नाबालिग के अपहरण में दोषी को 7 साल की सजा:कानपुर देहात कोर्ट ने 50 हजार का जुर्माना भी लगाया, 13 साल पुराना मामला

नाबालिग के अपहरण में दोषी को 7 साल की सजा:कानपुर देहात कोर्ट ने 50 हजार का जुर्माना भी लगाया, 13 साल पुराना मामला

कानपुर देहात में नाबालिग के अपहरण के करीब 13 साल पुराने मामले में अदालत ने गुरुवार को बड़ा फैसला सुनाया है। दोषी पाए गए आरोपी को सात साल के सश्रम कारावास और 50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई है। अर्थदंड जमा नहीं करने पर आरोपी को तीन महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास भी भुगतना होगा। मामला 11 मई 2013 का है, जब थाना डेरापुर में एक नाबालिग लड़की का अपहरण कर ले जाने के आरोप में देवेंद्र शंखवार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। आरोपी भोगनीपुर थाना क्षेत्र के अमरौधा स्थित गढ़ी दरवाजा का निवासी है। इस मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की थी। पुलिस के मुताबिक, विवेचक ने मामले की जांच के दौरान वादी और गवाहों के बयान दर्ज किए और साक्ष्य जुटाए। विवेचना पूरी होने के बाद 25 जनवरी 2014 को आरोपी के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। इसके बाद मामले की सुनवाई न्यायालय में चली। अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर एडीजे/फास्ट ट्रैक कोर्ट, कानपुर देहात ने 22 अक्टूबर 2026 को आरोपी देवेंद्र शंखवार को दोषी करार दिया। अदालत ने उसे सात साल के सश्रम कारावास और 50 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया। इस मामले में आरोपी को सजा दिलाने के लिए पुलिस ने ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत प्रभावी पैरवी की। थाना डेरापुर पुलिस, कोर्ट पैरोकार, अभियोजन पक्ष और मॉनिटरिंग सेल ने मामले की सुनवाई के दौरान लगातार पैरवी की। करीब 13 साल पुराने इस मामले में अदालत के फैसले के बाद पुलिस ने इसे ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत प्रभावी पैरवी का परिणाम बताया है। हालांकि, इस फैसले का मुख्य संदेश यही है कि अदालत में साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर दोष सिद्ध होने पर अपराध के लिए सजा दी जाती है।

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