बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (बीपीएसएससी) की 1799 पदों पर हुई दारोगा बहाली की परीक्षा विवादों में है। क्रमवार अभ्यर्थियों के पास होने, परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र, ओएमआर शीट के सोशल मीडिया पर वायरल होने के कारण अभ्यर्थी परीक्षा रद्द करने की मांग कर रहे हैं। इस प्रकरण में गयाजी के रामपुर स्थित गया कॉलेज के पास पुलिस ने सॉल्वर गैंग के शातिर को नकल कराते हुए गिरफ्तार किया था। दैनिक भास्कर की पड़ताल में यह बात सामने आई है कि पूरे बिहार के 59 परीक्षा केंद्रों में से इसी सेंटर से सबसे अधिक 471 कैंडिडेट पास हुए। विवादों में पूर्णिया का राजकीय कन्या उच्च विद्यालय भी है। इस परीक्षा केंद्र से 113 अभ्यर्थी सफल हुए हैं। परीक्षा के दिन 27 मई को जिन दो केंद्रों पर वॉकी-टॉकी, सॉल्वर सिंडिकेट और प्रश्नपत्र की फोटो खींचकर वायरल करने की नामजद प्राथमिकी दर्ज हुई थी, आयोग के रिजल्ट में उन्हीं दोनों केंद्रों से कुल 584 अभ्यर्थियों का चयन हुआ है। गेट के बाहर सॉल्वर गैंग, अंदर से 471 पास, सफलता दर 32.7% गयाजी के रामपुर थाने में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, परीक्षा के दौरान गया कॉलेज के पास रामपुर शिव मंदिर से नालंदा निवासी सॉल्वर आशुतोष कुमार को पुलिस ने दबोचा था। उसके पास से वॉकी-टॉकी, लैपटॉप और ईयरफोन मिले थे। जांच में खुलासा हुआ कि वह ‘xyz’ नामक व्हाट्सएप ग्रुप (जिसमें 11 संदिग्ध नंबर जुड़े थे) से उत्तर लेकर गया कॉलेज के भीतर बैठे अभ्यर्थी मुकेश कुमार (रोल नंबर 111301… सीरीज) को वॉकी-टॉकी से प्रश्न हल करवा रहा था। इस संगठित गिरोह की गिरफ्तारी के बावजूद आयोग ने इस केंद्र का रिजल्ट होल्ड नहीं किया। आवंटित 1,440 परीक्षार्थियों में से रिकॉर्ड 471 पास घोषित हुए और इस केंद्र की सफलता दर 32.71% रही। जबकि राज्य का औसत पास प्रतिशत 31.37 है। पूर्णिया में सेंटर के कमरा नंबर 23 का पेपर लीक, केंद्र से 113 पास, सफलता दर 25.7% पूर्णिया साइबर थाने की प्राथमिकी के मुताबिक, केहट स्थित राजकीय कन्या उच्च विद्यालय के कमरा नंबर 23 में तैनात वीक्षक मृत्युंजय कुमार ने अनुपस्थित छात्रों की प्रश्न पुस्तिका संख्या 22532773 और 22532780 की तस्वीरें अपने मोबाइल में खींचीं। इसके बाद मोबाइल अपने ममेरे भाई पप्पू कुमार को सौंप दिया, जिससे प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। पुलिस ने वीक्षक को गिरफ्तार कर जेल भेजा। सवाल यह है कि जिस केंद्र और जिस कमरे से पर्चे की गोपनीयता भंग हुई, वहां के परिणाम को होल्ड करने के बजाय आयोग ने सामान्य रूप से जारी कर दिया। यहां 439 में से 113 परीक्षार्थी पास हो गए (सफलता दर 25.7%)। बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (बीपीएसएससी) की 1799 पदों पर हुई दारोगा बहाली की परीक्षा विवादों में है। क्रमवार अभ्यर्थियों के पास होने, परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र, ओएमआर शीट के सोशल मीडिया पर वायरल होने के कारण अभ्यर्थी परीक्षा रद्द करने की मांग कर रहे हैं। इस प्रकरण में गयाजी के रामपुर स्थित गया कॉलेज के पास पुलिस ने सॉल्वर गैंग के शातिर को नकल कराते हुए गिरफ्तार किया था। दैनिक भास्कर की पड़ताल में यह बात सामने आई है कि पूरे बिहार के 59 परीक्षा केंद्रों में से इसी सेंटर से सबसे अधिक 471 कैंडिडेट पास हुए। विवादों में पूर्णिया का राजकीय कन्या उच्च विद्यालय भी है। इस परीक्षा केंद्र से 113 अभ्यर्थी सफल हुए हैं। परीक्षा के दिन 27 मई को जिन दो केंद्रों पर वॉकी-टॉकी, सॉल्वर सिंडिकेट और प्रश्नपत्र की फोटो खींचकर वायरल करने की नामजद प्राथमिकी दर्ज हुई थी, आयोग के रिजल्ट में उन्हीं दोनों केंद्रों से कुल 584 अभ्यर्थियों का चयन हुआ है। गेट के बाहर सॉल्वर गैंग, अंदर से 471 पास, सफलता दर 32.7% गयाजी के रामपुर थाने में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, परीक्षा के दौरान गया कॉलेज के पास रामपुर शिव मंदिर से नालंदा निवासी सॉल्वर आशुतोष कुमार को पुलिस ने दबोचा था। उसके पास से वॉकी-टॉकी, लैपटॉप और ईयरफोन मिले थे। जांच में खुलासा हुआ कि वह ‘xyz’ नामक व्हाट्सएप ग्रुप (जिसमें 11 संदिग्ध नंबर जुड़े थे) से उत्तर लेकर गया कॉलेज के भीतर बैठे अभ्यर्थी मुकेश कुमार (रोल नंबर 111301… सीरीज) को वॉकी-टॉकी से प्रश्न हल करवा रहा था। इस संगठित गिरोह की गिरफ्तारी के बावजूद आयोग ने इस केंद्र का रिजल्ट होल्ड नहीं किया। आवंटित 1,440 परीक्षार्थियों में से रिकॉर्ड 471 पास घोषित हुए और इस केंद्र की सफलता दर 32.71% रही। जबकि राज्य का औसत पास प्रतिशत 31.37 है। पूर्णिया में सेंटर के कमरा नंबर 23 का पेपर लीक, केंद्र से 113 पास, सफलता दर 25.7% पूर्णिया साइबर थाने की प्राथमिकी के मुताबिक, केहट स्थित राजकीय कन्या उच्च विद्यालय के कमरा नंबर 23 में तैनात वीक्षक मृत्युंजय कुमार ने अनुपस्थित छात्रों की प्रश्न पुस्तिका संख्या 22532773 और 22532780 की तस्वीरें अपने मोबाइल में खींचीं। इसके बाद मोबाइल अपने ममेरे भाई पप्पू कुमार को सौंप दिया, जिससे प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। पुलिस ने वीक्षक को गिरफ्तार कर जेल भेजा। सवाल यह है कि जिस केंद्र और जिस कमरे से पर्चे की गोपनीयता भंग हुई, वहां के परिणाम को होल्ड करने के बजाय आयोग ने सामान्य रूप से जारी कर दिया। यहां 439 में से 113 परीक्षार्थी पास हो गए (सफलता दर 25.7%)।

