बेगूसराय में होने वाले भारत के दूसरे सबसे बड़े श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मेले को लेकर पूरा जिला कृष्णमय हो गया है। जिले में 80 से अधिक भव्य पंडाल सजाए गए हैं। शुक्रवार की रात ठीक 12 बजे रोहिणी नक्षत्र में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म होगा। इसके साथ ही सभी पंडालों के पट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिए जाएंगे। इस बार का जन्मोत्सव दुर्लभ और अलौकिक ज्योतिषीय संयोगों के बीच मनाया जाएगा। द्वापर युग जैसा संयोग, वृषभ राशि में रहेंगे चंद्रमा शास्त्रों के अनुसार द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, मध्यरात्रि, रोहिणी नक्षत्र और वृषभ राशि के चंद्रमा के शुभ लग्न में हुआ था। इस वर्ष जन्माष्टमी पर भी इसी तरह का दुर्लभ संयोग बन रहा है। चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में विराजमान रहेंगे और रोहिणी नक्षत्र की साक्षी रहेगी। इसके साथ ही सर्वार्थ सिद्धि योग का भी महासंयोग बन रहा है। 100वें वर्ष में इतिहास रचने को तैयार तेघड़ा का मेला आस्था और सांस्कृतिक धरोहर के सबसे बड़े केंद्र के रूप में पहचान बना चुका तेघड़ा जन्माष्टमी मेला इस बार अपने 100वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। शताब्दी वर्ष को लेकर पूरा इलाका कृष्णमय हो चुका है। करीब तीन किलोमीटर के दायरे में फैले इस ऐतिहासिक मेले में काल्पनिक और वास्तविक मंदिरों के प्रारूप पर आधारित एक से बढ़कर एक भव्य पंडाल तैयार किए जा रहे हैं। शताब्दी वर्ष होने के कारण इस बार मेले की सजावट, प्रकाश व्यवस्था और झांकियों को विशेष रूप दिया जा रहा है। स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दराज के जिलों और पड़ोसी राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं में भी खासा उत्साह है। विष्णुपद मंदिर की तर्ज पर तैयार हो रहा भव्य पंडाल मेले के प्रमुख आकर्षणों में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मेला समिति रजिस्ट्री कार्यालय तेघड़ा की ओर से बनाया जा रहा भव्य पंडाल शामिल है। इस वर्ष समिति द्वारा तमिलनाडु के विश्वप्रसिद्ध विष्णुपद मंदिर की तर्ज पर विशाल और कलात्मक पंडाल का निर्माण कराया जा रहा है। पंडाल के मुख्य ढांचे को आकार देने के लिए राजस्थान और झारखंड के जामताड़ा से कुशल कारीगर बुलाए गए हैं। तमिलनाडु और कोलकाता से आए वरिष्ठ कलाकार पंडाल के भीतर भगवान श्रीकृष्ण के जीवन चरित्र से जुड़ी मूर्तियों, झांकियों और कलाकृतियों को अंतिम रूप दे रहे हैं। प्रवेश मार्ग पर बंगाल से आई 20 सदस्यीय कारीगरों की विशेष टीम केवल बांस, प्लाई, रंग-बिरंगे कपड़ों और कृत्रिम फूलों के समन्वय से नयनाभिराम तोरणद्वार तैयार कर रही है। 1926 में प्लेग महामारी के बाद शुरू हुई थी परंपरा तेघड़ा के श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मेले की शुरुआत के पीछे एक भावुक और ऐतिहासिक घटना जुड़ी हुई है। स्थानीय निवासी पवन केजरीवाल ने मेले के गौरवशाली इतिहास को साझा करते हुए बताया कि वर्ष 1926 में पूरे तेघड़ा और आसपास के ग्रामीण इलाकों में भयावह प्लेग महामारी फैल गई थी। उस दौर में इलाज के अभाव और बीमारी के प्रकोप के कारण सैकड़ों लोगों की असमय मौत हो गई थी। पूरा गांव तबाही के कगार पर पहुंच गया था। इसी दौरान चैतन्य महाप्रभु के विचारों से प्रेरित एक महान कीर्तन मंडली यहां पहुंची। कीर्तन मंडली ने भयभीत और व्यथित ग्रामीणों को ढांढस बंधाया तथा महामारी से मुक्ति के लिए भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और सामूहिक हरिनाम संकीर्तन करने की सलाह दी। ग्रामीणों ने एकजुट होकर भगवान कृष्ण की पूजा-अर्चना शुरू की। स्थानीय मान्यता के अनुसार धीरे-धीरे प्लेग का असर समाप्त हो गया। इसके बाद वर्ष 1927 से यहां श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मेले का आयोजन शुरू हुआ, जो अब 2026 में अपने 100वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। देशभर से पहुंचे सैकड़ों कारीगर, लोक कला का दिखेगा संगम तेघड़ा का यह मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि लोक कला और कारीगरी का भी बड़ा मंच बन चुका है। इस बार मेले की तैयारियां चरम पर हैं। कोलकाता, चेन्नई, मुंबई, लखनऊ, देहरादून, छत्तीसगढ़ और राजस्थान से सैकड़ों कारीगर तेघड़ा में डेरा डाले हुए हैं। अलग-अलग पूजा समितियों की ओर से भारतीय स्थापत्य कला, प्राचीन मंदिरों और पौराणिक आख्यानों पर आधारित पंडाल तैयार किए जा रहे हैं। मेले को लेकर स्थानीय व्यापारियों, हस्तशिल्पकारों, झूला संचालकों और खान-पान के स्टॉल लगाने वाले विक्रेताओं में भी जबरदस्त उत्साह है। 5 सितंबर को होगा शताब्दी समारोह का उद्घाटन श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मेले के 100वें वर्ष को अविस्मरणीय बनाने के लिए बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग, बेगूसराय जिला प्रशासन तथा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मेला शताब्दी महोत्सव आयोजन समिति तेघड़ा की ओर से संयुक्त रूप से भव्य शासकीय कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। 5 सितंबर को होने वाले उद्घाटन समारोह में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार, बेगूसराय के प्रभारी मंत्री रामकृपाल यादव, गन्ना मंत्री संजय पासवान सहित बेगूसराय जिले के सभी विधायक मौजूद रहेंगे। 175 से अधिक स्थानों पर दंडाधिकारी और पुलिस बल तैनात इधर पूजा, मेला और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों को शांतिपूर्ण, सुरक्षित एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। संयुक्त आदेश जारी कर प्रमुख पूजा पंडालों, मंदिरों, मेला स्थलों, चौक-चौराहों, जुलूस एवं विसर्जन मार्गों तथा संवेदनशील स्थलों पर दंडाधिकारियों, पुलिस पदाधिकारियों और पुलिस बल की प्रतिनियुक्ति की गई है। डीएम रिची पांडेय ने बताया कि तेघड़ा, मंझौल, बखरी, बलिया एवं बेगूसराय सदर अनुमंडल सहित विभिन्न थाना क्षेत्रों में 175 से अधिक महत्वपूर्ण स्थानों पर दंडाधिकारी, पुलिस पदाधिकारी, सशस्त्र बल एवं लाठी बल की संयुक्त प्रतिनियुक्ति की गई है। भीड़भाड़ वाले पूजा पंडालों, मेला स्थलों, प्रमुख चौक-चौराहों और आवागमन के महत्वपूर्ण मार्गों पर लगातार निगरानी एवं सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। 24 घंटे सक्रिय रहेगा जिला नियंत्रण कक्ष समाहरणालय परिसर स्थित कारगिल विजय सभा भवन के ऊपरी तल पर 24 घंटे कार्यरत जिला नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है। इसका फोन नंबर 06243-222835 है। जिला नियंत्रण कक्ष के वरीय प्रभार में अपर समाहर्ता (विभागीय जांच) महेश्वर प्रसाद सिंह रहेंगे। जिले में समग्र विधि-व्यवस्था के वरीय प्रभार की जिम्मेदारी अपर समाहर्ता बृज किशोर चौधरी एवं मुख्यालय डीएसपी निखिल कुमार को दी गई है। सभी अनुमंडलों में भी नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं। किसी भी आकस्मिक परिस्थिति से निपटने के लिए दंगा निरोधी दस्ता आवश्यक उपकरणों और सुरक्षा सामग्री के साथ तैयार रहेगा। क्विक रिस्पांस टीम (QRT) को भी अलर्ट मोड में रखा गया है, ताकि आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके। डीजे के अनियंत्रित प्रयोग और अस्त्र-शस्त्र प्रदर्शन पर रोक जुलूस एवं विसर्जन मार्गों पर डीजे के अनियंत्रित प्रयोग तथा अस्त्र-शस्त्रों के प्रदर्शन पर प्रतिबंध रहेगा। पूजा समितियों एवं आयोजकों को प्रत्येक पूजा पंडाल में पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित स्वयंसेवकों की प्रतिनियुक्ति करने का निर्देश दिया गया है। स्वयंसेवकों के लिए पहचान पत्र अथवा बैच की व्यवस्था के साथ पंडालों में सीसीटीवी कैमरे और अग्निशामक यंत्र उपलब्ध रखना भी अनिवार्य किया गया है। सोशल मीडिया पर भी प्रशासन की कड़ी नजर फेसबुक, व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम और एक्स समेत विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी विशेष निगरानी रखी जा रही है। साइबर सेनानी और विशेष टीम आपत्तिजनक, भ्रामक अथवा सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाले संदेशों और पोस्टों पर लगातार नजर रखेगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अफवाह फैलाने और भ्रामक सामग्री प्रसारित करने वालों के खिलाफ त्वरित एवं सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बेगूसराय में होने वाले भारत के दूसरे सबसे बड़े श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मेले को लेकर पूरा जिला कृष्णमय हो गया है। जिले में 80 से अधिक भव्य पंडाल सजाए गए हैं। शुक्रवार की रात ठीक 12 बजे रोहिणी नक्षत्र में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म होगा। इसके साथ ही सभी पंडालों के पट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिए जाएंगे। इस बार का जन्मोत्सव दुर्लभ और अलौकिक ज्योतिषीय संयोगों के बीच मनाया जाएगा। द्वापर युग जैसा संयोग, वृषभ राशि में रहेंगे चंद्रमा शास्त्रों के अनुसार द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, मध्यरात्रि, रोहिणी नक्षत्र और वृषभ राशि के चंद्रमा के शुभ लग्न में हुआ था। इस वर्ष जन्माष्टमी पर भी इसी तरह का दुर्लभ संयोग बन रहा है। चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में विराजमान रहेंगे और रोहिणी नक्षत्र की साक्षी रहेगी। इसके साथ ही सर्वार्थ सिद्धि योग का भी महासंयोग बन रहा है। 100वें वर्ष में इतिहास रचने को तैयार तेघड़ा का मेला आस्था और सांस्कृतिक धरोहर के सबसे बड़े केंद्र के रूप में पहचान बना चुका तेघड़ा जन्माष्टमी मेला इस बार अपने 100वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। शताब्दी वर्ष को लेकर पूरा इलाका कृष्णमय हो चुका है। करीब तीन किलोमीटर के दायरे में फैले इस ऐतिहासिक मेले में काल्पनिक और वास्तविक मंदिरों के प्रारूप पर आधारित एक से बढ़कर एक भव्य पंडाल तैयार किए जा रहे हैं। शताब्दी वर्ष होने के कारण इस बार मेले की सजावट, प्रकाश व्यवस्था और झांकियों को विशेष रूप दिया जा रहा है। स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दराज के जिलों और पड़ोसी राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं में भी खासा उत्साह है। विष्णुपद मंदिर की तर्ज पर तैयार हो रहा भव्य पंडाल मेले के प्रमुख आकर्षणों में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मेला समिति रजिस्ट्री कार्यालय तेघड़ा की ओर से बनाया जा रहा भव्य पंडाल शामिल है। इस वर्ष समिति द्वारा तमिलनाडु के विश्वप्रसिद्ध विष्णुपद मंदिर की तर्ज पर विशाल और कलात्मक पंडाल का निर्माण कराया जा रहा है। पंडाल के मुख्य ढांचे को आकार देने के लिए राजस्थान और झारखंड के जामताड़ा से कुशल कारीगर बुलाए गए हैं। तमिलनाडु और कोलकाता से आए वरिष्ठ कलाकार पंडाल के भीतर भगवान श्रीकृष्ण के जीवन चरित्र से जुड़ी मूर्तियों, झांकियों और कलाकृतियों को अंतिम रूप दे रहे हैं। प्रवेश मार्ग पर बंगाल से आई 20 सदस्यीय कारीगरों की विशेष टीम केवल बांस, प्लाई, रंग-बिरंगे कपड़ों और कृत्रिम फूलों के समन्वय से नयनाभिराम तोरणद्वार तैयार कर रही है। 1926 में प्लेग महामारी के बाद शुरू हुई थी परंपरा तेघड़ा के श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मेले की शुरुआत के पीछे एक भावुक और ऐतिहासिक घटना जुड़ी हुई है। स्थानीय निवासी पवन केजरीवाल ने मेले के गौरवशाली इतिहास को साझा करते हुए बताया कि वर्ष 1926 में पूरे तेघड़ा और आसपास के ग्रामीण इलाकों में भयावह प्लेग महामारी फैल गई थी। उस दौर में इलाज के अभाव और बीमारी के प्रकोप के कारण सैकड़ों लोगों की असमय मौत हो गई थी। पूरा गांव तबाही के कगार पर पहुंच गया था। इसी दौरान चैतन्य महाप्रभु के विचारों से प्रेरित एक महान कीर्तन मंडली यहां पहुंची। कीर्तन मंडली ने भयभीत और व्यथित ग्रामीणों को ढांढस बंधाया तथा महामारी से मुक्ति के लिए भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और सामूहिक हरिनाम संकीर्तन करने की सलाह दी। ग्रामीणों ने एकजुट होकर भगवान कृष्ण की पूजा-अर्चना शुरू की। स्थानीय मान्यता के अनुसार धीरे-धीरे प्लेग का असर समाप्त हो गया। इसके बाद वर्ष 1927 से यहां श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मेले का आयोजन शुरू हुआ, जो अब 2026 में अपने 100वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। देशभर से पहुंचे सैकड़ों कारीगर, लोक कला का दिखेगा संगम तेघड़ा का यह मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि लोक कला और कारीगरी का भी बड़ा मंच बन चुका है। इस बार मेले की तैयारियां चरम पर हैं। कोलकाता, चेन्नई, मुंबई, लखनऊ, देहरादून, छत्तीसगढ़ और राजस्थान से सैकड़ों कारीगर तेघड़ा में डेरा डाले हुए हैं। अलग-अलग पूजा समितियों की ओर से भारतीय स्थापत्य कला, प्राचीन मंदिरों और पौराणिक आख्यानों पर आधारित पंडाल तैयार किए जा रहे हैं। मेले को लेकर स्थानीय व्यापारियों, हस्तशिल्पकारों, झूला संचालकों और खान-पान के स्टॉल लगाने वाले विक्रेताओं में भी जबरदस्त उत्साह है। 5 सितंबर को होगा शताब्दी समारोह का उद्घाटन श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मेले के 100वें वर्ष को अविस्मरणीय बनाने के लिए बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग, बेगूसराय जिला प्रशासन तथा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मेला शताब्दी महोत्सव आयोजन समिति तेघड़ा की ओर से संयुक्त रूप से भव्य शासकीय कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। 5 सितंबर को होने वाले उद्घाटन समारोह में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार, बेगूसराय के प्रभारी मंत्री रामकृपाल यादव, गन्ना मंत्री संजय पासवान सहित बेगूसराय जिले के सभी विधायक मौजूद रहेंगे। 175 से अधिक स्थानों पर दंडाधिकारी और पुलिस बल तैनात इधर पूजा, मेला और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों को शांतिपूर्ण, सुरक्षित एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। संयुक्त आदेश जारी कर प्रमुख पूजा पंडालों, मंदिरों, मेला स्थलों, चौक-चौराहों, जुलूस एवं विसर्जन मार्गों तथा संवेदनशील स्थलों पर दंडाधिकारियों, पुलिस पदाधिकारियों और पुलिस बल की प्रतिनियुक्ति की गई है। डीएम रिची पांडेय ने बताया कि तेघड़ा, मंझौल, बखरी, बलिया एवं बेगूसराय सदर अनुमंडल सहित विभिन्न थाना क्षेत्रों में 175 से अधिक महत्वपूर्ण स्थानों पर दंडाधिकारी, पुलिस पदाधिकारी, सशस्त्र बल एवं लाठी बल की संयुक्त प्रतिनियुक्ति की गई है। भीड़भाड़ वाले पूजा पंडालों, मेला स्थलों, प्रमुख चौक-चौराहों और आवागमन के महत्वपूर्ण मार्गों पर लगातार निगरानी एवं सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। 24 घंटे सक्रिय रहेगा जिला नियंत्रण कक्ष समाहरणालय परिसर स्थित कारगिल विजय सभा भवन के ऊपरी तल पर 24 घंटे कार्यरत जिला नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है। इसका फोन नंबर 06243-222835 है। जिला नियंत्रण कक्ष के वरीय प्रभार में अपर समाहर्ता (विभागीय जांच) महेश्वर प्रसाद सिंह रहेंगे। जिले में समग्र विधि-व्यवस्था के वरीय प्रभार की जिम्मेदारी अपर समाहर्ता बृज किशोर चौधरी एवं मुख्यालय डीएसपी निखिल कुमार को दी गई है। सभी अनुमंडलों में भी नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं। किसी भी आकस्मिक परिस्थिति से निपटने के लिए दंगा निरोधी दस्ता आवश्यक उपकरणों और सुरक्षा सामग्री के साथ तैयार रहेगा। क्विक रिस्पांस टीम (QRT) को भी अलर्ट मोड में रखा गया है, ताकि आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके। डीजे के अनियंत्रित प्रयोग और अस्त्र-शस्त्र प्रदर्शन पर रोक जुलूस एवं विसर्जन मार्गों पर डीजे के अनियंत्रित प्रयोग तथा अस्त्र-शस्त्रों के प्रदर्शन पर प्रतिबंध रहेगा। पूजा समितियों एवं आयोजकों को प्रत्येक पूजा पंडाल में पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित स्वयंसेवकों की प्रतिनियुक्ति करने का निर्देश दिया गया है। स्वयंसेवकों के लिए पहचान पत्र अथवा बैच की व्यवस्था के साथ पंडालों में सीसीटीवी कैमरे और अग्निशामक यंत्र उपलब्ध रखना भी अनिवार्य किया गया है। सोशल मीडिया पर भी प्रशासन की कड़ी नजर फेसबुक, व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम और एक्स समेत विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी विशेष निगरानी रखी जा रही है। साइबर सेनानी और विशेष टीम आपत्तिजनक, भ्रामक अथवा सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाले संदेशों और पोस्टों पर लगातार नजर रखेगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अफवाह फैलाने और भ्रामक सामग्री प्रसारित करने वालों के खिलाफ त्वरित एवं सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

