि भारी और व्यावसायिक वाहनों के लिए दरें अधिक निर्धारित हैं। दूसरे चरण में एसएच-71 भी दायरे में कैबिनेट ने राज्य के 55 स्टेट हाईवे और 44 बड़े पुलों पर टोल वसूली के प्रस्ताव और बूथ निर्माण के लिए फंड को स्वीकृति दी है। पहले चरण में एसएच-78 के बाद दूसरे चरण में जहानाबाद-पार्वती एसएच-71 (लंबाई लगभग 85 किमी) पर भी टोल प्लाजा स्थापित होगा। यह मार्ग जहानाबाद से घोसी, इस्लामपुर, राजगीर, गिरियक और कतरीसराय होते हुए पार्वती (नवादा) तक जाता है। आरसीडी के कार्यपालक अभियंता विकास चंद्र ने बताया कि राज्य के जिन 55 एसएच पर पहले चरण में टोल वसूली शुरू होनी है, उनमें एसएच-78 भी शामिल है। नालंदा जिले में इसके अतिरिक्त एसएच-71, एसएच-4 और टूरिस्ट वे ऑफ राजगीर भी राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।

