नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 10 साल कैद:पानीपत की फास्ट ट्रैक पॉक्सो अदालत ने सुनाई सजा, 50 हजार रुपये जुर्माना

नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 10 साल कैद:पानीपत की फास्ट ट्रैक पॉक्सो अदालत ने सुनाई सजा, 50 हजार रुपये जुर्माना

पानीपत में करीब 14 साल की नाबालिग को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले जाने और उसके साथ दुष्कर्म करने के मामले में पानीपत की फास्ट ट्रैक पॉक्सो कोर्ट ने दोषी विपिन को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने अलग-अलग धाराओं में कुल 50 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर दोषी को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। ये सजा अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एवं फास्ट ट्रैक (पॉक्सो) के न्यायाधीश पीयूष शर्मा की कोर्ट ने सुनाई है। वहीं, दोषी को जिला जेल पानीपत भेजने के आदेश दिए गए हैं। दोषी विपिन पुत्र कंवरपाल मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के रणखंडी बयाला गांव का निवासी है और पानीपत की थाना चांदनीबाग एरिया की कॉलोनी में किराये पर रहता था। मामले में चांदनी बाग थाना पुलिस ने 2 मई 2024 को एफआईआर दर्ज की थी। इसमें पॉक्सो एक्ट की धारा 4 और भारतीय दंड संहिता की धाराओं 363, 366, 376 और 506 के तहत कार्रवाई की गई थी। शादी का झांसा देकर घर से ले जाने का आरोप मामले की शिकायत नाबालिग की मां ने पुलिस को दी थी। शिकायत के अनुसार, 1 मई 2024 को उनकी बेटी घर पर अकेली थी। इसी दौरान पड़ोस में किराये पर रहने वाला विपिन उसे बहला-फुसलाकर अपने गांव रणखंडी बयाला ले गया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि वहां उसने नाबालिग के साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए। बाद में बेटी घर लौटी तो उसने परिजनों को पूरी बात बताई। इसके बाद पुलिस को शिकायत दी गई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक, जांच के दौरान नाबालिग का मेडिकल कराया गया और उसके बयान दर्ज किए गए। आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया था। मामले में पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया। तीन धाराओं में सुनाई गई सजा कोर्ट के सजा वारंट के अनुसार, भारतीय दंड संहिता की धारा 376(1) के तहत दोषी को 10 साल का कठोर कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया। धारा 366 के तहत पांच साल की कैद और 15 हजार रुपये जुर्माना तथा धारा 506 के तहत तीन साल की कैद और 10 हजार रुपये जुर्माना सुनाया गया। तीनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी, इसलिए मुख्य कारावास की अवधि 10 साल होगी। जुर्माना जमा नहीं करने की स्थिति में धारा 376(1) के तहत एक साल, धारा 366 के तहत छह महीने और धारा 506 के तहत तीन महीने का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि मामले की जांच और सुनवाई के दौरान दोषी ने पहले जो अवधि हिरासत में बिताई है, उसे सजा में समायोजित किया जाएगा।

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