मंदिर का इतिहास करीब 60 वर्ष पुराना
मंदिर की देखरेख गणपति देवस्थान पंच कमेटी करती है। वर्तमान में समिति के अध्यक्ष नागेन्द्र मेहरवाड़े हैं। मंदिर के पुजारी विकास आचार्य पिछले करीब दस वर्षों से यहां पूजा-अर्चना कर रहे हैं। उनके अनुसार मंदिर का इतिहास करीब 60 वर्ष पुराना है, जबकि वर्तमान स्वरूप में मंदिर की प्रतिष्ठा करीब 35 वर्ष पहले हुई थी।
सवनूर के काले पत्थर से बनी भव्य प्रतिमा
मंदिर में स्थापित भगवान गणेश की वर्तमान भव्य प्रतिमा सवनूर के काले पत्थर से निर्मित है। इससे पहले यहां संगमरमर की अपेक्षाकृत छोटी गणेश प्रतिमा स्थापित थी। बाद में बड़ी काले पत्थर की प्रतिमा की स्थापना की गई। पुरानी संगमरमर की प्रतिमा को भी श्रद्धा के साथ नई प्रतिमा के समीप रखा गया है। इस तरह मंदिर में पुरानी परंपरा और नए स्वरूप की आस्था एक साथ दिखाई देती है।

शिव परिवार की झलक
मंदिर का प्रवेश द्वार भी श्रद्धालुओं का विशेष ध्यान आकर्षित करता है। प्रवेश द्वार के ऊपरी हिस्से में भगवान शिव, माता पार्वती, कार्तिकेय और भगवान गणेश की आकृतियां उकेरी गई हैं। मंदिर में प्रवेश करते ही शिव परिवार की झलक श्रद्धालुओं में विशेष आध्यात्मिक भाव जगाती है।
गणेश जयंती पर निकलती है पालकी यात्रा
मंदिर की धार्मिक परंपराओं में पालकी उत्सव का विशेष महत्व है। गणेश जयंती के अवसर पर भगवान गणेश की पालकी मंदिर परिसर से बाहर निकालकर दाजीबानपेट के प्रमुख मार्गों से शोभायात्रा के रूप में निकाली जाती है। पालकी दाजीबानपेट मैन रोड, दुर्गदबेल, तुमकुर ओणी, ताड़पत्री ओणी और चेन्नम्मा सर्किल से होते हुए पुन: मंदिर पहुंचती है। इस दौरान पूरे क्षेत्र में भक्ति और उत्साह का वातावरण रहता है।
इस बार 12 दिवसीय गणेशोत्सव
आगामी गणेशोत्सव को लेकर भी मंदिर में विशेष तैयारियां की जा रही हैं। इस बार यहां 12 दिवसीय गणेशोत्सव मनाया जाएगा। उत्सव के दौरान मंदिर परिसर में मिट्टी से निर्मित गणेश प्रतिमा स्थापित की जाएगी। धार्मिक अनुष्ठानों, पूजा-अर्चना और विभिन्न आयोजनों के साथ पूरे क्षेत्र में गणेश भक्ति का माहौल रहेगा। करीब छह दशकों से दाजीबानपेट की आस्था और सामाजिक जीवन से जुड़े इस मंदिर में श्रद्धालुओं का विश्वास आज भी अटूट है। व्यस्त बाजार और कारोबार की चहल-पहल के बीच हुब्बल्ली के राजा का दरबार लोगों के लिए आस्था और विश्वास का विशेष केंद्र बना हुआ है।

दुकान जाने से पहले गणपति के दर्शन
राजस्थान मूल के श्रद्धालु एवं हुब्बल्ली के व्यापारी धर्मेन्द्र माली कहते हैं कि दाजीबानपेट के व्यस्त बाजार क्षेत्र में स्थित होने के कारण मंदिर से व्यापारियों का विशेष जुड़ाव है। अनेक व्यापारी प्रतिदिन अपनी दुकान खोलने या कारोबार शुरू करने से पहले गणपति के दर्शन करते हैं। बाजार में खरीदारी के लिए आने वाले लोग भी मंदिर पहुंचकर विघ्नहर्ता का आशीर्वाद लेते हैं। दिनभर बाजार की चहल-पहल के बीच मंदिर में श्रद्धा और भक्ति का वातावरण बना रहता है।

हर मंगलवार विशेष अलंकार
मंदिर के पुजारी विकास आचार्य बताते हैं कि प्रत्येक मंगलवार भगवान गणेश का विशेष अलंकार किया जाता है। इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर का वार्षिकोत्सव भी धूमधाम से मनाया जाता है। इस दौरान गण होम, नवग्रह हवन, अन्न संतर्पण सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है।


