दिशा सालियान केस: 12वीं मंजिल से गिरने पर भी चेहरे की हड्डी नहीं टूटी! पुलिस की जांच पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल

दिशा सालियान केस: 12वीं मंजिल से गिरने पर भी चेहरे की हड्डी नहीं टूटी! पुलिस की जांच पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल

Disha Salian CBI Investigation: दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की कथित संदिग्ध मौत के मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। अदालत ने मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने का निर्देश दिया है। अदालत ने मुंबई पुलिस की शुरुआती कार्रवाई और 6 साल तक चली जांच में गंभीर खामियां होने की बात कही और कहा कि इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए CBI जैसी एजेंसी की जांच जरूरी है।

जवाब से ज्यादा उठ रहे सवाल, पुलिस को फटकार

न्यायमूर्ति सारंग कोतवाल और न्यायमूर्ति रंजीतसिंह भोंसले की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि पुलिस द्वारा की गई जांच कई सवालों के जवाब देने के बजाय नए सवाल खड़े करती है। अदालत ने यह भी कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 174 के तहत जांच का उद्देश्य अनिश्चित समय तक जांच को जारी रखना नहीं है।

अदालत ने कहा कि पुलिस अधिकारियों को CrPC की धारा 174 के तहत जांच जल्द पूरी करनी चाहिए, ताकि यह तय किया जा सके कि FIR दर्ज करने की जरूरत है या नहीं। जांच में देरी होने से महत्वपूर्ण सबूत नष्ट या गायब हो सकते हैं।

कोर्ट ने विशेष रूप से इस बात पर गौर किया कि दिशा सालियान मामले की जांच दो चरणों में हुई और करीब छह साल तक चलती रही। पीठ के मुताबिक, यह धारा 174 के तहत की जाने वाली जांच का उद्देश्य नहीं है।

अदालत ने कहा कि इस मामले में पुलिस की जांच ने जवाब देने से ज्यादा सवाल खड़े किए हैं। इसी वजह से CBI जांच की जरूरत महसूस हुई।

दिशा के पिता ने लगाया था हत्या और गैंगरेप का आरोप

यह मामला दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान की याचिका के बाद हाई कोर्ट के सामने आया। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनकी बेटी को कुछ प्रभावशाली लोगों की कथित आपत्तिजनक गतिविधियों के बारे में जानकारी मिली थी। उनका दावा था कि दिशा ने इसकी जानकारी सुशांत सिंह राजपूत को दी थी और बाद में इन प्रभावशाली लोगों को इसकी जानकारी हो गई।

सतीश सालियान ने आरोप लगाया था कि उनकी बेटी के साथ गैंगरेप किया गया और इसके बाद उसकी हत्या कर दी गई।

हालांकि, मुंबई पुलिस की शुरुआती जांच में दिशा की मौत को दुर्घटना माना गया था। पुलिस के अनुसार, दिशा की मौत मुंबई के मलाड इलाके में एक ऊंची इमारत की 12वीं मंजिल से गिरने के बाद हुई थी।

12वीं मंजिल से गिरने के बावजूद चोटों को लेकर उठे सवाल

दिशा के पिता ने अपनी याचिका में जांच से जुड़ी कई विसंगतियों का उल्लेख किया था। इनमें 12वीं मंजिल से गिरने के बावजूद शरीर पर गंभीर चोटों का कथित तौर पर नहीं मिलना, मौके पर कम मात्रा में खून मिलना, पंचनामा तैयार करने में देरी और गवाहों के बयान ठीक से दर्ज नहीं किए जाने जैसे मुद्दे शामिल थे।

हाई कोर्ट ने भी जांच के इन पहलुओं को गंभीरता से लिया। अदालत ने कहा कि CrPC की धारा 176 के तहत निर्धारित प्रक्रिया का सही तरीके से पालन नहीं किया गया। कोर्ट के अनुसार, मामले में मजिस्ट्रेट द्वारा आवश्यक जांच नहीं की गई और पुलिस ने भी धारा 174 के प्रावधानों का पूरी तरह पालन नहीं किया।

स्पॉट पंचनामा में देरी पर भी कोर्ट ने उठाए सवाल

पीठ ने कहा कि घटनास्थल का पंचनामा देर से किया गया। अदालत को ऐसे संकेत भी मिले कि पुलिस शुरुआत से मामले को महज दुर्घटना मानकर नहीं चल रही थी, बल्कि उसे किसी तरह की गड़बड़ी या साजिश का संदेह था।

जांच के शुरुआती दौर में पुलिस ने दिशा के दोस्त रोहन राय से भी पूछताछ की थी। कोर्ट ने उसके बयान से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं का उल्लेख किया। इनमें यह बात सामने आई कि उसके दो अन्य दोस्तों ने उसे उस समय ग्राउंड फ्लोर पर जाने नहीं दिया, जहां दिशा का शव पड़ा था। इसके अलावा, उसे 12वीं मंजिल स्थित अपने फ्लैट से नीचे आने की अनुमति तब मिली, जब दिशा के शव को अस्पताल ले जाया जा चुका था।

दो गवाहों के बयानों पर भी कोर्ट का ध्यान

अदालत ने कहा कि घटनास्थल के पास मौजूद कम से कम दो गवाहों ने किसी व्यक्ति के गिरने की आवाज सुनने की बात कही थी। दोनों ने बताया था कि दिशा चेहरे के बल गिरी थीं और उनके सिर से खून निकल रहा था।

इन दोनों गवाहों के बयान अगस्त 2020 में दर्ज किए गए थे। लेकिन अदालत के मुताबिक, पुलिस ने घटनास्थल से खून लगी मिट्टी बरामद नहीं की। इसके अलावा सिर पर खून बहने वाली चोट के बजाय केवल ठुड्डी पर चोट दर्ज होने की बात सामने आई।

पीठ ने इन बयानों को महत्वपूर्ण माना और जांच में इन पहलुओं को लेकर सवाल उठाए।

सिर और पसलियों में फ्रैक्चर, चेहरे की चोट पर कोर्ट ने जताई हैरानी

अदालत ने पोस्टमार्टम से जुड़ी रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों पर भी गौर किया। आंतरिक जांच में खोपड़ी की हड्डियों और पसलियों में रैखिक फ्रैक्चर पाए जाने की बात कही गई, जबकि अन्य अंग सुरक्षित थे। सामने के दांत भी टूटे हुए थे।

पीठ ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति 12वीं मंजिल से चेहरे के बल गिरता है, तो केवल ठुड्डी पर 1×1×1 सेंटीमीटर की चोट मिलना स्वीकार करना मुश्किल है। अदालत ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि चेहरे की एक भी हड्डी में फ्रैक्चर नहीं था। न जबड़े की हड्डी टूटी थी और न ही नाक की हड्डी में फ्रैक्चर पाया गया।

आदित्य ठाकरे के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग

बॉम्बे हाई कोर्ट ने CBI को दिशा सालियान की मौत के मामले में FIR दर्ज करने और उनके पिता सतीश सालियान का बयान दर्ज करने का निर्देश दिया है। सतीश सालियान ने शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे के बेटे और विधायक आदित्य ठाकरे के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग भी की थी। हालांकि, अदालत ने किसी व्यक्ति के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी को तब तक आरोपी नहीं माना जा सकता, जब तक जांच के दौरान उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत सामने न आ जाएं। अदालत ने साफ किया कि मामले की जांच करना सीबीआई का काम है और जांच के नतीजे के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय होगी।

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