दमोह में गुरुवार शाम कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने रजिस्ट्री कार्यालय का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान टोकन के नाम पर निजी व्यक्ति द्वारा पैसे लेने की शिकायत मिली। कलेक्टर ने मौके से रजिस्टर जब्त कर पुलिस को जांच के निर्देश दिए। उन्होंने रजिस्ट्रार से भी जवाब मांगा है। ऑफलाइन एंट्री कर पैसे लेने की शिकायत कलेक्टर को शिकायत मिली थी कि संपदा 2.0 पोर्टल ऑनलाइन होने के बावजूद कार्यालय में ऑफलाइन रजिस्टर में एंट्री की जा रही थी। टोकन के नाम पर लोगों से पैसे लिए जा रहे थे। नोट टू एडिटर के अनुसार, रजिस्टर में एंट्री करने और पैसे लेने वाले युवक का कहना था कि राशि सर्विस प्रोवाइडर की है। वहीं, सर्विस प्रोवाइडर ने कहा कि वह पैसा किसी को देने के लिए लाया था। अब पुलिस इस मामले की जांच करेगी। जमीन की बिक्री और रजिस्ट्री में गड़बड़ी की शिकायतें निरीक्षण के दौरान भूमि मालिकों के नाम के आगे ‘उर्फ’ लगाकर जमीन दूसरों को बेचने की शिकायत सामने आई। नजूल की जमीन और पट्टे बिना अनुमति बेचने के मामले भी सामने आए। इसके अलावा, कॉलोनियों में मकानों की जगह प्लॉटों की रजिस्ट्री होने से सरकार को राजस्व का नुकसान होने की बात कही गई। कार्यालय में फीस के बोर्ड लगाने के निर्देश कलेक्टर ने कहा कि रजिस्ट्री कार्यालय के अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि कोई बाहरी व्यक्ति वहां बैठकर रजिस्टर न रखे और लोगों से पैसे न ले। ऐसे व्यक्ति को कार्यालय से बाहर किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि अब रजिस्ट्री कार्यालय में शासन की ओर से निर्धारित फीस के बोर्ड लगाए जाएंगे। सर्विस प्रोवाइडर को भी अपने यहां फीस की जानकारी वाले बोर्ड लगाने होंगे। मामले में पुलिस जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

